त्योहार'
हर त्योहार की तरह ,
इस बार भी,
वह जाना चाहता था घर!
पर उसको रोंक लिया
महत्वकांक्षाओं और सफल होने की आश ने,
या इन उत्सवों में खुद की तलाश ने,
या शायद ये उत्सव फीके हैं,
उसकी महत्वकांक्षा और सफलता से...
✍️ -दुर्गेश जायसवाल 'चमन'
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