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कमरछठ
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Irfan shaikh
25K views 5 months ago
कमरछठ, जिसे हलषष्ठी या हलछठ के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और भारत के कुछ अन्य हिस्सों (जैसे- उत्तर प्रदेश और बिहार) में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक त्योहार है। यह त्योहार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। यह त्योहार भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्हें हलधर (हल को धारण करने वाले) के नाम से भी जाना जाता है। कमरछठ पूजा की विधि और महत्व इस पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह संतान के कल्याण से जुड़ा है। कमरछठ व्रत के कुछ खास नियम और पूजा विधि इस प्रकार हैं: सगरी निर्माण: इस पूजा में घर के आंगन या मंदिर में एक प्रतीकात्मक तालाब (जिसे सगरी कहते हैं) बनाया जाता है। इस तालाब में मिट्टी की नाव, फूल-पत्ते और कांसी के फूल सजाए जाते हैं। देवताओं की पूजा: सगरी के पास शिव-पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय की मिट्टी की मूर्तियां स्थापित करके पूजा की जाती है। पसहर चावल का महत्व: इस व्रत में हल से जुते हुए अन्न का सेवन नहीं किया जाता है। इसलिए, इस दिन बिना हल-बैल के उगाए गए पसहर चावल और भैंस के दूध या दही का उपयोग किया जाता है। व्रत कथा: पूजा के दौरान कमरछठ की व्रत कथा सुनी जाती है, जो संतान को सभी कष्टों से बचाने और दीर्घायु का आशीर्वाद देने से जुड़ी है। व्रत का समापन: शाम को सूर्यास्त के बाद व्रत खोला जाता है। कई जगहों पर महिलाएं अपने बच्चों की कमर पर हल्दी से सना हुआ एक धागा या कपड़ा भी बांधती हैं। यह पर्व छत्तीसगढ़ की संस्कृति का एक अभिन्न अंग है और यहां इसे बहुत ही धूमधाम और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। #कमरछठ #🗞️14 अगस्त के अपडेट 🔴 #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #aaj ki taaja khabar
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