Geeta ka gyan 🙏🙏

sn vyas
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3 घंटे पहले
#🙏गीता ज्ञान🛕 सिद्धि-असिद्धि में सम रहना गीताजी का योग है। मनुष्य कामना और ममता रखते हुए शान्ति चाहते हैं, यह होने का है ही नहीं; अहंता, ममता और कामना के त्याग से तत्काल शान्ति मिलती है। परमात्म-तत्त्व की प्राप्ति तो इच्छा करने के अधीन है, लेकिन सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति कामना के अधीन नहीं है। नाशवान् वस्तुओं को लेकर, अपने में जो श्रेष्ठता का भाव रहता है, उसे दर्प, घमण्ड कहते हैं। सबसे पहले कामना का त्याग, फिर ममता का त्याग, फिर स्पृहा का त्याग और अन्त में अहम् का त्याग होता है— यह क्रम है। कामना और ममता के त्याग से परमात्मा में आकर्षण, प्रियता पैदा हो जाती है। ज्ञान मार्ग में अहंता का त्याग पहले होता है, फिर कामना का त्याग हो जाता है।* 🌷🌷🌷🌷🌷
जय श्री महाकाल जी 🌹🔱🕉️
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1 दिन पहले
14/May/2026/प्रातः काल शूभ वृहस्पतिवार दीव्य फूल बेलपत्री सींगार आरती दर्शन 🌹 ॐ नमः शिवाय 🌹 जय श्री राधे कृष्णा 🌹 जय श्री राम 🙏 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #❤️ Love You Maa ❤️ #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕