#🫨सोना-चांदी में महा-गिरावट🪙🥈 शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में, मार्च डिलीवरी वाले चांदी वायदा का भाव 67,891 रुपये या 16.97 फीसदी गिर कर 3,32,002 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जो एक दिन में इसकी सबसे बड़ी गिरावट है. गुरुवार को चांदी में बड़ा उछाल देखा गया था और ये 4,20,048 रुपये/किलो के अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी, हालांकि बाद में ये गिर कर 3,99,893 रुपये/किलो पर बंद हुई.
क्या हैं गिरावट के बड़े कारण?
मुनाफावसूली: बीते कुछ दिनों से चांदी और सोना, दोनों लगातार ऑल टाइम हाई बना रहे थे, जिसके बाद ऊंचे भाव पर भारी मुनाफावसूली देखने को मिली. यानी निवेशकों ने खूब सोना-चांदी बेचा और मोटा मुनाफा कमाया. चांदी में ताजा गिरावट के पीछे कई और भी वजहें बताई जा रही हैं. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस विश्लेषक, मानव मोदी ने कहा कि चांदी और सोने की कीमतों ने आज सभी फॉर्मेट, 'मेगा' और 'मिनी' कॉन्ट्रैक्ट्स में निचले सर्किट स्तर को छू लिया है. उन्होंने कहा, '...यह एक मजबूत मुनाफावसूली है जो हमने ऊपरी स्तर से देखी है, और ETF की कीमतें, वायदा कारोबार में जो हम देख रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा फीसदी नीचे है.' बता दें कि घरेलू बाजारों में सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में 20 फीसदी तक की गिरावट आई है.
तेजी के बाद करेक्शन: केडिया एडवायरजरी के मुताबिक, हाल की रैली में कीमती धातुओं की तेजी काफी गर्म हो चुकी थी, ऐसे में करेक्शन लगभग तय माना जा रहा था. सोने की तुलना में चांदी का बाजार आकार में छोटा और ज्यादा अस्थिर होता है, इसलिए जब भी बिकवाली तेज होती है तो इसमें गिरावट अपेक्षाकृत ज्यादा दिखती है. जैसे ही सोना रिकॉर्ड स्तर से फिसलना शुरू हुआ, चांदी में भी तेज गिरावट देखने को मिली और यह दबाव और बढ़ गया.
इंडस्ट्रियल डिमांड आउटलुक: गिरावट की एक बड़ी वजह इंडस्ट्रियल मेटल्स की मांग को लेकर कमजोर आउटलुक भी बताया जा रहा है. चांदी का व्यापक इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मैन्युफैक्चरिंग जैसी इंडस्ट्री में होता है. ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार सुस्त पड़ने, चीन और यूरोप से नरम मांग की आशंकाओं ने औद्योगिक कमोडिटीज के आउटलुक पर दबाव डाला है, जिसका असर चांदी की कीमतों पर भी दिख रहा है.
चौथी बड़ी वजह अमेरिका से: अमेरिका इसी के साथ अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने निकट भविष्य में फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक दर कटौती की उम्मीदों को कमजोर किया है. ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर ऐसी कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं. ऐसे माहौल में कुछ निवेशक सोना‑चांदी से पैसा निकालकर बांड और इक्विटी जैसे यील्ड वाले एसेट्स की ओर रुख करते हैं. जिंस बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट इस रिपोर्ट के बीच आई है कि अमेरिकी प्रशासन, केविन वॉर्श को अगले फेडरल रिजर्व प्रमुख के रूप में नामित करने की तैयारी कर रहा है. एक विशेषज्ञ ने कहा, 'वॉर्श ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत होगा और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ेगा.' अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल के उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान करने वाले हैं.
#🆕 ताजा अपडेट #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🎞️आज के वायरल अपडेट्स