ज्ञान गंगा
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#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . #शब्द जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का...। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। खानिन भ्रमत अमित दुख पाय, मानुष तन हाथ का। माथे भार धरयो ममता का, मानो घोड़ा भाँट का....। ‌जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का....। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। दुनिया दौलत माल खजाना, जामा दरकस पाट का। सोने रूप भंडार भरे हैं, धरा सन्दूखा काठ का.......। जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का....। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। मातु पिता सुत बन्धु सहोदर कुटुम्ब कबीला ठाट का। अन्त की बेरिया चला अकेला, मानो बटोही बाट का। जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का...। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। आये सन्त आदर न कीन्हों, धंधा किहो घर घाट का। कहे कबीर सुनो भाई साधो, भयो किरौना खाट का। जाग जाग जंजाली जियरा, यह तो मेला हाट का...। धोबी घर के कुत्ता होइहौ, नहिं घर का न घाट का...। Factful Debates YouTube Channel
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#santrampal mahraj ji #gyan ganga #GodMorningTuesday #2026_की_सबसे_बड़ी_भविष्यवाणी . कबीर साहिब जी अलख अभेवा।। बोलत हैं धर्मदास, सुनौं सरबंगी देवा। देखै पिण्ड अरू प्राण,कहौ तुम अलख अभेवा।। नाद बिंद की देह, शरीर है प्राण‌ तुम्हारै। तुम बोलत बड़ बात, नहीं आवत दिल म्हारै।। खान पान अस्थान, देह में बोलत दीशं। कैसे अलख स्वरूप, भेद कहियो जगदीशं।। ‌ कैसैं रचे चंद अरू सूर, नदी गिरिबर पाषानां। कैसैं पानी पवन, धरनि‌ पृथ्वी असमानां।। कैसैं सष्टि संजोग, बिजोग‌ करैं किस‌ भांती। कौन कला करतार,कौन बिधि अबिगत नांती।। कैसैं घटि घटि रम रहे, किस बिधि रहौ नियार। कैसैं धरती पर चलौ, कैसैं अधर अधार।। धर्मदास जी श्री विष्णु जी के भक्त थे। शिव जी की भी भक्ति करते थे। परमात्मा इन्हीं को मानते थे। फिर लोकवेद के आधार से परमात्मा को निराकार भी कहते थे। इसी आधार पर धर्मदास जी ने परमात्मा से प्रश्न किया कि आपका नाद-बिन्द यानि माता-पिता से उत्पन्न शरीर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है। आप खाते-पीते हो, बोलते, चलते हो। आप अपने को परमेश्वर भी कह रहे हो। परमात्मा तो निराकार है। वह दिखाई नहीं देता। हे जगदीश! मुझे यह (भेद) रहस्य समझाईए। आपने सृष्टि की रचना कैसे की? कैसे चाँद व सूर्य उत्पन्न किए? कैसे नदी, पहाड़, पानी, पवन, पृथ्वी, आकाश की रचना की? आप कितनी कला के प्रभु हैं? जैसे श्री विष्णु जी सोलह कला के प्रभु हैं। आप कैसे सर्वव्यापक हैं? कैसे सबसे (न्यारे) भिन्न हो? धरती पर चलते हो। परंतु आकाश में कैसे चलते हो? यह सब ज्ञान मुझे बताएँ। Factful Debates YouTube Channel
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Arvind Kumar
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ಈ ಸಂಕ್ರಾಂತಿಯಂದು, ಸಮೃದ್ಧಿಯ ಜೊತೆಗೆ ಶಾಂತಿಯ ಕೊಯ್ಲು ಮಾಡಿ. Gyan Ganga ಇಂದು FREE ಯಾಗಿ ಲಭ್ಯವಿದೆ. ಕರ್ನಾಟಕದ ಶ್ರೋತೃಗಳು ಕನ್ನಡ ಪ್ರವಚನಗಳನ್ನು ಕೇಳಬಹುದು Raj Musix Kannada ದಲ್ಲಿ. #ಜ್ಞಾನ ಗಂಗಾ
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