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🤹पौंड्रक: नकली वासुदेव की कथा🤹
❣️कथा द्वापर युग के एक राजा पौंड्रक की है, जिसे 'मिथ्या वासुदेव' कहा जाता था। उसने यांत्रिक सहायता से नकली दो हाथ लगवा लिए थे और गरुड़ जैसा यंत्र बनाकर खुद को असली भगवान घोषित कर दिया था। वह भगवान श्री कृष्ण की तरह ही वेष धारण करता और लोगों से अपनी पूजा करवाता था। जब उसे यह चुनौती दी गई कि असली भगवान तो द्वारका में हैं, तो उसने अहंकार में आकर श्री कृष्ण को एक दूत के माध्यम से पत्र भेजा। पत्र में उसने कृष्ण को 'धूर्त' कहा और आदेश दिया कि वे शंख, चक्र, गदा और पद्म त्याग कर उसकी शरण में आ जाएं, अन्यथा युद्ध के लिए तैयार रहें।❣️
🎇युद्ध और सुदर्शन चक्र का प्रहार🎇
🛐भगवान श्री कृष्ण पौंड्रक की इस मूर्खता पर हंसे और युद्ध के मैदान में पहुंचे। युद्ध में श्री कृष्ण ने पौंड्रक का वध किया। पौंड्रक का मित्र काशी नरेश भी उसके साथ था। भगवान ने अपने बाणों से काशी नरेश का मस्तक काट दिया, जो सीधा काशी के राजद्वार पर जाकर गिरा।🛐
🧘काशी के ब्राह्मणों का तंत्र प्रयोग🧘
🧑🍼पिता की मृत्यु से क्रोधित होकर काशी के राजकुमार ने भगवान श्री कृष्ण से बदला लेने का निश्चय किया। उसने तंत्र-विद्या में निपुण ब्राह्मणों को बुलाया और पूरी द्वारका सहित श्री कृष्ण का विनाश करने के लिए 'अभिचार प्रयोग' (मारण प्रयोग) करवाया। इस अनुष्ठान की अग्नि से 'कृत्या' नाम की एक भयंकर राक्षसी उत्पन्न हुई, जो आग की लपटों की तरह पूर्व (काशी) से पश्चिम (द्वारका) की ओर बढ़ी।🧑🍼
‼️काशी का दहन और मोक्ष‼️
🤹जब वह कृत्या द्वारका पहुँची, तो वहाँ की रक्षा कर रहे सुदर्शन चक्र ने उसे अंदर नहीं घुसने दिया। तंत्र शास्त्र के अनुसार, यदि मारण प्रयोग सफल न हो, तो वह चलाने वाले की ओर ही लौट जाता है। वह कृत्या वापस काशी लौटी और उन सभी तांत्रिक ब्राह्मणों व राजकुमार को जलाकर भस्म कर दिया। सुदर्शन चक्र भी उसके पीछे-पीछे काशी आया और उसने पूरी काशी को जलाकर राख कर दिया🤹
🕉️भगवान शिव की मौज🕉️
♦️कथा के अंत में महाराज जी बताते हैं कि जब देवताओं ने शिव जी से पूछा कि उन्होंने अपनों को बचाया क्यों नहीं, तो शिव जी ने कहा कि जो मेरे प्रभु (श्री कृष्ण) के द्रोही हैं, उन्हें नष्ट ही हो जाना चाहिए। साथ ही, सुदर्शन चक्र की 'वैष्णवाग्नि' और काशी में मृत्यु होने के कारण उन सभी को अंततः मोक्ष ही प्राप्त हुआ। भगवान शिव प्रसन्न थे क्योंकि पूरी काशी अब भस्म से भर गई थी, जो उनके वैराग्य स्वरूप के लिए उत्तम स्थान बन गया था।♦️
🙏राधे राधे 🙏