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#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः" परिवारके सदस्यों के बीच घनिष्ठ आत्मीयता एवं स्नेह सद्भाव के आधार पर परिार को एक सूत्रमें बांधा जा सकता है। जिस परिवार में संकीर्णता पनपती है, परिवारको विश्रृंखलित कर डालती है। अपने परिवार के सदस्यों में भेद ्भाव का होना एक ऐसी चिनगारी है, जो भीतर ही-्भीतर जलाती रहती है। इन दिनों यह चिनगारी अधिकांश परिवारों में सुलगती देखी जा सकती है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः" परिवारके सदस्यों के बीच घनिष्ठ आत्मीयता एवं स्नेह सद्भाव के आधार पर परिार को एक सूत्रमें बांधा जा सकता है। जिस परिवार में संकीर्णता पनपती है, परिवारको विश्रृंखलित कर डालती है। अपने परिवार के सदस्यों में भेद ्भाव का होना एक ऐसी चिनगारी है, जो भीतर ही-्भीतर जलाती रहती है। इन दिनों यह चिनगारी अधिकांश परिवारों में सुलगती देखी जा सकती है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः "श्री प्रगतिशील और प्रगतिशील से अनुपयोगी जीवन मानव ्जीवन नहीं है। केवल मानवाकार में जीवन का प्रवाहित होना मानवता नहीं है। मानवता का लक्षण है प्रतिदिन मानवता की ओर बढ़ना। संसार में विकास और प्रगति करके लोग जीव से मानव महामानव महापुरुष देवपुरुष और अति मानव तक बने हैं। लोग उन्हें भगवान मानते हैं। समाज उन्हें प्रतिष्ठा प्रमाण पत्र देता है। ऐसे ही मानव वास्तव में मानव कहलाने योग्य होते हैं। मित्रता से ही संसार की शोभा और समाज की समानता और बाहुबलता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "श्री प्रगतिशील और प्रगतिशील से अनुपयोगी जीवन मानव ्जीवन नहीं है। केवल मानवाकार में जीवन का प्रवाहित होना मानवता नहीं है। मानवता का लक्षण है प्रतिदिन मानवता की ओर बढ़ना। संसार में विकास और प्रगति करके लोग जीव से मानव महामानव महापुरुष देवपुरुष और अति मानव तक बने हैं। लोग उन्हें भगवान मानते हैं। समाज उन्हें प्रतिष्ठा प्रमाण पत्र देता है। ऐसे ही मानव वास्तव में मानव कहलाने योग्य होते हैं। मित्रता से ही संसार की शोभा और समाज की समानता और बाहुबलता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः' "9[ हर इंसान में एक अलौकिक महापुरुष छिपा होता है लेकिन वह आसुरी तत्वों के कारागार में बंद होता है। मनुष्य का कर्तव्य यह है कि उसे देव तत्वों की सहायता से मुक्ति कर उठाये और महान कृतियों द्वारा महानता की ओर बढाये। यह उसका कर्तव्य है और यही उसका अधिकार भी है। নানুলাল নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः' "9[ हर इंसान में एक अलौकिक महापुरुष छिपा होता है लेकिन वह आसुरी तत्वों के कारागार में बंद होता है। मनुष्य का कर्तव्य यह है कि उसे देव तत्वों की सहायता से मुक्ति कर उठाये और महान कृतियों द्वारा महानता की ओर बढाये। यह उसका कर्तव्य है और यही उसका अधिकार भी है। নানুলাল নানুলল . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः ' "পী यदि आपके जीवन में सच्चाई , सत्यता आशा परोपकार सेवा सहनशीलता ईश्वर ् प्रेम धैर्य उत्साह आदि के गुण हैं तो अंतःस्रावियों से अमृत जैसा रंग टपकेगा और उसकी सुखानुभूति प्रेमाकर्षण स्नेहपूर्ण भावना का सौंदर्य होता है और सामान्य जीवन में भी वह व्यक्ति अपने आप में पूर्ण सुख और तृप्ति का अनुभव करता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः ' "পী यदि आपके जीवन में सच्चाई , सत्यता आशा परोपकार सेवा सहनशीलता ईश्वर ् प्रेम धैर्य उत्साह आदि के गुण हैं तो अंतःस्रावियों से अमृत जैसा रंग टपकेगा और उसकी सुखानुभूति प्रेमाकर्षण स्नेहपूर्ण भावना का सौंदर्य होता है और सामान्य जीवन में भी वह व्यक्ति अपने आप में पूर्ण सुख और तृप्ति का अनुभव करता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री हृदय की सरसता और सदाशयता प्रेम पर ही प्रतिबंध है। इसका विनाश हो जाने पर मनुष्य अधिकांश में आ जाता है, फिर वह अपने व औरों के प्रति अनाचारी हो जाता है। शरीर से जीते हुए भी ऐसे मनुष्य आत्मा से मर जाते हैं। जीवन भावना का कोई भी आनंद उन्हें नहीं मिलता।  करुणा दया क्षमा आदि से प्रारंभ होने वाली शीतल वायु का अनुभव उन्हें नहीं होता। इन दोषों के साथ चलने वाला जीवन निश्चेष्ट मृत्यु से भी बुरा होता है। अस्तु, जीवित मनुष्य मेंप्रेम का कुछ ्न-्कुछ भाव होना अनिवार्य है। ননুেললে ননুলল . सदगुरुदेवाय नमः  "श्री हृदय की सरसता और सदाशयता प्रेम पर ही प्रतिबंध है। इसका विनाश हो जाने पर मनुष्य अधिकांश में आ जाता है, फिर वह अपने व औरों के प्रति अनाचारी हो जाता है। शरीर से जीते हुए भी ऐसे मनुष्य आत्मा से मर जाते हैं। जीवन भावना का कोई भी आनंद उन्हें नहीं मिलता।  करुणा दया क्षमा आदि से प्रारंभ होने वाली शीतल वायु का अनुभव उन्हें नहीं होता। इन दोषों के साथ चलने वाला जीवन निश्चेष्ट मृत्यु से भी बुरा होता है। अस्तु, जीवित मनुष्य मेंप्रेम का कुछ ्न-्कुछ भाव होना अनिवार्य है। ননুেললে ননুলল . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः "g हमारे समाज में देवता या ईश्वर बननातो सहजहै लेकिन मनूष्य बनना कठिनहै। ননুললে নানুলল. @ सदगुरुदेवाय नमः "g हमारे समाज में देवता या ईश्वर बननातो सहजहै लेकिन मनूष्य बनना कठिनहै। ননুললে নানুলল. @ - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः "श्री सहानुभूति मनुष्य की सबसे बडी आवश्यकता है। हर मनुष्य दूसरे मनुष्य से मनुष्य के एक सूत्र में बंधा हुआ है। इस नियम में सांकेतिकता पड गई तो सारा जीवन अस्त ्व्यस्त हो सकता है। स्वार्थ और आत्मतुष्टि की भावना से लोग दूसरों के अधिकार छीन लेते हैं स्वार्थ धारण कर लेते हैंशक्तिका शोषण करने से बाज नहीं आते। इन विश्रृंखलता के आज सभी ओर दर्शन किए जा सकते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "श्री सहानुभूति मनुष्य की सबसे बडी आवश्यकता है। हर मनुष्य दूसरे मनुष्य से मनुष्य के एक सूत्र में बंधा हुआ है। इस नियम में सांकेतिकता पड गई तो सारा जीवन अस्त ्व्यस्त हो सकता है। स्वार्थ और आत्मतुष्टि की भावना से लोग दूसरों के अधिकार छीन लेते हैं स्वार्थ धारण कर लेते हैंशक्तिका शोषण करने से बाज नहीं आते। इन विश्रृंखलता के आज सभी ओर दर्शन किए जा सकते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारी एक सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हम बड़़े -बड़े सिद्धांत बघारते हैं नीति और न्याय की ऊंची -ऊंची बातें करते हैं लेकिन यह सब दूसरों के लिए है। अपने क्रिया -कलापों को न्याय नीति की प्रस्तुति पर हम कभी ध्यान ही नहीं देते। आततायी और गुंडों को हम लोग कोसते हैं उन्हें बुरा- भला कहते हैं हमारी समीक्षक बुद्धि उस समय न जाने कहां चली जाती है जब हम पराई महिलाओं को बुरी नजर से देखते हैं। बिना प्रति- मूल्य दिए समाज के लोगों का उपभोग करते हैं अनीति के साथ धन एकत्रित करते हैं और समाज का शोषण करते हैं। जिस तरह की आलोचना करते हम दूसरों व Ca न्याय नीति की मांग करते हैं उसी तरह यह भी जरूरी है कि हम अपने 3 व्यवहार को नीति धर्म की व्याख्या पर कैसे पेश करें। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारी एक सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हम बड़़े -बड़े सिद्धांत बघारते हैं नीति और न्याय की ऊंची -ऊंची बातें करते हैं लेकिन यह सब दूसरों के लिए है। अपने क्रिया -कलापों को न्याय नीति की प्रस्तुति पर हम कभी ध्यान ही नहीं देते। आततायी और गुंडों को हम लोग कोसते हैं उन्हें बुरा- भला कहते हैं हमारी समीक्षक बुद्धि उस समय न जाने कहां चली जाती है जब हम पराई महिलाओं को बुरी नजर से देखते हैं। बिना प्रति- मूल्य दिए समाज के लोगों का उपभोग करते हैं अनीति के साथ धन एकत्रित करते हैं और समाज का शोषण करते हैं। जिस तरह की आलोचना करते हम दूसरों व Ca न्याय नीति की मांग करते हैं उसी तरह यह भी जरूरी है कि हम अपने 3 व्यवहार को नीति धर्म की व्याख्या पर कैसे पेश करें। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हम नहीं चाहते कि कोई हमारा अपमान करेतो हमारा भी कर्तव्य है कि हम भी किसी का अपमान न करें। इसी तरह विश्वास धोखा कपट उत्तेजना शोषण आदि बुरे लोगों का शिकार हम स्वयं नहीं होना चाहते तो हमारा भी धर्म है कि हम भी दूसरों के साथ ऐसा न करें। लेकिन खेद का विषय है किं जब भी हमारा कोई ऊपरी विद्रोह करता है तो हम बुराई करते हैं सिद्धांतों की दुहाई देते हैं और आरक्षण के लिए नारा लगाते हैं। लेकिन जब हम दूसरों के साथ ऐसा करते हैंतब किसी के कुछ सुनने के बाद भी हमारे कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हम नहीं चाहते कि कोई हमारा अपमान करेतो हमारा भी कर्तव्य है कि हम भी किसी का अपमान न करें। इसी तरह विश्वास धोखा कपट उत्तेजना शोषण आदि बुरे लोगों का शिकार हम स्वयं नहीं होना चाहते तो हमारा भी धर्म है कि हम भी दूसरों के साथ ऐसा न करें। लेकिन खेद का विषय है किं जब भी हमारा कोई ऊपरी विद्रोह करता है तो हम बुराई करते हैं सिद्धांतों की दुहाई देते हैं और आरक्षण के लिए नारा लगाते हैं। लेकिन जब हम दूसरों के साथ ऐसा करते हैंतब किसी के कुछ सुनने के बाद भी हमारे कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जब हम पवित्र हृदय से प्राणीमात्र से सार-पूर्ण या कुत्सित लाभ उठाने का विचार त्याग देंगे तो हम भगवान के इतने करीब हो जाएंगे कि दुनियां के सारे पदार्थ सुंदर रूप में प्रकट हो जाएंगे। पर हमने स्वयंही अपने कुविचारों तथा कुकृत्यों द्वारा उस दैवी प्रवाह का मार्ग अवरुद्ध कर रखा है जिसे प्राप्त करके हमारा आत्म विकास हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जब हम पवित्र हृदय से प्राणीमात्र से सार-पूर्ण या कुत्सित लाभ उठाने का विचार त्याग देंगे तो हम भगवान के इतने करीब हो जाएंगे कि दुनियां के सारे पदार्थ सुंदर रूप में प्रकट हो जाएंगे। पर हमने स्वयंही अपने कुविचारों तथा कुकृत्यों द्वारा उस दैवी प्रवाह का मार्ग अवरुद्ध कर रखा है जिसे प्राप्त करके हमारा आत्म विकास हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat