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#गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार
गीता - यतः प्रवृत्तिर्भूतानां यैेन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः I।  जिस परमेश्वरसे सप्पूर्ण प्राणियोंको उत्पत्ति हुई हैॅ और जिससे यह समस्त जगत् व्याप्त है९ उस परमेश्वरको अपनैे स्वाभाविक कर्मौँद्वारा पूजा करके ? मनुप्य परमरसिद्धिको प्राप्त हा जाता ्है ।l ४६ Il fag: श्रेयान्स्वधर्मों परधर्मात्स्वनुष्ठितात् | स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाजौति किल्चिपम्II  ಊೆಳ अच्छौ प्रकार आचरण किये हुए दूसरेकै ग़ूणरहित भौ अपना धर्प श्रेष्ठ है; क्योंकि स्वभावसे नियत कियै हुए स्वधर्मरूप कर्मँको करता हुआ  मनुण्य पापको नर्हों प्राप्त होता II ४७ |l वैसे ऐ१ी सप्पूर्ण   संसार १० जेसे रफं जतसे व्याप्त ४ Han7 Im aa :! ? ঠর বনিন্ননা ম্বী বনিক্কী ৮ী মনবে ম৭স্বন্ক বনিক্কা বিলন কর্নৌ ভু} ঘনিষ্ক মান্বানুমা ৭নিক্কধ ৮ী লিব মন; वाणो॰ शरौरसे कर्प करतो ऐ बेसे छो परपेष्वरको हो सर्वस्व सपञ्चकर   परमेश्वरका वित्तन करते एए परमे४रको  आज्ञाके अनुमार पन् वाणो और राररसे फ्त्पे परके ऐो लिपे स्वार्भाविरु कर्तव्यकर्षका आचरप करना ' कर्मह्ठाण पत्पेपरको पूचना ' ४। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार यतः प्रवृत्तिर्भूतानां यैेन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः I।  जिस परमेश्वरसे सप्पूर्ण प्राणियोंको उत्पत्ति हुई हैॅ और जिससे यह समस्त जगत् व्याप्त है९ उस परमेश्वरको अपनैे स्वाभाविक कर्मौँद्वारा पूजा करके ? मनुप्य परमरसिद्धिको प्राप्त हा जाता ्है ।l ४६ Il fag: श्रेयान्स्वधर्मों परधर्मात्स्वनुष्ठितात् | स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाजौति किल्चिपम्II  ಊೆಳ अच्छौ प्रकार आचरण किये हुए दूसरेकै ग़ूणरहित भौ अपना धर्प श्रेष्ठ है; क्योंकि स्वभावसे नियत कियै हुए स्वधर्मरूप कर्मँको करता हुआ  मनुण्य पापको नर्हों प्राप्त होता II ४७ |l वैसे ऐ१ी सप्पूर्ण   संसार १० जेसे रफं जतसे व्याप्त ४ Han7 Im aa :! ? ঠর বনিন্ননা ম্বী বনিক্কী ৮ী মনবে ম৭স্বন্ক বনিক্কা বিলন কর্নৌ ভু} ঘনিষ্ক মান্বানুমা ৭নিক্কধ ৮ী লিব মন; वाणो॰ शरौरसे कर्प करतो ऐ बेसे छो परपेष्वरको हो सर्वस्व सपञ्चकर   परमेश्वरका वित्तन करते एए परमे४रको  आज्ञाके अनुमार पन् वाणो और राररसे फ्त्पे परके ऐो लिपे स्वार्भाविरु कर्तव्यकर्षका आचरप करना ' कर्मह्ठाण पत्पेपरको पूचना ' ४। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat