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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - भै तेरा भिखारी होला महल्ला दी सारी संगत नू लख लख बधाइयाँ जी..!! संगत जी खालसे की वीरता कीजिओ पहचान ही ॰  होला महल्ला की शान है पहाडा खालसे के खून के रंगों की महक जब खलसाओं वाले की वीरता से मिलती है॰तो वह 'होला महल्ला' बन जाती है..! ! खालसे का होला महल्ला' बाबा वीरता, अनुशासन और रूहानियत का प्रतीक है। তী "गगन दमामा बाजिओ परिओ नीसाने घाउ Il खेत जु मांडिओ सूरमा अब जूझन को दाउ 11 भै तेरा भिखारी होला महल्ला दी सारी संगत नू लख लख बधाइयाँ जी..!! संगत जी खालसे की वीरता कीजिओ पहचान ही ॰  होला महल्ला की शान है पहाडा खालसे के खून के रंगों की महक जब खलसाओं वाले की वीरता से मिलती है॰तो वह 'होला महल्ला' बन जाती है..! ! खालसे का होला महल्ला' बाबा वीरता, अनुशासन और रूहानियत का प्रतीक है। তী "गगन दमामा बाजिओ परिओ नीसाने घाउ Il खेत जु मांडिओ सूरमा अब जूझन को दाउ 11 - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - Odv आपसशीको @Gt की हार्दिक शुभकामनाएं ख पुत्तर अक्सर हम बाहरी रंगों में उत्सव ढूंढते हैं, लेकिन जो आनंद आत्मा @ के भीतर से आता है, उसका कोई विकल्प नहीं है। जब तक रंग केवल Tu देह पर है, वह अस्थायी है अभी चढा और थोड़ी देर बाद उतर जाएगा। लेकिन जब मनुष्य परमात्मा के प्रेम और शून्यता के रंग में रंग जाता ' Hi तो वह रंग कभी नहीं छूटता। परमात्मा   के रंग में खो जाने का अर्थ है अपने अहंकार को मिटा देना। जब ' मैं' मिट जाता है, तभी वह ' अनंत' Tw प्रकट होता है। जैसे बूंद जब सागर में गिरती है, तो वह बूंद नहीं रहती, वह सागर ही हो जाती है  !! संसार के बाहर का शोर और रंग केवल Guu मनोरंजन कर सकते हैं, लेकिन आंतरिक निखार तब आता है जब आप अपने ही भीतर की शांति और उस परम चेतना से जुड़ते हैं..!! होली का Ji असली आध्यात्मिक अर्थ भी यही है   अपने पुराने 'स्व' को जलाकर प्रेम के उस रंग में रंग जाना जो अदृश्य है पर सर्वव्यापी है...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा जी सदा सहाय। | Odv आपसशीको @Gt की हार्दिक शुभकामनाएं ख पुत्तर अक्सर हम बाहरी रंगों में उत्सव ढूंढते हैं, लेकिन जो आनंद आत्मा @ के भीतर से आता है, उसका कोई विकल्प नहीं है। जब तक रंग केवल Tu देह पर है, वह अस्थायी है अभी चढा और थोड़ी देर बाद उतर जाएगा। लेकिन जब मनुष्य परमात्मा के प्रेम और शून्यता के रंग में रंग जाता ' Hi तो वह रंग कभी नहीं छूटता। परमात्मा   के रंग में खो जाने का अर्थ है अपने अहंकार को मिटा देना। जब ' मैं' मिट जाता है, तभी वह ' अनंत' Tw प्रकट होता है। जैसे बूंद जब सागर में गिरती है, तो वह बूंद नहीं रहती, वह सागर ही हो जाती है  !! संसार के बाहर का शोर और रंग केवल Guu मनोरंजन कर सकते हैं, लेकिन आंतरिक निखार तब आता है जब आप अपने ही भीतर की शांति और उस परम चेतना से जुड़ते हैं..!! होली का Ji असली आध्यात्मिक अर्थ भी यही है   अपने पुराने 'स्व' को जलाकर प्रेम के उस रंग में रंग जाना जो अदृश्य है पर सर्वव्यापी है...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा जी सदा सहाय। | - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - =_ 3 dbproyci 200 HoT सारी दुनिया होली रंगों के साथ आपसी प्रेम और भाईचारे का जश्न मनाती है॰ वहीं तरफ खखालसे का होला महल्ला' वीरता, दूसरी अनुशासन और रूहानियत का प्रतीक है।गुरु गोविंद सिंह जी ने में एक होली के कोमल त्यौहार को 'होला महल्ला' के रूप নযা लगे और वीर रस से भरपूर रूप दिया।ॅ इसका उद्देश्य सिखों को केवल रंगों तक सीमित न रखकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना था। होला' अरबी शब्द 'हलूल' से आया है जिसका अर्थ है आक्रमण करना%, और मिहल्ला उस स्थान को कहते हैं आज भी निहंग सिंह अपनी पारंपरिक वेशभूषा तेरा जहाँ सेना ठहरी हो। में किलों पर प्रतीकात्मक चढ़़ाई करते हैं॰ जो यह याद दिलाता है कि एक आध्यात्मिक व्यक्ति को भीतर से शांत और बाहर से शूरवीर होना चाहिए -४! होली की कोमलता जब खालसे की वीरता से मिलती है॰ तो वह 'होला महल्ला' बन जाती है।" वाहेगुरु जी का भाणा राज करेगा खालसा, आकी रहे हादसा वाहेगुरु जी की फतेह जी ख्वार होइ सभ मिलैंगे, बचै शरन जो होइ।। न कोइ। शरन गुरु गोबिंद सिंह जी आप जी दे चरण दी चाहिडि जी है..!! =_ 3 dbproyci 200 HoT सारी दुनिया होली रंगों के साथ आपसी प्रेम और भाईचारे का जश्न मनाती है॰ वहीं तरफ खखालसे का होला महल्ला' वीरता, दूसरी अनुशासन और रूहानियत का प्रतीक है।गुरु गोविंद सिंह जी ने में एक होली के कोमल त्यौहार को 'होला महल्ला' के रूप নযা लगे और वीर रस से भरपूर रूप दिया।ॅ इसका उद्देश्य सिखों को केवल रंगों तक सीमित न रखकर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना था। होला' अरबी शब्द 'हलूल' से आया है जिसका अर्थ है आक्रमण करना%, और मिहल्ला उस स्थान को कहते हैं आज भी निहंग सिंह अपनी पारंपरिक वेशभूषा तेरा जहाँ सेना ठहरी हो। में किलों पर प्रतीकात्मक चढ़़ाई करते हैं॰ जो यह याद दिलाता है कि एक आध्यात्मिक व्यक्ति को भीतर से शांत और बाहर से शूरवीर होना चाहिए -४! होली की कोमलता जब खालसे की वीरता से मिलती है॰ तो वह 'होला महल्ला' बन जाती है।" वाहेगुरु जी का भाणा राज करेगा खालसा, आकी रहे हादसा वाहेगुरु जी की फतेह जी ख्वार होइ सभ मिलैंगे, बचै शरन जो होइ।। न कोइ। शरन गुरु गोबिंद सिंह जी आप जी दे चरण दी चाहिडि जी है..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - धारसबै सुबिचार अहरजती G पउन fax அளஅ हजारकदेखैपास्री afq एकनलेखै। fa एकरती हे भाई! कोई केवल हवा पीकर (पवन आहार) जीवित रहने वाला योगी मै तेरा हो, या परम ब्रह्मचारी (जती) बनकर इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाला हो। अच्छे विचारों और शास्त्रों का मानने वाला और वह बहुत बड़ा भिखारी ज्ञानी दिखाई देता हो। राजाओं का राजा (भूपति) भी हो, तब भी 3 भगवान के सिमरन और उनकी भक्ति के बिना,उसका कोई मूल्य नहीं है। उसे ईश्वर की दरगाह में एएक रत्ती' (बहुत छोटी इकाई) के बराबर भी नहीं माना जाता। अंततः उसे शून्य ही गिना जाएगा। गुरु गोबिंद पहाडा सिंह जी यहाँ यह स्पष्ट कर रहे हैं कि कठोर तपस्या, केवल ज्ञान का বাল प्रदर्शन या राजसी वैभव तब तक व्यर्थ हैं॰ जब तक मन में सच्चा प्रेम और परमात्मा के प्रति समर्पण न होे। बिना भक्ति के ये सब उपलब्धियाँ बाबा शून्य' के समान हैं। जैसे गणित में हज़ारों शून्य (०) मिल कर भी शून्य ही रहते हैं जब तक उनके आगे 'एक' (२) न लगे, वैसे ही ये तमाम सिद्धियां और संपत्तियां शून्य हैं। यहाँ 'एक' परमात्मा की भक्ति है। यदि जीवन में ईश्वर का प्रेम नहीं, तो अंत में उस व्यक्ति का मूल्य 'एक रत्ती' भी नहीं आँका जाएगा। धारसबै सुबिचार अहरजती G पउन fax அளஅ हजारकदेखैपास्री afq एकनलेखै। fa एकरती हे भाई! कोई केवल हवा पीकर (पवन आहार) जीवित रहने वाला योगी मै तेरा हो, या परम ब्रह्मचारी (जती) बनकर इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाला हो। अच्छे विचारों और शास्त्रों का मानने वाला और वह बहुत बड़ा भिखारी ज्ञानी दिखाई देता हो। राजाओं का राजा (भूपति) भी हो, तब भी 3 भगवान के सिमरन और उनकी भक्ति के बिना,उसका कोई मूल्य नहीं है। उसे ईश्वर की दरगाह में एएक रत्ती' (बहुत छोटी इकाई) के बराबर भी नहीं माना जाता। अंततः उसे शून्य ही गिना जाएगा। गुरु गोबिंद पहाडा सिंह जी यहाँ यह स्पष्ट कर रहे हैं कि कठोर तपस्या, केवल ज्ञान का प्रदर्शन या राजसी वैभव तब तक व्यर्थ हैं॰ जब तक मन में सच्चा प्रेम और परमात्मा के प्रति समर्पण न होे। बिना भक्ति के ये सब उपलब्धियाँ बाबा शून्य' के समान हैं। जैसे गणित में हज़ारों शून्य (०) मिल कर भी शून्य ही रहते हैं जब तक उनके आगे 'एक' (२) न लगे, वैसे ही ये तमाम सिद्धियां और संपत्तियां शून्य हैं। यहाँ 'एक' परमात्मा की भक्ति है। यदि जीवन में ईश्वर का प्रेम नहीं, तो अंत में उस व्यक्ति का मूल्य 'एक रत्ती' भी नहीं आँका जाएगा। - ShareChat
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satnam waheguru ji - गावै को साजि करे तनु खेह।।गावै को जीअ लै फिरि देह।।गावै को जापै दिसै दूरि।।गावै को वेखै हादरा 6&RiI मीठा अर्थःहे भाई! कोई परमात्मा को इस रूप में गाता है कि वह शरीर को रचता है (साजि) और अंत में उसे ( खेह ) मिट्टी कर लगे देता है। कोई उसे इस रूप में गाता है कि वही प्राणों (जीअ) को छीन लेता है और फिर से उन्हें वापस ( पुनर्जन्म) देता है। dా जीवन और मृत्यु का चक्र पूरी तरह उसी के हाथ में है।कोई उसे इस तरह गाता है जैसे वह बहुत दूर ( अगम्य ) है और उसे पाना कठिन है।कोई उसे इस रूप में गाता है कि वह भाणा हाजिर नाजिर (हादरा हदूरि) है और उसे अपने अंग संग, साक्षात देख रहा है। गुरु साहिब जी इन पंक्तियों के माध्यम से के गुण  यह समझा रहे हैं कि परमात्मा ' और उसकी शक्तियाँ इतनी विशाल हैं कि हर व्यक्ति अपनी दृष्टि और अनुभव के अनुसार उसकी महिमा करता है। कोई उसे सृष्टि का रचयिता मानता है, तो कोई उसे सर्वव्यापी मानता है। अंततःवह इन सभी गुणों से भी परे और अनंत हैl गावै को साजि करे तनु खेह।।गावै को जीअ लै फिरि देह।।गावै को जापै दिसै दूरि।।गावै को वेखै हादरा 6&RiI मीठा अर्थःहे भाई! कोई परमात्मा को इस रूप में गाता है कि वह शरीर को रचता है (साजि) और अंत में उसे ( खेह ) मिट्टी कर लगे देता है। कोई उसे इस रूप में गाता है कि वही प्राणों (जीअ) को छीन लेता है और फिर से उन्हें वापस ( पुनर्जन्म) देता है। dా जीवन और मृत्यु का चक्र पूरी तरह उसी के हाथ में है।कोई उसे इस तरह गाता है जैसे वह बहुत दूर ( अगम्य ) है और उसे पाना कठिन है।कोई उसे इस रूप में गाता है कि वह भाणा हाजिर नाजिर (हादरा हदूरि) है और उसे अपने अंग संग, साक्षात देख रहा है। गुरु साहिब जी इन पंक्तियों के माध्यम से के गुण  यह समझा रहे हैं कि परमात्मा ' और उसकी शक्तियाँ इतनी विशाल हैं कि हर व्यक्ति अपनी दृष्टि और अनुभव के अनुसार उसकी महिमा करता है। कोई उसे सृष्टि का रचयिता मानता है, तो कोई उसे सर्वव्यापी मानता है। अंततःवह इन सभी गुणों से भी परे और अनंत हैl - ShareChat
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satnam waheguru ji - # खामोशी लेगी बदला मेरा मेरी सौ अच्छाइयों को भूलकर तुम सभी ने एक ही गलती को पकड़ कर रखा हुआ है कि किसी के साथ अब बोलचाल नही इसके पीछे का मेरा मकसद मेरा रखता भीतर अपनी शांति को महसूस खुद के जिसको में खो चुका था तुम करना था सभी के पीछे भाग भाग कर..!! सब की हां में हां मिलाना अच्छाई नहीं, उसको में कमजोरी समझता हूं जिसको तुम सभी आज मेरी अक्कड़ समझते हो..!! याद रखना आज मेरे संग नफरत करने वालों लगती है तो उसके अंदर डूबने जब नाव के बोझ को हल्का करना पडता है उसी तरह मैने भी अपनी जिन्दगी को नाव को से बचाने के लिए उन 'उम्मीदों' और ভুলন 'रिश्तों' के बोझ को कम किया है जो डुबो रहे थे..!!! मुझको # खामोशी लेगी बदला मेरा मेरी सौ अच्छाइयों को भूलकर तुम सभी ने एक ही गलती को पकड़ कर रखा हुआ है कि किसी के साथ अब बोलचाल नही इसके पीछे का मेरा मकसद मेरा रखता भीतर अपनी शांति को महसूस खुद के जिसको में खो चुका था तुम करना था सभी के पीछे भाग भाग कर..!! सब की हां में हां मिलाना अच्छाई नहीं, उसको में कमजोरी समझता हूं जिसको तुम सभी आज मेरी अक्कड़ समझते हो..!! याद रखना आज मेरे संग नफरत करने वालों लगती है तो उसके अंदर डूबने जब नाव के बोझ को हल्का करना पडता है उसी तरह मैने भी अपनी जिन्दगी को नाव को से बचाने के लिए उन 'उम्मीदों' और ভুলন 'रिश्तों' के बोझ को कम किया है जो डुबो रहे थे..!!! मुझको - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - ~ आपीन्है आपु साजिओ आपीन्है रचिओ नाउग द्रुयी " साजीऐ करि आसण्नु डिठो चाऊ कुदरति  तू तुसि दैवहि करहि पसाउा दाता करता आपिध र्तू जाणीई सभसै दे लैसहि जिंदु कवाउयाकरि आसणु डिठो चाउ]ा মীঠা उस परमात्मा ने स्वयं ही अपने आप को प्रकट किया है और स्वयं ही वह स्वयंभू है उसे किसी ने अपना नाम और अस्तित्व को रचा है। ' बनाया नहीं। उसने ही इस कुदरत की रचना की इस सृष्टि को रचकर लगे वह इसमें विराजमान होकर बड़े चाव से इसे देख रहा है। हे प्रभु! तू ही है और तू ही सब कुछ करने वाला है। तू सबके मन की सबका दाता' जानने वाला अंतर्यामी है। तू ही सबको प्राण देता है और एक हुक्म से तेरा उन्हें वापस भी ले लेता है। जीवन और मृत्यु तेरे ही हाथ में है। तू इस पूरे खेल को रचकर , इसमें ' 'శిరాగా ' बड़े आनंद के साथ इसे निहार रहा है। हे भाई! ईश्वर और उसकी कुदरत अलग ्अलग नहीं हैं। जैसे QTUTT कुम्हार घड़े को बनाकर अलग हो जाता है, परमात्मा वैसा नहीं है; वह और कृपा तो अपनी रचना के भीतर ही बैठा है। सब कुछ उसकी मर्जी ' से हो रहा है। वही देने वाला है और वही लेने वाला। सारी सृष्टि उसी का विस्तार है और हम सब उसी के अंश हैंl ~ आपीन्है आपु साजिओ आपीन्है रचिओ नाउग द्रुयी " साजीऐ करि आसण्नु डिठो चाऊ कुदरति  तू तुसि दैवहि करहि पसाउा दाता करता आपिध र्तू जाणीई सभसै दे लैसहि जिंदु कवाउयाकरि आसणु डिठो चाउ]ा মীঠা उस परमात्मा ने स्वयं ही अपने आप को प्रकट किया है और स्वयं ही वह स्वयंभू है उसे किसी ने अपना नाम और अस्तित्व को रचा है। ' बनाया नहीं। उसने ही इस कुदरत की रचना की इस सृष्टि को रचकर लगे वह इसमें विराजमान होकर बड़े चाव से इसे देख रहा है। हे प्रभु! तू ही है और तू ही सब कुछ करने वाला है। तू सबके मन की सबका दाता' जानने वाला अंतर्यामी है। तू ही सबको प्राण देता है और एक हुक्म से तेरा उन्हें वापस भी ले लेता है। जीवन और मृत्यु तेरे ही हाथ में है। तू इस पूरे खेल को रचकर , इसमें ' 'శిరాగా ' बड़े आनंद के साथ इसे निहार रहा है। हे भाई! ईश्वर और उसकी कुदरत अलग ्अलग नहीं हैं। जैसे QTUTT कुम्हार घड़े को बनाकर अलग हो जाता है, परमात्मा वैसा नहीं है; वह और कृपा तो अपनी रचना के भीतर ही बैठा है। सब कुछ उसकी मर्जी ' से हो रहा है। वही देने वाला है और वही लेने वाला। सारी सृष्टि उसी का विस्तार है और हम सब उसी के अंश हैंl - ShareChat
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satnam waheguru ji - जिनि तेरी मन बनत बनाई II ऊठत बैठत सद तिसहि धिआई।I तिसहि धिआइ जो एक अलखै।। ईहा ऊहा नानक तेरी रखै।l Mdershulaకs हे भाई! जिस परमात्मा ने तुम्हारे मन की यह सुंदर रचना की ম নয है, जिसने तुम्हें सोचने समझने की शक्ति और चेतना दी है। भिखारी उठते , बैठते और हर समय सदा उसी का ध्यान करो , यानी अपने हर कार्य को करते हुए उसे याद रखो।उस एक परमात्मा তিঙজী का सिमरण करो जो अलख है जिसे इन आँखों से देखा नहीं जा सकता , जो समझ से परे और अनंत है।बाबा नानक देव पहाडा जी कहते हैं कि वह परमात्मा ईहा इस लोक में और ऊहा' परलोक में, दोनों ही जगह तुम्हारी रक्षा करेगा और तुम्हारी वाले लाज रखेगा| उस परमात्मा की भक्ति केवल विशेष समय के नहीं, बल्कि ऊठत बैठत यानी हर पल के लिए कर। fg @IqT जिस ईश्वर ने हमें यह जीवन और मन दिया है, उसे भूलना नहीं जी चाहिए। जो उस एक अलख परमात्मा से जुड़ जाता है, उसे न और न ही मृत्यु के बाद का। इस दुनिया का डर रहता है ॰ जिनि तेरी मन बनत बनाई II ऊठत बैठत सद तिसहि धिआई।I तिसहि धिआइ जो एक अलखै।। ईहा ऊहा नानक तेरी रखै।l Mdershulaకs हे भाई! जिस परमात्मा ने तुम्हारे मन की यह सुंदर रचना की ম নয है, जिसने तुम्हें सोचने समझने की शक्ति और चेतना दी है। भिखारी उठते , बैठते और हर समय सदा उसी का ध्यान करो , यानी अपने हर कार्य को करते हुए उसे याद रखो।उस एक परमात्मा তিঙজী का सिमरण करो जो अलख है जिसे इन आँखों से देखा नहीं जा सकता , जो समझ से परे और अनंत है।बाबा नानक देव पहाडा जी कहते हैं कि वह परमात्मा ईहा इस लोक में और ऊहा' परलोक में, दोनों ही जगह तुम्हारी रक्षा करेगा और तुम्हारी वाले लाज रखेगा| उस परमात्मा की भक्ति केवल विशेष समय के नहीं, बल्कि ऊठत बैठत यानी हर पल के लिए कर। fg @IqT जिस ईश्वर ने हमें यह जीवन और मन दिया है, उसे भूलना नहीं जी चाहिए। जो उस एक अलख परमात्मा से जुड़ जाता है, उसे न और न ही मृत्यु के बाद का। इस दुनिया का डर रहता है ॰ - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - # खामोशी लेगी बदला मेरा जिंदगी में स्वयं केहोने का अपने ही एक आनंद है, जहाँ मैने खुद को भीड़ का हिस्सा नहीं समझ करबल्कि अपने व्यक्तित्व की जब से मैने यह पहचान को बनाया है..!! तय कर लिया कि मुझको अपने किये अच्छे व्यवहार का किसी से कोई भी सर्टिफिकेट लेने की ज़रूरत नहीं है तब मेरा मन कभी भी नही डगमगाते अपनी पथ की राह से.॰!! मेरा सच्चा बल वही है जो पहाड़ की तरह अडिग है और पानी की तरह प्रवाहपूर्ण भी, ताकि वह सही समय पर सही बदलाव को स्वीकारकर सके..!| मित्रता और आत्मीयता उन्हीं के सृंग फलती फूलती है मैं से मुक्त ' होकर हम॰ को जगह दे पाते जो हैं..!!अहंकारी व्यक्ति सिर्फ अपनी सुनाना 026 चाहता है, लेकिन जिसका मन साफ है, वह दूसरे के मौन को ' भी सुन ' लेता है..!! याद रखना मेरी बातों को जब दो लोग बिना किसी मुखौटे के मिलते हैं तभी उन्ही के बीच वास्तविक वैचारिक और आत्मिक प्रगति होती है..!! # खामोशी लेगी बदला मेरा जिंदगी में स्वयं केहोने का अपने ही एक आनंद है, जहाँ मैने खुद को भीड़ का हिस्सा नहीं समझ करबल्कि अपने व्यक्तित्व की जब से मैने यह पहचान को बनाया है..!! तय कर लिया कि मुझको अपने किये अच्छे व्यवहार का किसी से कोई भी सर्टिफिकेट लेने की ज़रूरत नहीं है तब मेरा मन कभी भी नही डगमगाते अपनी पथ की राह से.॰!! मेरा सच्चा बल वही है जो पहाड़ की तरह अडिग है और पानी की तरह प्रवाहपूर्ण भी, ताकि वह सही समय पर सही बदलाव को स्वीकारकर सके..!| मित्रता और आत्मीयता उन्हीं के सृंग फलती फूलती है मैं से मुक्त ' होकर हम॰ को जगह दे पाते जो हैं..!!अहंकारी व्यक्ति सिर्फ अपनी सुनाना 026 चाहता है, लेकिन जिसका मन साफ है, वह दूसरे के मौन को ' भी सुन ' लेता है..!! याद रखना मेरी बातों को जब दो लोग बिना किसी मुखौटे के मिलते हैं तभी उन्ही के बीच वास्तविक वैचारिक और आत्मिक प्रगति होती है..!! - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - बुरा न। मानो, होली है यह केवल एक मुहावरा नहीं॰ बल्कि क्षमा और प्रेम का एक गहरी दर्शन हैl Holi Bek पुत्तर बुरा न मानो, होली है यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि और प्रेम का एक गहरी दर्शन है। होली वास्तव में एक 841 Tu अद्वितीय उत्सव है। यह केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि जड़ता में एक को तोड़कर जीवंत होने का प्रतीक है। होली वास्तव Hi अद्वितीय उत्सव है। यह केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि जड़ता को तोड़कर जीवंत होने का प्रतीक है। यह नित्य का नाच" और Tu सतरंगी उत्सव" है जहां ऊंच ्नीच और द्वेष की दीवारें गिर जाती हैं और केवल शुद्ध आर्नंद शेष बचता है। जब हर चेहरा गुलाल से Guru सराबोर होता है॰ तब पहचान मिट जाती है। कोई पराया नहीं रहता, सब एक ही रंग में रंगे नजर आते है। यह उत्सव सिखाता Ji है कि जीवन को बोझ की तरह नहीं, बल्कि एक नृत्य की तरह जीना चाहिए। होलिका दहनः केवल लकड़ी जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मकता को भस्म करने का प्रतीक है। जिस तरह सफेद प्रकाश सात रंगों से बना है, उसी तरह हमारी आत्मा आनंद के विभिन्न रंगों (प्रेम , शांति, करुणा ) का मिश्रण है। ऊँ नमःशिवाय शिवा जी सदा सहाय! ! बुरा न। मानो, होली है यह केवल एक मुहावरा नहीं॰ बल्कि क्षमा और प्रेम का एक गहरी दर्शन हैl Holi Bek पुत्तर बुरा न मानो, होली है यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि और प्रेम का एक गहरी दर्शन है। होली वास्तव में एक 841 Tu अद्वितीय उत्सव है। यह केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि जड़ता में एक को तोड़कर जीवंत होने का प्रतीक है। होली वास्तव Hi अद्वितीय उत्सव है। यह केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि जड़ता को तोड़कर जीवंत होने का प्रतीक है। यह नित्य का नाच" और Tu सतरंगी उत्सव" है जहां ऊंच ्नीच और द्वेष की दीवारें गिर जाती हैं और केवल शुद्ध आर्नंद शेष बचता है। जब हर चेहरा गुलाल से Guru सराबोर होता है॰ तब पहचान मिट जाती है। कोई पराया नहीं रहता, सब एक ही रंग में रंगे नजर आते है। यह उत्सव सिखाता Ji है कि जीवन को बोझ की तरह नहीं, बल्कि एक नृत्य की तरह जीना चाहिए। होलिका दहनः केवल लकड़ी जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मकता को भस्म करने का प्रतीक है। जिस तरह सफेद प्रकाश सात रंगों से बना है, उसी तरह हमारी आत्मा आनंद के विभिन्न रंगों (प्रेम , शांति, करुणा ) का मिश्रण है। ऊँ नमःशिवाय शिवा जी सदा सहाय! ! - ShareChat