विश्व रीफ जागरुकता दिवस

सुशील मेहता
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1 दिन पहले
अंतरराष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस सम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक वर्ष 01 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस’ अथवा ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस’ मनाया जाता है। यह दिवस सबसे पुराना अंतर्राष्ट्रीय उत्सव है जो 1950 से मनाया जा रहा है। रूस में अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस पहली बार सन 1949 में मनाया गया था। इसका निर्णय मॉस्को में अंतर्राष्ट्रीय महिला लोकतांत्रिक संघ की एक विशेष बैठक में किया गया था। 01 जून 1950 को दुनिया भर के 51 देशों में ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस’ पहली बार मनाया गया था। इसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। रूस में आज के दिन अनाथ, विकलांग और ग़रीब बच्चों की समस्याओं की ओर विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा जाता है। बच्चों को तोहफ़े दिए जाते हैं और उनके लिए विशेष समारोहों का आयोजन किया जाता है। सभी माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर परवरिश देने का दावा करते हैं। प्रायः माता-पिता जिस तरीके से बच्चों का पालन करते हैं, उन्हें लगता है हम बच्चों को सभी अधिकार दे रहे हैं। जबकि जाने-अनजाने में बच्चों के कई अधिकारों का हनन करते हैं। हर बच्चे को भोजन और सेहत के अधिकार के साथ ही खुशनुमा माहौल में रहने का और पूर्ण सुरक्षा पाने का भी अधिकार है। कई बार बच्चों के इन अधिकारों का हनन होता है और वे सब कुछ समझते हुए भी मन की बात कह नहीं पाते। बाल अधिकार देश के हर बच्चे को प्राप्त अधिकार हैं जिसमें उन्हें शि‍क्षा बच्चों को घर-परिवार के साथ समाज में रहने और स्वस्थ विकास के लिए दिए गए अधिकारों की जानकारी सभी को होना चाहिए। #जागरूकता दिवस
सुशील मेहता
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5 दिन पहले
विश्व भूख दिवस : विश्व भूख दिवस 28 मई को मनाया जाता है। यह दिन वैश्विक भूख संकट और कुपोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। यह दिन स्थायी खाद्य प्रणालियों और प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में भी कार्य करता है जो भूख और कुपोषण को कम करने में मदद कर सकते हैं । 1918 में स्थापित एक संगठन हंगर प्रोजेक्ट के अनुसार, भूख एक ऐसी स्थिति है जिसने समय की शुरुआत से ही मानवता को प्रभावित किया है। यह कुपोषण की एक पुरानी स्थिति है जो पर्याप्त भोजन तक पहुँच की कमी के कारण होती है। भूख मानव स्वास्थ्य पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकती है, जिससे विकास अवरुद्ध हो सकता है, प्रतिरक्षा कम हो सकती है और बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। आइए विश्व भूख दिवस 2024 की थीम, इतिहास, महत्व और इसे मनाने के तरीकों पर एक नज़र डालें। विश्व भूख दिवस का इतिहास 2011 से शुरू होता है, जब हंगर प्रोजेक्ट ने दुनिया भर में वंचित लोगों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी। इस दिन का उद्देश्य उन लाखों लोगों के संघर्षों के बारे में जागरूकता पैदा करना है, जिन्हें उचित पोषण नहीं मिल पाता है। यह सभी को एक साथ आने और दुनिया भर में भूख को खत्म करने के लिए कार्रवाई करने का आह्वान भी करता है । विश्व भूख दिवस एक गंभीर वैश्विक समस्या के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। यह भूख और कुपोषण के मुद्दे को संबोधित करने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता की याद दिलाता है। एक साथ काम करके, सरकारें, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और व्यक्ति भूख से पीड़ित लाखों लोगों के जीवन में बदलाव ला सकते हैं। विश्व भूख दिवस मनाने के तरीके विश्व भूख दिवस मनाने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका स्थानीय खाद्य बैंक में दान देना है। आप धन जुटाने, सोशल मीडिया प्रबंधन, या भोजन अभियान आयोजित करने में मदद करके भी खाद्य बैंक में अपना समय स्वेच्छा से दे सकते हैं। मदद करने का एक और बढ़िया तरीका है उस दिन के बारे में जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करना। भूख के मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाकर, आप लोगों को संगठित करने में मदद कर सकते हैं और उन्हें भूख से संघर्ष कर रहे लोगों की सहायता के लिए कार्रवाई करने हेतु प्रोत्साहित कर सकते हैं। आप लोगों को खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली नीतियों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और अपने स्वयं के खाद्य अपव्यय को कम करने के लिए व्यक्तिगत प्रतिबद्धता भी ले सकते हैं #जागरूकता दिवस
सुशील मेहता
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5 दिन पहले
अंतरराष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य दिवस हर साल 28 मई को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य दिवस (International Women's Health Day) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य महिलाओं को होने वाले रोगों और उनसे बचाव के बारे में जागरूकता फैलाना है। महिलाओं को पुरुषों की तुलना में बीमारियों का अधिक जोखिम होता है। महिलाओं को होने वाली 8 कॉमन डिजीज क्या हैं? अगर बात करें महिलाओं को होने वाली बीमारियों की तो उन्हें सबसे ज्यादा हार्ट डिजीज, ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर, गाइनोलॉजिकल डिजीज, प्रेगनेंसी डिजीज, ऑटोइम्यून डिजीज, डिप्रेशन और चिंता आदि का अधिक खतरा होता है। महिलाओं में खून की की कमी यानी एनीमिया (Anemia) कमी एक बड़ी समस्या है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ( NFHS) के अनुसार, भारत में लगभग 55% महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं। इसका मतलब है कि हर दूसरी महिला खून की कमी से पीड़ित है। इस अवसर पर हम फैट टू स्लिम की डायरेक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट एंड डाइटीशियन शिखा अग्रवाल शर्मा आपको बता रही हैं कि इन समस्याओं से बचने के लिए आपका डाइट प्लान कैसा होना चाहिए। महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए रोजाना फलों का सेवन करना चाहिए। आप अनार, कीवी, अमरूद अनानास जैसे फलों को खा सकते हैं। इनकी शक्ति बढ़ाने के लिए आप इसमें दालचीनी, काला नमक और काली मिर्च का पाउडर डाल सकते हैं। इससे खून की कमी जैसी कई बीमारियों का खतरा कम होता है। #जागरूकता दिवस
सुशील मेहता
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10 दिन पहले
23 मई को विश्व कछुआ दिवस (World Turtle Day) के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य विश्व में कछुओं की कम होती संख्या के प्रति जागरूकता फैलाना और उनके आवासों की रक्षा करना, उनके पुनर्वास की व्यवस्था तथा उनका बचाव (rescue) करना है । कछुओं की प्रजाति विश्व की सबसे पुरानी जीवित प्रजातियों में से एक है । ये लगभग 200 मिलियन वर्ष पुरानी प्रजाति है और चिड़ियों ,सांपों और छिपकलियों से भी पहले धरती पर अस्तित्व में आ चुकी थी। पारितंत्र में कछुओं का अस्तित्व इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये एक स्वस्थ्य पर्यावरण के संकेतक माने जाते हैं । खाद्द्य श्रृंखला में इनका अहम स्थान है और पौधों व मछलियों की कई ऐसी प्रजातियाँ हैं जिनके नियंत्रण के लिए कछुओं का अस्तित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है ।आज विश्व में कछुओं की 300 से भी अधिक प्रजातियाँ हैं जिनमें से लगभग 130 IUCN के द्वारा संकटापन्न घोषित की गई हैं । भारत में कछुओं की 29 प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें 24 प्रजाति कच्छप अर्थात स्थलीय कछुए (tortoise) के एवं 5 प्रजाति कुर्म अर्थात समुद्री कछुओं (turtle) के हैं । इनमें से अधिकांश कछुए भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न अनुसूचियों के अन्तर्गत संरक्षित हैं। भारत में पाए जाने वाले समुद्री कछुओं की 5 प्रजातियाँ हैं :- ओलिव रिडले , लेदरबैक, लोगरहेड, हरित कछुए एवं हौक्सबिल । इनमें से प्रथम 3 IUCN के द्वारा असुरक्षित (‘Vulnerable’) घोषित किये गये हैं । हरित कछुए को विलुप्तप्राय (‘Endangered’) जबकि हौक्सबिल को गंभीर रूप से विलुप्तप्राय (‘Critically Endangered’) की श्रेणी में रखा गया है । यदि इनके संरक्षण का प्रयास नहीं किया गया तो जल्द ही ये प्रजातियाँ विलुप्त हो जाएंगी ।भारत में कछुओं को सबसे बड़ा नुकसान मछली पकड़ने वाली नौकाओं से होता है। बड़े आकार के कछुए अक्सर मछली के जाल में फंस जाते हैं और घायल होकर दम तोड़ देते हैं । कछुओं को दूसरा खतरा तस्करी से है । कई बार अंधविश्वास के कारण भी इनका व्यापार अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में किया जाता है क्योंकि लोग कछुओं को घर में रखना शुभ मानते हैं । प्लास्टिक प्रदूषण ऐसी हालिया समस्या है जो न केवल जलीय जीवों बल्कि समस्त पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा है । खाद्य श्रृंखला के जरीय प्लास्टिक के सूक्ष्म कण जलीय जीवों के शरीर में पहुँच कर उनके विनाश का कारण बनते हैं जलीय क्षेत्रों के निरंतर बढ़ते अतिक्रमण और तथाकथित विकास की प्रक्रिया (जैसे बड़े बांधों का निर्माण) ने कछुओं के आवास का भी विनाश (habitat loss) किया है । रेत खनन एक अन्य समस्या है जो कछुओं के लिए घातक है | कछुए जलीय क्षेत्रों के किनारे रेत में अपने अंडे देते हैं और रेत खनन के कारण कई बार इन अण्डों का नाश हो जाता है । जलवायु परिवर्तन के कारण भी कछुओं की कई प्रजातियाँ अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्षरत हैं । #जागरूकता दिवस
सुशील मेहता
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11 दिन पहले
अंतरराष्ट्रीय जैविक विविधता दिवस International Day for Biological Diversity 2021: आज अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस है। यह हर साल 22 मई को दुनियाभर में एक साथ मनाया जाता है। इसे सबसे पहले साल 1993 में मनाया गया था। उस समय यह 29 दिसंबर को मनाया गया था। इसके बाद साल 2001 से यह हर साल 22 मई को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को जैव विविधता के प्रति जागरूक करना है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि हर साल 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस मनाया जाता है। इसकी पहल सबसे पहले 90 के दशक में की गई थी। जब संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में साल 1992 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में "पृथ्वी सम्मेलन" आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल दिया गया। इसके बाद साल 1993 को यह 29 दिसंबर को पहली बार जैव-विविधता दिवस मनाया गया था। इसके बाद लगातार साल 2000 तक यह 29 दिसंबर को मनाया गया था। साल 2001 से यह साल 22 मई को मनाया जाता है। आधुनिक समय में जैव-विविधता विषय पर ध्यान देने की जरूरत है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते पर्यावरण में विशेष बदलाव हुआ है। इसके लिए पर्यावरण संरक्षण पर बल दिया जा रहा है। एक रिपोर्ट की मानें तो आने वाले समय में पौधों और जानवरों प्रजाति में से 25 फीसदी विलुप्त अवस्था में है। इसके लिए IPBES ने पर्यावरण संरक्षण की सलाह दी है। साथ ही पर्यावरण संतुलन के लिए जानवरों का संरक्षण भी जरूरी है। इसके लिए संय़ुक्त राष्ट्र प्रयत्नशील है। दुनियाभर में पर्यावरण संरक्षण के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। #जागरूकता दिवस
सुशील मेहता
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12 दिन पहले
विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस संवाद और विकास के लिए विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस (World Day for Cultural Diversity for Dialogue and Development) हर साल 21 मई को विश्व स्तर पर मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य दुनिया की संस्कृतियों की समृद्धि का जश्न मनाना तथा शांति और सतत विकास को प्राप्त करने के लिए समावेश और सकारात्मक परिवर्तन के एजेंट के रूप में इसकी विविधता के महत्व को उजागर करना है। वर्ष 2001 में, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने 2001 में अफगानिस्तान में बामियान की बुद्ध प्रतिमाओं के विनाश के परिणामस्वरूप 'सांस्कृतिक विविधता पर सार्वभौमिक घोषणा' को अपनाया. ​फिर दिसंबर 2002 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने अपने प्रस्ताव 57/249 में, 21 मई को संवाद और विकास के लिए सांस्कृतिक विविधता के लिए विश्व दिवस घोषित किया। दुनिया के सभी देशों की अपनी अलग भाषा, अलग परिधान और अलग-अलग सांस्कृतिक विशेषताएं हैं । हमारी भारतीय संस्कृति भी विविधता की परिचायक है । इतनी अधिक विविधताओं के बावजूद भी भारतीय संस्कृति में एकता की झलक दिखती है। दुनिया के सभी देशों की अपनी अलग भाषा, अलग परिधान और अलग-अलग सांस्कृतिक विशेषताएं हैं । हमारी भारतीय संस्कृति भी विविधता की परिचायक है । इतनी अधिक विविधताओं के बावजूद भी भारतीय संस्कृति में एकता की झलक दिखती है। इस दिन, यूनेस्को सांस्कृतिक वस्तुओं के वैश्विक आदान-प्रदान के बीच मौजूद असंतुलन से लड़ने की आवश्यकता पर जोर देता है, और विकासशील देशों में सांस्कृतिक नीतियों और संरचनात्मक उपायों की आवश्यकता के साथ-साथ दुनिया की सबसे कमजोर संस्कृतियों को संरक्षित करने के महत्व पर जोर देता है। यह भाषाओं में सांस्कृतिक विविधता के मूल्य के बारे में जागरूक होने के महत्व पर भी जोर देता है। #जागरूकता दिवस