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. इंसान क्यो नही।
अपने मकान का नवीकरण करने के लिये जापान मे एक मकान तोडा जा रहा था। यह मकान पांच साल पहले बनकर तैयार हुआ था। तभी वहां पर काम करने वाले व्यक्तियो ने देखा कि एक छिपकली दिवार मे उसके पैरो पर किल लगने कारण वहा पर जमी पडी है।
जब उन्होंने यह दृश्य देखा तो बहूत दया आई। तभी उसको ध्यान आया कि यह कील तो पहले जब पाच साल पहले मकान बना था तब ठोकी गई थी।
छिपकली पांच साल से जीवित थी। दिवार के अन्दर की तरफ अन्धेरे मे और हिलढुल भी नही सकती थी।वह अविश्वासनीय असम्भव व चौकाने वाला सच था। यह समझ से परे था कि एक छिपकली पांच साल तक बिना हिले डुले कैसे रह सकती है। उन व्यक्तियों ने छिपकली अब तक क्या करती रही और कैसे भोजन प्राप्त करती रही जानने के लिये काम रोक दिया और हर गतिविधि पर नजर बनाये रखी।
थोडी देर बाद एक दुसरी छिपकली मुह मे भोजन दबा कर ना जाने कहां से आ गई। उस ठुकी हुई छिपकली को खाना खिलाने लग गई। यह एक अद्भुत नजारा था। जो कि हृदय को छू गया। एक छोटा जीव पीछले पांच साल से अपने साथी को भोजन करा रहा है। मनुष्य जीवन चौरासी लाख योणिया मे श्रृष्ट माना गया है। मनुष्य ये कार्य नही करता। आज के समाज में एक व्यक्ति बिमार हो जाता है या वृध्द अवस्था मे आ जाता है तो घर वाले उससे मुह मोडना शुरू कर देते है। मनुष्य जाति मे आपसी भाईचार व सदभावना प्रायकर खत्म हो गई है। सब लोग अपने स्वार्थ के लिये दुसरो को हानी पहुचा देते है। होना वही होता है जो परमात्मा को मंजूर होता है।
Sant Rampal Ji Maharaj
#कबीर