कबीर g

कबीर परमेश्वर
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5 days ago
##किसको_मिले_कबीरभगवान #kabir #जगतके_उद्धारक_संतरामपालजी वैश्विक शांति का प्रयास संत रामपाल जी महाराज द्वारा वसुधैव कुटुंबकम (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) की भावना के साथ, पूरे विश्व में शांति, दया और परोपकार का संदेश फैलाया जा रहा है ताकि एक संघर्ष-मुक्त वैश्विक समाज का निर्माण हो सके। Visit Sa News YouTube
Jaswant Dass
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14 days ago
#GodMorningSunday #शराब_पीना_महापाप . #शब्द ऐसा कोई ना मिला, समुझै सैन सुजान.......। ढोल बाजता ना सुनै, सुरति-बिहूना कान....।। ऐसा कोई ना मिला, हम को देइ पहिचान.....। अपना करि किरपा करै, ले उतार मैदान......।। हम देखत जग जात है, जग देखत हम जाहिं। ऐसा कोई ना मिला, पकरि छुड़ावै बाहिं......।। प्रेमी ढूँढत मैं फिरौं, प्रेमी मिले न कोय.........। प्रेमी से प्रेमी मिले, विष से अमृत होय.........।। सिश तो ऐसा चाहिये, गुरु को सब कुछ देय...। गुरु तो ऐसा चाहिये, सिश से कछु न लेय.....।। हेरत हेरत हेरिया, रहा कबीर हिराय.............। बुंद समानी समुंद में, सो कित हेरी जाय.......।। हेरत हेरत हे सखी, रहा कबीर हिराय.........। समुंद समाना बुंद में, सो कित हेरा जाय.....।। Sa True Story YouTube #कबीर
Jaswant Dass
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21 days ago
#GodNightSaturday #महर्षिदयानंदसरस्वती_कीसच्चाई . परमात्मा का तत्त्वज्ञान तुरा न तीखा कूदना पुरूष नहीं रणधीर। नहीं पदमनी नगर में या मोटी तकसीर।। कबीर जी ने बताया है कि हे गरीबदास! जिस नगर व देश में तुरा अथार्त घोड़ा तेज दौड़ने व ऊँचा कूदने वाला नहीं है, और नागरिक रणधीर अथार्त शूरवीर नहीं हैं और जिस देश व नगर में पद्मनी यानि पतिव्रता स्त्री नहीं है तो यह मोटी तकसीर अथार्त बहुत बड़ी गलती है यानि कमी है। इस प्रकार का चरित्रावान स्त्री-पुरूष दोनों का होना अनिवार्य है। विवाह के पश्चात् ससुराल में कुछ लड़कियाँ सर्व श्रृंगार करती हैं। सज-धजकर गलियों से गुजरती हैं। अजीबो गरीब हरकत करती हैं। असहज लगने वाले भड़कीले चमकीले वस्त्र पहनकर बाजार या खेतों में या पानी लेने नल या कूँऐ पर जाती हैं। उनका उद्देश्य क्या होता है? स्पष्ट है कि अपने पति के अतिरिक्त अन्य पुरूषों को अपनी ओर आकर्षित करना। अपनी सुंदरता तथा वैभव का प्रदर्शन करना जो एक अच्छी बहू बेटी के लक्षण नहीं हैं। यदि कहें कि पति को प्रसन्न करने के लिए ऐसा करती हैं तो वे घर तक ही सीमित रहती तो अच्छा होता, परंतु ऐसे लक्षण मन में दोष के प्रतीक होते हैं। साधारण वस्त्र पहनने चाहिए, चाहे मंहगे हों, चाहे सस्ते। बहन-बेटी-बहू की नजर सामने 12 फुट तक रहनी चाहिए। चलते-बैठते, उठते समय ध्यान रखे कि कोई ऐसी गतिविधि न हो जाए जो किसी के लिए उत् प्रेरक हो। जैसे बहन-बेटी, बहू यानि युवती अपने परिजनों के साथ रहती है। ऐसा ही आचरण घर से बाहर होना चाहिए। उसकी प्रशंसा सभ्य समाज किया करता है। अन्य युवाओं को उसका उदाहरण बताते हैं। यदि पैट्रोल को चिंगारी नहीं मिलेगी तो वह विस्फोटक नहीं होता। Visit Sa News Channel #कबीर