Guru*👏🏻पहला प्रणाम
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13 hours ago
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🙏 *सब मानव की लाचारी* ‌. 🙏 *देख रही है दुनिया सारी* *हम सब मानव की लाचारी* *हमने जैव विकास किया* *जीने का प्रयास किया* *जो चाहा हमने छीन लिया* *हमने प्रकृति को लील लिया* *नित भौतिकता में हम भागे* *सबसे विकास में हम आगे* *कंक्रीटों के जंगल जोड़े* *सारे नियम हमी ने तोड़े* *काम न आती अब हुशियारी* *देख रही है दुनिया सारी* *हम सब मानव की लाचारी* *हम तो यूं ही ऐंठे थे* *मालिक ही बन बैठे थे* *सब पर रौब जमाते थे* *जाने क्या क्या खाते थे* *सब जीवों को पस्त किया* *सारे नियमों को ध्वस्त किया* *एक पलट कर वार हुआ* *तब इतना हाहाकार हुआ* *अपनों को छूने से डरना* *घुट घुट कर घर में मरना* *टूटी अब तो कमर हमारी* *देख रही है दुनिया सारी* *सबसे सरल जीव है वह* *हम विकास का चरम लिए* *हमे जीत नहीं सकता कोई* *जीते हैं यह भरम लिए* *प्रोटीन कोट के अंदर वह* *केवल डी एन ए रखता है* *वह तो इतना छोटा सा* *न आंखों से दिखता है* *फिर भी वह सबक सिखाता है* *अपना जोर दिखाता है* *जिसने सारा जग जीता* *उसको भी जीत कर जाता है* *जिसको हम तुच्छ समझते हैं* *वह कोरोना बन जाता है* *यह कोराना जैसी बीमारी* *देख रही है दुनिया सारी* *आओ प्रकृति से मिल आएं* *शाकाहारी ही हम खाएं* *सबसे दूर प्रणाम करें* *न गले मिलें न हांथ मिलाएं* *एक आपदा से लड़ना है* *नहीं जरा सा भी डरना है* *सबसे बात बताना है* *हांथो को धोते जाना है* *घर में कुछ दिन आराम करें* *घर बैठे कुछ काम करें* *न इस से डरें और न डरवाएं* *बस धर्म अपना सनातन अपनाएं* *नियमों का पालन करिए* *नहीं कोरोना से डरिए* *करनी है प्रकृति से यारी* *देख रही है दुनिया सारी* *यह हम सब मानव की लाचारी* 🙏 🙏 #कविता की कविता