satyam jee Mahraj
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#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - ঐ ৎব্ধ' शास्त्रीय इतिहांस ऐसा व्यक्ती जो immortel है लेकिन meenning less है ओर वो हे आदमी अमर हो जाय उसका समाधान नही है। अस्वस्थामा किंतु पृथ्वी पे कहीं का भी आदमी हो कितना भी ताकतवर हो [್ಡೆ೯್೯್' उसके द्वारा निर्मीत पे कहीं न कहीं पृथ्वी समस्या का समाथान लिए समाधान के उत्तम साधन व्यक्ती स्वयं अवश्य होता है किंतु रास्ट्रिय या वैश्विक हो अड़चन तब आती है जब समस्या समाधान अवश्य होता है / ঐ ৎব্ধ' शास्त्रीय इतिहांस ऐसा व्यक्ती जो immortel है लेकिन meenning less है ओर वो हे आदमी अमर हो जाय उसका समाधान नही है। अस्वस्थामा किंतु पृथ्वी पे कहीं का भी आदमी हो कितना भी ताकतवर हो [್ಡೆ೯್೯್' उसके द्वारा निर्मीत पे कहीं न कहीं पृथ्वी समस्या का समाथान लिए समाधान के उत्तम साधन व्यक्ती स्वयं अवश्य होता है किंतु रास्ट्रिय या वैश्विक हो अड़चन तब आती है जब समस्या समाधान अवश्य होता है / - ShareChat
#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - सही सुने सही जाने   सही बोले पूरी तरीके से स्वयं ही के द्वारा जबतक तय न्ही हो जाता तबतक बहमी है वो संसार में ये एक असाधारण बात है किंतु छोटे से बहम को भी के बहम की एक सीमा है साधारण नही कह सकते सही सुने सही जाने   सही बोले पूरी तरीके से स्वयं ही के द्वारा जबतक तय न्ही हो जाता तबतक बहमी है वो संसार में ये एक असाधारण बात है किंतु छोटे से बहम को भी के बहम की एक सीमा है साधारण नही कह सकते - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - खामोश पायल को कबतक निहारोगे चाहत हो (गर) खनक की तो कदर्मों को चलाके देखो. वहां सोना वहां रोना जहां कुछ नरहीं होना मजबूरी हो, न आने मे कोई माना 6 ತಳ ತrಹಕತ: खामोश पायल को कबतक निहारोगे चाहत हो (गर) खनक की तो कदर्मों को चलाके देखो. वहां सोना वहां रोना जहां कुछ नरहीं होना मजबूरी हो, न आने मे कोई माना 6 ತಳ ತrಹಕತ: - ShareChat
#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - तत्व वो भी बीना तथ्य के 8 स्मरण रहे मःतत्व को यदी महत्व चाहिये तो वो g दोर्नों ही शब्दों में मःतत्व नही हो सकता | । किसी व्यक्ती॰ जाती, धर्म एवम उसके तत्व आता है शासन के सत्य को तथ्य और तत्व ही दर्साते है। किनुस्की Mी शरास्टनकक सूब्यिका नसक अस्तीत्व چچ के विरोध मे उठते आवाज को सहन नही आराधाय अस्तीत्व ही महत्व है॰ अस्तीत्व तत्व के बीना करता हो ही नहीं सकता संबिधान का महत्व है मान्य है उचित हे, ஒ&T6 1 किंतु अस्तित्व केबीना मानवता का प्रमाण तत्व वो भी बीना तथ्य के 8 स्मरण रहे मःतत्व को यदी महत्व चाहिये तो वो g दोर्नों ही शब्दों में मःतत्व नही हो सकता | । किसी व्यक्ती॰ जाती, धर्म एवम उसके तत्व आता है शासन के सत्य को तथ्य और तत्व ही दर्साते है। किनुस्की Mी शरास्टनकक सूब्यिका नसक अस्तीत्व چچ के विरोध मे उठते आवाज को सहन नही आराधाय अस्तीत्व ही महत्व है॰ अस्तीत्व तत्व के बीना करता हो ही नहीं सकता संबिधान का महत्व है मान्य है उचित हे, ஒ&T6 1 किंतु अस्तित्व केबीना मानवता का प्रमाण - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - मै जिंदा हूँ क्यों खुदा जाने उनके हांथे के अस्ले का रुख तो मेरे ही जानिब था उनके खिआफ बयान को खुदा भी कहे तो मुकर जाँऊ अंजाम जो भी हो, बस उनका आना सच लगता हे॰ मै जिंदा हूँ क्यों खुदा जाने उनके हांथे के अस्ले का रुख तो मेरे ही जानिब था उनके खिआफ बयान को खुदा भी कहे तो मुकर जाँऊ अंजाम जो भी हो, बस उनका आना सच लगता हे॰ - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - चीजे   allredy netur मे होती हैं और कूछ ऐसी कछ जिन्हे ' करना पड़ता है। consistencg जबतक netur नाबनजाय तबतक यदी अभ्यास उसे सच में consistency नही कह सकते 1 करते करते consistency आती है तो क्या दुनियवादी हैे॰ real हर कोई consist है fect netur 1೯೫77 consistency हे, क्योकी इसके बाद ही netur| जाते हे feag] गोड इबादत , सजदे अल्लाह संभव है मोहब्बत साबीत हो जाती हे। 74| यदी द्ुआ को fect कहे तो क्या आप सही मानेंगे , इसलिए जरूरी है netur तक पहुंचना 1 चीजे   allredy netur मे होती हैं और कूछ ऐसी कछ जिन्हे ' करना पड़ता है। consistencg जबतक netur नाबनजाय तबतक यदी अभ्यास उसे सच में consistency नही कह सकते 1 करते करते consistency आती है तो क्या दुनियवादी हैे॰ real हर कोई consist है fect netur 1೯೫77 consistency हे, क्योकी इसके बाद ही netur| जाते हे feag] गोड इबादत , सजदे अल्लाह संभव है मोहब्बत साबीत हो जाती हे। 74| यदी द्ुआ को fect कहे तो क्या आप सही मानेंगे , इसलिए जरूरी है netur तक पहुंचना 1 - ShareChat
#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - नए साल   बहोत रोए आते आते तुम्हारे खुदही के लिए ೩೯ ' सवाल हमे भी शरीक करना अपनी दस्तक पे हम भी खुश होना चाहते हैं लोगों की तरह Sn 2020 नए साल   बहोत रोए आते आते तुम्हारे खुदही के लिए ೩೯ ' सवाल हमे भी शरीक करना अपनी दस्तक पे हम भी खुश होना चाहते हैं लोगों की तरह Sn 2020 - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - बेपरवाह कौन है कौन बेनीयाज हैे  बेक़दर किसे कहें केसे, किससे पूंछे कदर ये कैसा असर हे तौबा करो ऐसे इन्कार से उठ रहें हैं जनाजे इकरार से पहले ही॰.. बेपरवाह कौन है कौन बेनीयाज हैे  बेक़दर किसे कहें केसे, किससे पूंछे कदर ये कैसा असर हे तौबा करो ऐसे इन्कार से उठ रहें हैं जनाजे इकरार से पहले ही॰.. - ShareChat
#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - मनमानी क्योकर प्यारे, मानवता हैे मूल 1 बुद्धी मते जानत है निको पतन को मारगू हे प्रतीकूल 1 विचार लगत है शूल #iಹ को मनिककष, का कवैच्ाम ्वनगता ह्चश्टैल है धूल।। यूद्ध को विकल्प हे सदा फूले फले , करम को शंसार मना, करे व्यक्ती हो के राष्ट्र कोई स्थिती, अवस्था से अपने 1 चलिये सदा अनुकूल 11 मनमानी क्योकर प्यारे, मानवता हैे मूल 1 बुद्धी मते जानत है निको पतन को मारगू हे प्रतीकूल 1 विचार लगत है शूल #iಹ को मनिककष, का कवैच्ाम ्वनगता ह्चश्टैल है धूल।। यूद्ध को विकल्प हे सदा फूले फले , करम को शंसार मना, करे व्यक्ती हो के राष्ट्र कोई स्थिती, अवस्था से अपने 1 चलिये सदा अनुकूल 11 - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - बना ले औजार आग को अफसोस तू अपनी खाक नही देख पाएगा तूझे मालूम नही हलक से अजल तक जबान एक ही है॰॰. बना ले औजार आग को अफसोस तू अपनी खाक नही देख पाएगा तूझे मालूम नही हलक से अजल तक जबान एक ही है॰॰. - ShareChat