कोई मजबूर होता है ,कोई मगरूर होता है ,
कोई मजलूम तो कोई नशे से चूर होता है ।
ये खुद्दारों की दुनिया है, सभी को अपनी चिन्ता है ,
किसी को अपने आगे यूँ कहाँ मंजूर होता है ॥
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