ज्येष्ठ गौरी विसर्जन, जो गणेश चतुर्थी के दौरान मनाया जाता है, एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह त्योहार तीन दिनों तक चलता है और देवी गौरी, जो भगवान गणेश की माता हैं, को समर्पित है।
ज्येष्ठ गौरी विसर्जन का महत्व
पारिवारिक कल्याण: ऐसा माना जाता है कि देवी गौरी अपने भक्तों के घरों में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाती हैं। उनकी पूजा परिवार के कल्याण और अच्छे स्वास्थ्य के लिए की जाती है।
शक्ति का प्रतीक: देवी गौरी को शक्ति और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा नारी शक्ति का सम्मान करने के लिए भी की जाती है।
गणेशोत्सव का हिस्सा: यह त्योहार गणेश चतुर्थी के उत्सव का एक अभिन्न हिस्सा है। कई घरों में गौरी और गणेश की मूर्तियों को एक साथ स्थापित किया जाता है।
विसर्जन की विधि
गौरी विसर्जन की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण चरण शामिल हैं:
मूर्तियों की स्थापना: त्योहार के पहले दिन, गौरी की मूर्तियों को घर में स्थापित किया जाता है। उन्हें पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सजाया जाता है।
पूजा और नैवेद्य: अगले दिन, गौरी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं और देवी को नैवेद्य (भोग) के रूप में अर्पित की जाती हैं।
विसर्जन: तीसरे दिन, एक छोटी सी पूजा के बाद, मूर्तियों को सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाता है। विसर्जन की प्रक्रिया आमतौर पर पास के किसी जल स्रोत, जैसे नदी, झील या समुद्र में की जाती है। आजकल, पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन के लिए, कई लोग घर में ही पानी के टब में विसर्जन करते हैं।
ज्येष्ठ गौरी विसर्जन एक ऐसा त्योहार है जो हमें प्रकृति और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ता है। यह परिवार के सदस्यों को एक साथ लाता है और हमें अपनी जड़ों को याद रखने का अवसर देता है।
#ज्येष्ठ गौरी विसर्जन #🗞️2 सितंबर के अपडेट 🔴 #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #aaj ki taaja khabar