शत शत नमन

सुशील मेहता
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वीर सावरकर पुन्य तिथि आमतौर पर माना जाता है कि उन्होंने खुद अपने लिए इच्छा मृत्यु जैसी स्थिति चुनी थी. उनका निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ था. उससे एक महीने पहले से उन्होंने उपवास करना शुरू कर दिया था.माना जाता है कि इसी उपवास के कारण उनका शरीर कमजोर होता गया और फिर 82 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया. दरअसल कालापानी की सजा ने उनके स्वास्थ्य पर बहुत गहरा असर डाला था। सावरकर ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले 1964 में ‘आत्महत्या या आत्मसमर्पण’ नाम का एक लेख लिखा था. इस लेख में उन्होंने अपनी इच्छा मृत्यु के समर्थन को स्पष्ट किया था. इसके बारे में उनका कहना था कि आत्महत्या और आत्म-त्याग के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर होता है। सावरकर ने तर्क दिया था कि एक निराश इंसान आत्महत्या से अपना जीवन समाप्त करता है लेकिन जब किसी के जीवन का मिशन पूरा हो चुका हो और शरीर इतना कमजोर हो चुका हो कि जीना असंभव हो तो जीवन का अंत करने को स्व बलिदान कहा जाना चाहिए। #शत शत नमन
सुशील मेहता
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छत्रपति शिवाजी जयंती छत्रपति शिवाजी भोसले (1630-1680 ई.) छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को मराठा परिवार में हुआ था। उनके जन्मदिवस के अवसर पर ही हर साल 19 फरवरी को भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती मनाई जाती है। महाराष्ट सरकार ने तो इस दिन को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। इसके लिए उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासक औरंगज़ेब से संघर्ष किया। सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह "छत्रपति" बने। छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किए तथा छापामार युद्ध (guerilla warfare) की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया। गुरिल्ला युद्ध के अविष्कारक : कहते हैं कि छत्रपति शिवाजी ने ही भारत में पहली बार गुरिल्ला युद्ध का आरम्भ किया था। उनकी इस युद्ध नीती से प्रेरित होकर ही वियतनामियों ने अमेरिका से जंगल जीत ली थी। इस युद्ध का उल्लेख उस काल में रचित 'शिव सूत्र' में मिलता है। गोरिल्ला युद्ध एक प्रकार का छापामार युद्ध। मोटे तौर पर छापामार युद्ध अर्धसैनिकों की टुकड़ियों अथवा अनियमित सैनिकों द्वारा शत्रुसेना के पीछे या पार्श्व में आक्रमण करके लड़े जाते हैं। #शत शत नमन
सुशील मेहता
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रामकृष्ण परमहंस जयंती फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भारत के महान संत एवं विचारक रामकृष्ण परमहंस का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 15 मार्च को है। आज रामकृष्ण परमहंस की जयंती है। उनका बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था। पिता का नाम खुदीराम तथा माता का नाम चंद्रमणि देवी था। वे भारत के एक महान संत और विचारक थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। वे मानवता के पुजारी थे। हिन्दू, इस्लाम और ईसाई आदि सभी धर्मों पर उसकी श्रद्धा एक समान थी, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने बारी-बारी सबकी साधना करके एक ही परम-सत्य का साक्षात्कार किया था। अपने बचपन से ही उन्हें विश्वास था कि भगवान के दर्शन हो सकते हैं, अतः भगवान प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर साधना और भक्ति की तथा सादगीपूर्ण जीवन बिताया। अपने जीवन में उन्होंने स्कूल के कभी दर्शन नहीं किए थे। उन्हें न तो अंग्रेजी आती थी, न वे संस्कृत के जानकार थे। वे तो सिर्फ मां काली के भक्त थे। उनकी सारी पूंजी महाकाली का नाम-स्मरण मात्र था। माना जाता है कि उनके माता-पिता को उनके जन्म से पहले ही अलौकिक घटनाओं का अनुभव हुआ था। उनके पिता को एक रात दृष्टांत हुआ, जिसमें उन्होंने देखा कि भगवान गदाधर ने स्वप्न में उनसे कहा था कि वे विष्णु अवतार के रूप में उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे तथा माता चंद्रमणि को भी ऐसे ही एक दृष्टांत का अनुभव हुआ था, जिसमें उन्होंने शिव मंदिर में अपने गर्भ में एक रोशनी को प्रवेश करते हुए देखा था। #शत शत नमन
SUNIL OJHA
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सुशील मेहता
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राष्ट्रीय महिला दिवस National Women's Day भारत में हर साल 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री सरोजिनी नायडू के सम्मान में 13 फरवरी को उनको जयंती पर भारत में राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल मनाया जाता है। 'नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' और 'भारत कोकिला' के नाम से मशहूर सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था। सरोजिनी नायडू की 135वीं जयंती के अवसर पर 13 फरवरी 2014 से देश में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की गई है। आज सरोजिनी नायडू की 142वीं जयंती है। सरोजिनी नायडू ने देश की स्वतंत्रता के लिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में हुआ था। इनके पिता का नाम अघोरनाथ चट्टोपाध्याय था, जो कि नामी विद्वान थे। इनकी मां भी एक कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। बचपन से ही सरोजिनी नायडू काफी तेज थीं, जिसकी वजह से उन्होंने सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी और 14 वर्ष की उम्र में सभी अंग्रेजी कवियों की रचनाओं का अध्ययन कर लिया था। - सरोजिनी नायडू ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। सरोजिनी नायडू साल 1914 में पहली बार महात्मा गांधी से मिलीं और देश के लिए खुद को समर्पित करने की बात उनसे की। - सरोजिनी नायडू साल 1925 में कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष बनीं। सरोजिनी नायडू को 1928 में ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में प्लेग महामारी के दौरान अपने कार्यों के लिए कैसर-ए-हिंद से सम्मानित किया गया था। #शत शत नमन
सुशील मेहता
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राष्ट्रीय समर्पण दिवस 11 फरवरी को भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि है। इस दिन को भाजपा ने समर्पण दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया है। मशहूर विचारक और दार्शनिक पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा में हुआ था। पंडित दीनदयाल जब अपनी स्नातक स्तर की शिक्षा ले रहे थे, उसी समय वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपर्क में आए। वह आरएसएस के प्रचारक बन गए। हालांकि प्रचारक बनने से पहले उन्होंने 1939 और 1942 में संघ की शिक्षा का प्रशिक्षण भी हासिल किया था। इस प्रशिक्षण के बाद ही उन्हें प्रचारक बनाया गया था। साल 1951 में भारतीय जनसंघ की नींव रखी गई थी। बाद में यह राजनैतिक के रूप में उभरी। इस पार्टी को बनाने का पूरा कार्य उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर किया था। 11 फरवरी 1968 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु हो गई थी। #शत शत नमन
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