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MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
दर्पण जब साफ़ होता है तभी छवि स्वच्छ AGIి) -6957 दिखाई पड़ता है। ठीक ऐसे ही अगर हमें अपने भीतर आत्मतत्व का साक्षात्कार करना है तो अपने अहंकार और स्वार्थ का त्याग करना होगा | ~पंथ श्री हुजूर उदितमुनि नाम साहब अहकार स्वार्थ लोभ त्याय कर अहकार स्वार्थ अहकार और स्वार्थका KABIR DHARMDAS VANSHAVALI Ikabirdharmdasvanshavaliorg दर्पण जब साफ़ होता है तभी छवि स्वच्छ AGIి) -6957 दिखाई पड़ता है। ठीक ऐसे ही अगर हमें अपने भीतर आत्मतत्व का साक्षात्कार करना है तो अपने अहंकार और स्वार्थ का त्याग करना होगा | ~पंथ श्री हुजूर उदितमुनि नाम साहब अहकार स्वार्थ लोभ त्याय कर अहकार स्वार्थ अहकार और स्वार्थका KABIR DHARMDAS VANSHAVALI Ikabirdharmdasvanshavaliorg
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    गुरु गोविंद दोनों खड़े , काके लागुं पाय। बलिहारी गुरु आपने , गोविंद दियो बताय Il 312f: जब गुरु और भगवान दोनों सामने हों , तो पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही हमें भगवान पहुंचने का मार्ग बताते हैं। নক गुरु गोविंद दोनों खड़े , काके लागुं पाय। बलिहारी गुरु आपने , गोविंद दियो बताय Il 312f: जब गुरु और भगवान दोनों सामने हों , तो पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही हमें भगवान पहुंचने का मार्ग बताते हैं। নক
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    शब्द सम्भारे बोलिए, शब्द के हाथ न पाँव| एक शब्द औषधि करे, কক্র ক্রই ঘান Il GenerateddvONEPLUS Al शब्द सम्भारे बोलिए, शब्द के हाथ न पाँव| एक शब्द औषधि करे, কক্র ক্রই ঘান Il GenerateddvONEPLUS Al
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  • Prakash Mahant - Author on ShareChat
    Prakash Mahant
    #🙏🙏saheb bandagi saheb🙏🙏
    saheb bandag Saheb जैसी संगत वैसी रंगत , गुरु मिले तो मुक्ति! saheb bandag Saheb जैसी संगत वैसी रंगत , गुरु मिले तो मुक्ति!
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    मोक्ष जो हमारा &&, वह तो परमात्मा के चरणों में समर्पित होने से ही प्राप्त होगा| T8 जो है भक्ति, भाव, सेवा और समर्पण का मार्ग है। श्री सदगुरू कबीर साहेब भक्ति समर्पण Td ಭd इन्हीं चार तत्वों से जीवन पवित्र होता है और परमात्मा की कृपा से मोंक्ष की प्राप्ति होती है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब मोक्ष जो हमारा &&, वह तो परमात्मा के चरणों में समर्पित होने से ही प्राप्त होगा| T8 जो है भक्ति, भाव, सेवा और समर्पण का मार्ग है। श्री सदगुरू कबीर साहेब भक्ति समर्पण Td ಭd इन्हीं चार तत्वों से जीवन पवित्र होता है और परमात्मा की कृपा से मोंक्ष की प्राप्ति होती है। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    25 & 66 aui ೫೯ ज्ञान , भक्ति और मोक्ष का मार्ग छिपा है। ११ Kabir Ke Ram & तावी बमर कवीर वागी 25 & 66 aui ೫೯ ज्ञान , भक्ति और मोक्ष का मार्ग छिपा है। ११ Kabir Ke Ram & तावी बमर कवीर वागी
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    जीव मरा तो जोवित हुआ , मरकर पाया प्रण| अपना आप मिटा दिया, तब जाना भगवन।| अहंकार मिटा , आत्मज्ञान जागा। FOLLOW GOD VLOGS आध्यात्मिक विचार সস ০ মকি০ সান जीव मरा तो जोवित हुआ , मरकर पाया प्रण| अपना आप मिटा दिया, तब जाना भगवन।| अहंकार मिटा , आत्मज्ञान जागा। FOLLOW GOD VLOGS आध्यात्मिक विचार সস ০ মকি০ সান
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    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    ١١ ٣٩٤ ١١ सतगुरु कबीर साहेब की शरण ही जीवन का परम उद्रेश्य है। अब मोहिं दरसन देहु कबीर। 1 अर्थः हे सतगुरु कबीर साहेब! अब आप मुझे अपने साक्षात दर्शन दीजिए। मेरी आत्मा आपके दर्शनों के लिए व्याकुल है। दरस से पाप कटत है, 35R 2 निरमल होत शरीर। अर्थः आपके पावन दर्शन मात्र से ही मनुष्य के जन्म ्जन्मांतर के सारे पाप नष्ट होे जाते हैं, और उसका तनन्मन ( शरीर ) पूरी तरह पवित्र और निर्मल हो जाता है। अमृत भोजन हंसा पावे , 3 खीर।। கி शब्द अर्थः जो जीवात्मा रूपी हंस आपकी शरण में आता है वह आपके सत्य वचनों (शब्दों ) रूपी दूध की खीर अमृत भोजन प्राप्त करता है। अर्थात, उसे परम फ। ज्ञान और परम आनंद की प्राप्ति होती है। जह देखो जहं पाट पटंबर , ओढ़न अम्बर चीर। अर्थः प्रभु की कृपा से अब मैं जहॉ भी देखता हूँ॰ मुझे चारों ओर दिव्य वस्त्र ( पाट पटंबर ) और सतगुरु की कृपा से पाप कटते हैं रेशमी चादरें ही दिखाई देती हैं। इसका ज्ञान मिलता है, और जीवात्मा को है कि गुरु की कृपा से संसार आध्यात्मिक अर्थ के कणन्कण में परमात्मा का वैभव और सत्यलोक का मार्ग प्राप्त होता हैi प्रकाश व्याप्त दिखाई देने लगता है। धरमदास की अरज गुंसाई, 5 हंस लगावो तीर।। মনযুত अर्थः धनी धरमदास साहब की अपने स्वामी (गुंसाई) কনীয মাচন से यही विनम्र विनती है कि इस दास रूपी हंस को (সীঃ ক কিনাই) भवसागर पार कराकर सत्यलाक दीजिए ताकि उसे जन्म-्मरण के चक्र परलगा से मुक्ति मिल सके। ग्ुर शब्द ही सार है उद्घार है सप्रेम साहेब बंदगी साहेब ١١ ٣٩٤ ١١ सतगुरु कबीर साहेब की शरण ही जीवन का परम उद्रेश्य है। अब मोहिं दरसन देहु कबीर। 1 अर्थः हे सतगुरु कबीर साहेब! अब आप मुझे अपने साक्षात दर्शन दीजिए। मेरी आत्मा आपके दर्शनों के लिए व्याकुल है। दरस से पाप कटत है, 35R 2 निरमल होत शरीर। अर्थः आपके पावन दर्शन मात्र से ही मनुष्य के जन्म ्जन्मांतर के सारे पाप नष्ट होे जाते हैं, और उसका तनन्मन ( शरीर ) पूरी तरह पवित्र और निर्मल हो जाता है। अमृत भोजन हंसा पावे , 3 खीर।। கி शब्द अर्थः जो जीवात्मा रूपी हंस आपकी शरण में आता है वह आपके सत्य वचनों (शब्दों ) रूपी दूध की खीर अमृत भोजन प्राप्त करता है। अर्थात, उसे परम फ। ज्ञान और परम आनंद की प्राप्ति होती है। जह देखो जहं पाट पटंबर , ओढ़न अम्बर चीर। अर्थः प्रभु की कृपा से अब मैं जहॉ भी देखता हूँ॰ मुझे चारों ओर दिव्य वस्त्र ( पाट पटंबर ) और सतगुरु की कृपा से पाप कटते हैं रेशमी चादरें ही दिखाई देती हैं। इसका ज्ञान मिलता है, और जीवात्मा को है कि गुरु की कृपा से संसार आध्यात्मिक अर्थ के कणन्कण में परमात्मा का वैभव और सत्यलोक का मार्ग प्राप्त होता हैi प्रकाश व्याप्त दिखाई देने लगता है। धरमदास की अरज गुंसाई, 5 हंस लगावो तीर।। মনযুত अर्थः धनी धरमदास साहब की अपने स्वामी (गुंसाई) কনীয মাচন से यही विनम्र विनती है कि इस दास रूपी हंस को (সীঃ ক কিনাই) भवसागर पार कराकर सत्यलाक दीजिए ताकि उसे जन्म-्मरण के चक्र परलगा से मुक्ति मिल सके। ग्ुर शब्द ही सार है उद्घार है सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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  • saheb bandagi group - Author on ShareChat
    saheb bandagi group
    #🙏🙏saheb bandagi saheb🙏🙏 #🙏Saprem Saheb Bandagi Saheb🙏
    सद्गुरु सत्यनाम सत्यनास कबीर साहेब డ్డీ सत्यनाम # के संपूर्ण दर्शन का यदि एक డ్డి शब्द में सार कहा जाए, ಕ तो वह प्रेम है। यह प्रेम केवल भावुकता नहीं है, और न ही यह आकर्षण है। सद्गुरु कबीर साहेब का प्रेम आत्मा का वह निर्मल भाव है, जिसमें स्वार्थ और अहंकार समाप्त हो जाता है और मनुष्य स्वयं को समस्त सृष्टि से जुड़ा हुआ महसूस करता है। सद्गुरु सत्यनाम सत्यनास कबीर साहेब డ్డీ सत्यनाम # के संपूर्ण दर्शन का यदि एक డ్డి शब्द में सार कहा जाए, ಕ तो वह प्रेम है। यह प्रेम केवल भावुकता नहीं है, और न ही यह आकर्षण है। सद्गुरु कबीर साहेब का प्रेम आत्मा का वह निर्मल भाव है, जिसमें स्वार्थ और अहंकार समाप्त हो जाता है और मनुष्य स्वयं को समस्त सृष्टि से जुड़ा हुआ महसूस करता है।
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  • MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
    MEKHRAM SAHU
    #🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
    |l সমেনাম |l सृजन सो प्रीत मोरी लागी Il করনীব মতন মতন মী স্ীল মীহী লাগী, दरस को भयाे बैरागी | नहीं वैराग मोहे आया, सांई के गुणो लव लाया।। आभूषण खाक तन साजा , ललन को देख मन लाजा| মান किया यह देह कुर्बनी, कबीर बेदर्दी दर्द ना जानी ।। होवे कोई अमर का वा्सी , दिखावे ख्याल पुरवासी| हुआ अजगैंव का डंका, चलो जंहाँ महल है बंकाIl देखत छवि टरत न टारी, जाऊाँ मैं चरन बलिहारी। कबीर आमिन की विनय कर जोरी, মাট্ন মী 3ংত য্রী মীহী Il कबीर कहे सुनो भाई साधो, सांई से दूरी नहि काहू।  प्रेम लगाओं , नाम जपों I। साहेब बंदगी साहेब II सोई सच्चा है राहू।।  संत कबीर |l সমেনাম |l सृजन सो प्रीत मोरी लागी Il করনীব মতন মতন মী স্ীল মীহী লাগী, दरस को भयाे बैरागी | नहीं वैराग मोहे आया, सांई के गुणो लव लाया।। आभूषण खाक तन साजा , ललन को देख मन लाजा| মান किया यह देह कुर्बनी, कबीर बेदर्दी दर्द ना जानी ।। होवे कोई अमर का वा्सी , दिखावे ख्याल पुरवासी| हुआ अजगैंव का डंका, चलो जंहाँ महल है बंकाIl देखत छवि टरत न टारी, जाऊाँ मैं चरन बलिहारी। कबीर आमिन की विनय कर जोरी, মাট্ন মী 3ংত য্রী মীহী Il कबीर कहे सुनो भाई साधो, सांई से दूरी नहि काहू।  प्रेम लगाओं , नाम जपों I। साहेब बंदगी साहेब II सोई सच्चा है राहू।।  संत कबीर
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