#GodMorningWednesday
सतगुरु
दीक्षा में दिए गए वास्तविक नामों का जाप विधि अनुसार करने से बिना रसना (जीभ) के बंदगी (नम्र भाव से स्मरण) यानि करने से बिन चिसमो (बिना चर्म दृष्टि) के यानी दिव्य दृष्टि से परमेश्वर का दीदार होता है।
देखें साधना चैनल प्रतिदिन शाम7:30 बजे। ##godmorningwednesday
#GodMorningWednesday
जो पूर्ण परमात्मा का संग
अर्थात भक्ति त्याग कर अन्य देवताओं की पूजा (मजदूरी) करते हैं तो वे देवता उन साधकों को केवल किए कर्म का फल ही प्रदान करते हैं। अन्य देवताओं की साधना (मजदूरी) से साधक को बहुत ही कम लाभ होता है। ##godmorningwednesday
#GodMorningWednesday
कबीर मेरे साथ की निंदा करो न कोय।
जो पै चंद्र कलंक है, तठ उजियारी होय॥
हे संसारी लोग। मेरे साधु की निन्दा मत करो। जिस प्रकार चन्द्रमा में कलंक है फिर भी रात्रि में प्रकाश करता है, उसी प्रकार साधु लोग दोषयुक्त होने पर भी कल्याणकारी होते है। ##godmorningwednesday
#GodNightTuesday
गरीब, मुक्ति खेत मथुरा पुरी, कीन्हां कृष्ण किलोल। कंश केशि चानौरसे, वहां फिरते डामांडोल।।
जो कहते हैं कि मथुरा-वृंदावन में जाने से मुक्ति होती है। वे सुनो! उसी मथुरा में जहाँ श्री कृष्ण लीला किया करते थे। आप उस स्थान पर जाने मात्र से मोक्ष मानते हो।
##GodNightTuesday
#GodNightTuesday
गरीब, पांच पचीसों भून करि, बिरह अगनि तन जार। सो अविनासी ब्रह्म है, खेले अधर अधार।।
सरलार्थ:- शरीर की प्रकृतियों को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है।
##GodNightTuesday
#GodNightTuesday
गरीब, तन मन सेती दूर है, मांहे मंझ मिलाप। तरबर छाया विरछ में, है सो आपे आप।।
सरलार्थ:- वह परमेश्वर दूर सतलोक में है जिसे स्थूल शरीर तथा मन की कल्पनाओं
से नहीं देख सकते। वैसे उस प्रभु का प्रभाव शरीर में भी है। इस प्रकार जीव से मिला भी है।
##GodNightTuesday
#GodNightTuesday
परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि
जो व्यक्ति किसी जन्म में मेरी शरण में आ गया है, उसके मोक्ष के लिए उसके पीछे-पीछे फिरता रहता हूँ। जब तक धरती-आकाश रहेगा (महाप्रलय तक), तब तक उसको काल जाल से निकालने की कोशिश करता रहूँ।
##GodNightTuesday
#BigMistakeOf_DrBRAmbedkarJi
बुद्ध अहिंसावादी थे या करते थे पक्षियों का आहार?
डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की पुस्तक से गौतम बुद्ध और उनके धम्म से उठेगा पर्दा, बुद्ध अहिंसावादी थे या करते थे पक्षियों का आहार?
👉जानने के लिए अवश्य देखिए Factful Debates YouTube Channel पर ##डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ी_भूल
#BigMistakeOf_DrBRAmbedkarJi
⚡ क्या बुद्ध धर्म अपनाकर बाबा साहेब ने कोई बड़ी भूल की? आइए जानते हैं बाबा साहेब की ही पुस्तक से
👉जानने के लिए अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल | भाग - 1 Factful Debates YouTube Channel पर ##डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ी_भूल
#BigMistakeOf_DrBRAmbedkarJi
🌟 गौतम बुद्ध को मानने वाले क्यों हुए नास्तिक?
👉जानने के लिए अवश्य देखिए डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की बड़ी भूल | भाग - 1 Factful Debates YouTube Channel पर
Factful Debates YouTube ##डॉBRअंबेडकरजी_की_बड़ी_भूल








![#GodNightTuesday - cB1a3 z12] {3e गरब॰ पांच पचओं भूतु करि Gufஎ ~573 ओ टअविताशी ब्रह्य है खेले ८३ध३ ८धा३७ 45 सरलार्थ को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी शरीर की प्रकृतियों अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है। वह सर्वोपरि स्थान सतलोक में आनन्द से रहता है अधर ्आधार यानि (खेलता है) यानि मौज- मस्ती करता है। -जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL JI SPIRITUAL LEADER 0 @SAITRAMPAUIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SAINT RAMPAL JI cB1a3 z12] {3e गरब॰ पांच पचओं भूतु करि Gufஎ ~573 ओ टअविताशी ब्रह्य है खेले ८३ध३ ८धा३७ 45 सरलार्थ को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी शरीर की प्रकृतियों अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है। वह सर्वोपरि स्थान सतलोक में आनन्द से रहता है अधर ्आधार यानि (खेलता है) यानि मौज- मस्ती करता है। -जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL JI SPIRITUAL LEADER 0 @SAITRAMPAUIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SAINT RAMPAL JI - ShareChat #GodNightTuesday - cB1a3 z12] {3e गरब॰ पांच पचओं भूतु करि Gufஎ ~573 ओ टअविताशी ब्रह्य है खेले ८३ध३ ८धा३७ 45 सरलार्थ को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी शरीर की प्रकृतियों अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है। वह सर्वोपरि स्थान सतलोक में आनन्द से रहता है अधर ्आधार यानि (खेलता है) यानि मौज- मस्ती करता है। -जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL JI SPIRITUAL LEADER 0 @SAITRAMPAUIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SAINT RAMPAL JI cB1a3 z12] {3e गरब॰ पांच पचओं भूतु करि Gufஎ ~573 ओ टअविताशी ब्रह्य है खेले ८३ध३ ८धा३७ 45 सरलार्थ को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी शरीर की प्रकृतियों अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है। वह सर्वोपरि स्थान सतलोक में आनन्द से रहता है अधर ्आधार यानि (खेलता है) यानि मौज- मस्ती करता है। -जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL JI SPIRITUAL LEADER 0 @SAITRAMPAUIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SAINT RAMPAL JI - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_881799_38609efc_1773157873274_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=274_sc.jpg)




