🙏 *सब मानव की लाचारी* . 🙏
*देख रही है दुनिया सारी*
*हम सब मानव की लाचारी*
*हमने जैव विकास किया*
*जीने का प्रयास किया*
*जो चाहा हमने छीन लिया*
*हमने प्रकृति को लील लिया*
*नित भौतिकता में हम भागे*
*सबसे विकास में हम आगे*
*कंक्रीटों के जंगल जोड़े*
*सारे नियम हमी ने तोड़े*
*काम न आती अब हुशियारी*
*देख रही है दुनिया सारी*
*हम सब मानव की लाचारी*
*हम तो यूं ही ऐंठे थे*
*मालिक ही बन बैठे थे*
*सब पर रौब जमाते थे*
*जाने क्या क्या खाते थे*
*सब जीवों को पस्त किया*
*सारे नियमों को ध्वस्त किया*
*एक पलट कर वार हुआ*
*तब इतना हाहाकार हुआ*
*अपनों को छूने से डरना*
*घुट घुट कर घर में मरना*
*टूटी अब तो कमर हमारी*
*देख रही है दुनिया सारी*
*सबसे सरल जीव है वह*
*हम विकास का चरम लिए*
*हमे जीत नहीं सकता कोई*
*जीते हैं यह भरम लिए*
*प्रोटीन कोट के अंदर वह*
*केवल डी एन ए रखता है*
*वह तो इतना छोटा सा*
*न आंखों से दिखता है*
*फिर भी वह सबक सिखाता है*
*अपना जोर दिखाता है*
*जिसने सारा जग जीता*
*उसको भी जीत कर जाता है*
*जिसको हम तुच्छ समझते हैं*
*वह कोरोना बन जाता है*
*यह कोराना जैसी बीमारी*
*देख रही है दुनिया सारी*
*आओ प्रकृति से मिल आएं*
*शाकाहारी ही हम खाएं*
*सबसे दूर प्रणाम करें*
*न गले मिलें न हांथ मिलाएं*
*एक आपदा से लड़ना है*
*नहीं जरा सा भी डरना है*
*सबसे बात बताना है*
*हांथो को धोते जाना है*
*घर में कुछ दिन आराम करें*
*घर बैठे कुछ काम करें*
*न इस से डरें और न डरवाएं*
*बस धर्म अपना सनातन अपनाएं*
*नियमों का पालन करिए*
*नहीं कोरोना से डरिए*
*करनी है प्रकृति से यारी*
*देख रही है दुनिया सारी*
*यह हम सब मानव की लाचारी*
🙏 🙏 #कविता की कविता