कानून
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🙏🙏🙏: 📌 `*पति द्वारा पत्नी के नाम खरीदी गई प्रॉपर्टी पर हक किसका हाई कोर्ट का निर्णय*` *विवेक दर्शन पत्रिका* *_डॉ राव प्रताप सिंह सुवाणा एडवोकेट_* आजकल के युग में कई पति अपनी कमाई से संपत्ति खरीदकर उसे पत्नी के नाम पर रजिस्टर करा देते हैं। यह प्रथा कई कारणों से अपनाई जाती है जिसमें कर बचत, पारिवारिक सुरक्षा और कानूनी सुविधा शामिल है। लेकिन बाद में इसी संपत्ति को लेकर पति-पत्नी के बीच मालिकाना हक का विवाद हो जाता है। कई बार तलाक या पारिवारिक कलह के दौरान यह मुद्दा और भी जटिल हो जाता है। इन सभी भ्रमों को दूर करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय दिया है हमसे जुड़े https://chat.whatsapp.com/HIMe1sT1dacKuQiVcy5D75?mode=ac_c #कानून पत्नी के नाम पर खरीदी गई प्रोपर्टी का असली मालिक (property ownership) कौन होगा। पति और पत्नी पर परिवार व बच्चों के पालन पोषण का जिम्मा होता है। ऐसे में दोनों के की कई फर्ज व अधिकार होते हैं। बात प्रोपर्टी अधिकारों (HC decision on property) की करें तो कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना जरूरी है। अधिकतर लोग इस बारे में भी अनजान हैं कि पति की ओर से पत्नी के नाम पर खरीदी गई प्रोपर्टी (property knowledge) पर किसका मालिकाना हक होता है और इसे लेकर क्या कानूनी प्रावधान है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे लेकर सब कुछ क्लियर किया है और बताया है कि ऐसी प्रोपर्टी (property news) का असली मालिक कौन होगा। आइये जानते हैं क्या कहा है हाईकोर्ट ने- *दिल्ली हाईकोर्ट का यह है कहना* पति की ओर से अपनी कमाई से पत्नी के नाम पर खरीदी गई प्रोपर्टी (HC decision on property) पर कई बार पत्नी अपना अधिकार जमाने लगती है, लेकिन कानूनी रूप से पति ही उस प्रोपर्टी का असली मालिक होता है। दिल्ली हाईकोर्ट (delhi high court) ने प्रोपर्टी से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इसमें कोर्ट ने कहा है कि *पत्नी के पास आय का कोई स्वतंत्र व ज्ञात स्रोत न होने की स्थिति में पत्नी के नाम पर खरीदी गई प्रोपर्टी को पति की कमाई से खरीदी गई प्रोपर्टी (husband wife property rights) माना जाएगा*। इस पर पति का ही मालिकाना हक होगा। *इस स्थिति में होगा पत्नी का हक* अगर पत्नी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन एक्ट, 1988 (संशोधित) के अनुसार अपनी आय का स्वतंत्र स्रोत रखती है और यह साबित कर देती है कि प्रोपर्टी (wife's property rights) पत्नी की कमाई से खरीदी है तो पत्नी उस प्रोपर्टी की असली मालिक होगी। ऐसी स्थिति में खुद की कमाई से प्रोपर्टी खरीदने के सबूत पेश करके पत्नी कोर्ट में दावा भी कर सकती है। *यह कहता है कानूनी प्रावधान* अधिकतर लोग पत्नी के नाम पर खरीदी गई प्रोपर्टी (huband's property rights) को बेनामी संपत्ति समझते हैं। कानूनी प्रावधान के अनुसार यह बेनामी संपत्ति नहीं कहलाती। आय का स्रोत ज्ञात है तो पति अपनी पत्नी के नाम पर प्रोपर्टी (decision in benami property) खरीद सकता है। अपनी कमाई से प्रोपर्टी लेकर पत्नी के नाम कराने वाला पति इसके सबूत भी पास में रखता है तो पत्नी उस प्रोपर्टी (property disputes) पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकती। कानून ऐसी प्रोपर्टी पर पूर्ण रूप से पति का ही मालिकाना हक मानता है। *निचली कोर्ट ने यह दिया था आदेश* निचली कोर्ट ने इस मामले में पत्नी के हक में फैसला सुनाया था। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट (delhi high court) पहुंचा तो हाईकोर्ट ने पति की ओर से प्रोपर्टी (property news) पर खुद का अधिकार जताते हुए लगाई गई याचिका को मंजूर कर लिया। इस मामले के अनुसार पति ने पत्नी के नाम पर दो प्रोपर्टी खरीदी थी। निचली अदालत ने इन पर पत्नी का मालिकाना हक (wife's property rights) होने के आदेश दिए थे। अब हाईकोर्ट ये आदेश खारिज कर दिए हैं। *इस एक्ट के तहत निचली अदालत ने सुनाया था निर्णय* निचली अदालत की ओर से इस मामले में बेनामी प्रोहिबिशन एक्ट, 1988 (Benami Prohibition Act, 1988) के तहत फैसला सुनाया गया था। इस एक्ट का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट का कहना था कि पत्नी के नाम ऐसी संपत्ति को पति वापस नहीं ले सकता। हाईकोर्ट ने बताया कि बेनामी प्रोहिबिशन एक्ट, 1988 ct, 1988) का प्रावधान अब संशोधित है। संशोधित प्रावधान अनुसार निर्णय तय करना चाहिए था। अब यह मामला फिर से ट्रायल कोर्ट में गया है। हाईकोर्ट के निर्देश अनुसार बेनामी संपत्ति (benami property) के संशोधित कानून अनुसार अब ट्रायल कोर्ट इस मामले में फिर से विचार करेगी। *विशेष* इसी प्रकार का एक मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा भी निर्णय किया गया जिसमें पत्नी के नाम रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी को पारिवारिक संपत्ति मानते हुए परिवार के अन्य सदस्यों के दावे को भी उसे पर हक माना गया। शेयर करे *विवेक दर्शन पत्रिका* *_डॉ राव प्रताप सिंह सुवाणा एडवोकेट_* [23/8, 11:42 am] 🙏🙏🙏: क्या पति द्वारा अपनी पत्नी (जो गृहिणी थी) के नाम पर खरीदी गई संपत्ति को "व्यक्तिगत संपत्ति" माना जाएगा या "संयुक्त पारिवारिक संपत्ति", और क्या उसमें पहली पत्नी के बच्चों का भी अधिकार होगा? 🔍 कानूनी स्थिति का सारांश: यदि पत्नी (दूसरी पत्नी) के पास अपनी कोई स्वतंत्र आय नहीं थी और संपत्ति पति द्वारा खरीदी गई थी, तो इसे पति की संपत्ति माना जाएगा, भले ही वह पत्नी के नाम पर क्यों न हो। इसका अर्थ यह है कि ऐसी संपत्ति, जब तक यह साबित न हो कि पत्नी ने अपनी आय से खरीदी है, पति की मानी जाएगी, और पति के सभी वैध वारिसों को उसमें विरासत का अधिकार होगा — चाहे वे पहली पत्नी से हों या दूसरी से। ⚖️ प्रासंगिक निर्णय के मुख्य बिंदु: हाई कोर्ट ने माना कि अगर कोई पति अपनी पत्नी (जो गृहिणी है) के नाम पर संपत्ति खरीदता है, तो यह बेनामी लेनदेन नहीं है, बल्कि इसे माना जाएगा कि पति ने अपने स्रोत से संपत्ति खरीदी और पत्नी को दिया। जब कोई स्वतंत्र आय का स्रोत नहीं है, तो यह साबित करना दूसरी पत्नी की जिम्मेदारी होगी कि संपत्ति उसकी अपनी है। बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988 की धारा 2(9)(A)(b) भी इस बात की अनुमति देती है कि पति अपने परिवार के सदस्य के नाम संपत्ति खरीद सकता है, और इसे बेनामी नहीं माना जाएगा। ✅ आपके केस में उत्तर: चूँकि संपत्ति पति ने अपने पैसे से खरीदी और पत्नी (दूसरी) के नाम रजिस्टर्ड कराई, और अगर यह साबित हो जाए कि दूसरी पत्नी की कोई स्वतंत्र आय नहीं थी, तो वह संपत्ति संयुक्त पारिवारिक संपत्ति मानी जाएगी। 🔹 इसलिए, पहली पत्नी का बेटा (संतान) उस संपत्ति में कानूनी रूप से हिस्सेदार है। 🔹 दूसरी पत्नी केवल अपने बच्चों के नाम पर पूरी संपत्ति नहीं कर सकती। 🔹 यदि दूसरी पत्नी उसे हड़पना चाहती है, तो पहली पत्नी का बेटा कोर्ट में वाद दायर कर सकता है — "विरासत का दावा" करते हुए। 🛑 ध्यान दें:यदि दूसरी पत्नी ने बाद में उस संपत्ति को अपने बच्चों या किसी और के नाम कर दिया है (जैसे उपहार पत्र/गिफ्ट डीड के ज़रिए), तो वह चुनौती के दायरे में आएगा, क्योंकि वह पूर्ण स्वामिनी नहीं थी। 📝 निष्कर्ष: संपत्ति पति की मानी जाएगी। सभी वैध संतानों (पहली और दूसरी पत्नी से) को बराबर का हिस्सा मिलेगा। दूसरी पत्नी की सिर्फ नाम पर मौजूदगी, उसे एकमात्र मालिक नहीं बनाती।
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digital निर्माता
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कानून का हुक: "जब ज्ञान ब्लॉक किया जाता है, न्याय चुप हो जाता है" ⚖️🔥 — भारत की सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय के हटाने के आदेश को पलटकर Wikipedia पर हटाए गए पन्ने की बहाली का रास्ता साफ़ किया, जिससे public scrutiny और free speech को बड़ी जीत मिली। Wikimedia ने पहले इस हटाए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी — यह मामला दिखाता है कि content takedown पर कानूनी लड़ाईयां सूचना की स्वतंत्रता और मानहानि (defamation) के बीच संतुलन पर किस तरह मेलजोल कराती हैं। Wikimedia के नोट्स और विश्लेषण के अनुसार यह बहाली सार्वजनिक चर्चा और संवैधानिक सिद्धांतों के समर्थन में एक मिसाल बन गई है। तर्क/साइंस: खुले सूचना-फ्लो से ही सामाजिक जाँच (social audit) और तथ्य-जांच संभव है — अगर प्लेटफ़ॉर्म्स पर जानकारी को नियमतः censor किया जाएगा तो लोकतंत्र की feedback-loop टूटती है; इसलिए कानूनों में proportionality और जवाबदेही के मानदण्ड लागू करना ज़रूरी है — जो सही है उसे सही कहो और जो अनावश्यक सेंसरशिप है उसे गलत कहो। संबंधित केस-एंट्री Wikipedia पर उपलब्ध है। #कानून #न्याय #FreeSpeech #Wikipedia #सत्यविज्ञान ⚖️📚🗞️ @अपना कानून @साेनाली कानडे @ओमकार कानडे @विद्या कान्त मिश्र @प्राची राजू कानडे #कानून #किसान कानून, किसान कानून का विरोध, कांग्रेस का विरोध #~जन्संख्या कानून जल्द लाने की जरूरत है । ~ #किसान आंदोलन, सुप्रीम कोर्ट, कृषि कानून, केंद्र सरकार
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