Sahitya Page
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कू-ए-बुताँ तक फिरूँ आराम-ए-जाँ की ख़्वाहिश लिए,
वर्ना मैं निकलूँ भी तो घर से कहाँ की ख़्वाहिश लिए।
– अमित राज श्रीवास्तव
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