मेजर
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#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🎤 आज के दिन का इतिहास #🤩पॉजिटिव स्टोरी✌ #हॉकी के जादूगर पद्मभूषण से सम्मानित मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन #मेजर 🏑 मेजर ध्यानचंद की विस्तृत जीवनी (कुशवाहा गौरव संस्करण) | श्रेणी | विवरण | |--------------------------|------------------------------------------------------------------------| | पूरा नाम | ध्यानचंद सिंह | | उपनाम | हॉकी का जादूगर, द विजार्ड ऑफ हॉकी | | जन्म | 29 अगस्त 1905, प्रयागराज (इलाहाबाद), उत्तर प्रदेश | | जाति / समुदाय | कुशवाहा (मौर्य वंश, सामाजिक रूप से ओबीसी वर्ग) | | धर्म | हिन्दू | | पिता | सूबेदार सोमेश्वर दत्त सिंह कुशवाहा | | माता | शारदा सिंह कुशवाहा | | शिक्षा | प्रारंभिक शिक्षा झाँसी में, बाद में विक्टोरिया कॉलेज, ग्वालियर से स्नातक | | सेना में प्रवेश | 1922 में 'फर्स्ट ब्राह्मण रेजीमेंट' में साधारण सिपाही | | सेना में पदोन्नति | लांस नायक → नायक → सूबेदार → लेफ्टिनेंट → मेजर | | विवाह | जानकी देवी से, वर्ष 1936 में | | बच्चे | बृजमोहन सिंह, सोहन सिंह, राजकुमार | | भाई | रूप सिंह (प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी), मूल सिंह | | ओलंपिक उपलब्धियाँ | 🥇1928 एम्स्टर्डम, 🥇1932 लॉस एंजेलिस, 🥇1936 बर्लिन | | गोलों की संख्या | 1000+ अंतरराष्ट्रीय गोल | | सम्मान | पद्म भूषण (1956), राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) | | प्रेरक व्यक्ति | मेजर तिवारी (रेजीमेंट में हॉकी के लिए प्रेरित किया) | | कोच | पंकज गुप्ता | | प्रसिद्ध घटनाएँ | हिटलर ने जर्मन नागरिकता और कर्नल पद की पेशकश की थी (ध्यानचंद ने ठुकराया) | | आत्मकथा | "गोल्स!" (1952 में प्रकाशित) | | मृत्यु | 3 दिसंबर 1979, AIIMS, नई दिल्ली | --- 🔱 प्रतीकात्मक रूपक (कुशवाहा योद्धा शैली) | पौराणिक योद्धा | ध्यानचंद की शैली | रूपक | |----------------|-------------------------------|--------------------------------------------| | अर्जुन | सटीक निशाना, गोल की भूख | हॉकी स्टिक = गांडीव | | कृष्ण | रणनीति, चमत्कार, चपलता | ड्रिबलिंग = माया | | परशुराम | युद्ध कौशल, जातीय गौरव | मैदान = कर्मभूमि, विरोधी = अधर्मी राजा | | हनुमान | गति, शक्ति, समर्पण | गोल = संजीवनी, टीम = राम की सेना | 🌾 कुशवाहा विरासत और ध्यानचंद - जैसे कुशवाहा किसान मिट्टी से सोना उगाते हैं, वैसे ही ध्यानचंद ने मैदान से स्वर्ण पदक उगाए। - उनकी शैली में मिट्टी की गंध, श्रम की चमक, और सामाजिक चेतना की झलक थी।
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