पार्थिव शिवलिंग

sn vyas
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1 days ago
. *🏹 श्री रामेश्वर जी 🏹* *सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः।* *श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि॥* > जो भगवान श्रीराम द्वारा समुद्र और ताम्रपर्णी नदी के संगम पर असंख्य बाणों से सेतु बांधकर स्थापित किए गए हैं, उन रामेश्वर नामक शिव का मैं निरंतर नमन करता हूँ। * *द्वादश ज्योतिर्लिंगों की गणना में सेतबन्ध-रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का `ग्यारहवाँ स्थान` है। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना हमारे प्रभु भगवान् श्रीरामचन्द्रजी के कर-कमलों द्वारा हुई थी। यह तमिलनाडु प्रान्त के रामनाथपुरम् जिले में स्थित है।* > श्रद्धेय गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्रीरामचरितमानसजी में लिखा है कि भगवान् श्रीरामजी ने समुद्र के तट पर श्रीरामेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्वयं शास्त्रविधि से स्थापना एवं पूजा की। इसलिये इस ज्योतिर्लिंग की विशेष महिमा है। भगवान् श्रीरामजी ने स्वयं अपने मुख से इसका गुणगान करते हुए कहा है - *जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं । ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं॥* *जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि । सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि ॥* *होइ अकाम जो छल तजि सेइहि । भगति मोरि तेहि संकर देइहि ।* *मम कृत सेतु जो दरसनु करिही । सो बिनु श्रम भवसागर तरिही ॥* (श्रीरामचरितमानस ६/२/१-४) > *भगवान् रामेश्वर सदा भोग और मोक्ष देनेवाले तथा भक्तों की इच्छा पूर्ण करनेवाले हैं। जो दिव्य गंगाजल से श्रीरामेश्वर शिव जी को भक्तिपूर्वक स्नान कराता है, वह जीवन्मुक्त हो जाता है। इस संसार में देवदुर्लभ समस्त भोगों का उपभोग करके अन्त में उत्तम ज्ञान पाकर वह निश्चय ही कैवल्य मोक्ष को प्राप्त कर लेता है ।* * स्कन्दपुराण के ब्राह्मखण्ड में सेतु-माहात्म्य-वर्णन प्रसङ्ग में यहाँ तक कहा गया है कि श्रीरामेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन करनेवाले पुरुष के दर्शनमात्र से दूसरे प्राणियों का पाप तत्काल नष्ट हो जाता है। जो प्रातःकाल उठकर तीन बार रामनाथ (रामेश्वर) शब्द का उच्चारण करता है, उसका पहले दिन का पाप तत्काल नष्ट हो जाता है। यदि प्राणत्याग के समय भगवान् रामेश्वर का स्मरण करे, तो फिर उसका पुनर्जन्म नहीं होता । *'रामनाथ ! महादेव ! करुणानिधे! सदा मेरी रक्षा कीजिये।'* इस प्रकार जो सदा उच्चारण करता है, वह कलियुग से पीड़ित नहीं होता - *रामनाथ महादेव मां रक्ष करुणानिधे ।* *इति यः सततं ब्रूयात् कलिनासौ न बाध्यते ॥* *हर हर महादेव 👏🏻* *जय जय सियाराम 🙏🏻🚩* #श्री रामेश्वरम शिवलिंग #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱बम बम भोले🙏 #🔱हर हर महादेव #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏
K S Supyal
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2 days ago
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Rameswaram, located in Tamil Nadu (India), is one of the holiest pilgrimage destinations in India. The Ramanathaswamy Temple is home to Ramanathaswamy Jyotirlinga, one of the twelve sacred Jyotirlingas of Lord Shiva.ॐ श्री रामेश्वराय नमः🚩 #शुभ_प्रभात #🌞 Good Morn!ng #सुप्रभात #शुभ गुरुवार #श्री रामेश्वरम शिवलिंग
sn vyas
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4 days ago
#शिवलिंग दर्शन #शिवलिंग #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #😇सोमवार भक्ति स्पेशल🌟 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से क्या फल मिलता है? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ 👉 शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। 👉 शिवलिंग पर दही अर्पित करने से हमें जीवन में हर्ष और उल्लास की प्राप्ति होती है। 👉 शिवलिंग पर शहद चडाने से रूप और सौंदर्य प्राप्त होता है , वाणी में मिठास रहती है, समाज में लोकप्रियता बढ़ती है। 👉 शिवलिंग पर घी चढ़ाने से हमें तेज की प्राप्ति होती है। 👉 शिवलिंग पर शकर चढ़ाने से सुख - समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 👉 शिवलिंग पर ईत्र चढ़ाने से धर्म की प्राप्ति होती हैं। 👉 शिवलिंग पर सुगंधित तेल चढ़ाने से धन धान्य की वृद्धि होती है, जीवन में सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। 👉 शिवलिंग पर चंदन चढ़ाने से समाज में यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। 👉 शिवलिंग पर केशर अर्पित करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है , विवाह में आने वाली समस्त अड़चने दूर होती है, मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होता है विवाह के योग शीघ्र बनते है । 👉 शिवलिंग पर भांग चढ़ाने से हमारे समस्त पाप समस्त बुराइयां दूर होती हैं। 👉 शिवलिंग पर आँवला अथवा आँवले का ऱस चढ़ाने से दीर्घ आयु प्राप्त होती है । 👉 शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से समस्त पारिवारिक सुखो की प्राप्ति होती है , परिवार के सदस्यों के मध्य में प्रेम बना रहता है। 👉 शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से वंश वृद्धि होती है, योग्य संतान की प्राप्ति होती है, संतान आज्ञाकारी होती है। 👉 शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से धन और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। 👉 शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पापों समस्त रोगो का नाश होता है। 👉 शिवलिंग पर जौ अर्पित करने से सांसारिक सुखो की प्राप्ति होती है। 👉 भगवान भोलेनाथ की बेलपत्र से पूजा करने से सभी संकट दूर होते है। 👉 भगवान भोलेनाथ की दूर्वा से पूजन करने दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है। 👉 भगवान भोलेनाथ की हारसिंगार के फूलों से पूजन करने पर जीवन में सुख-संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 👉 भगवान भोलेनाथ पर चमेली के फूल चढ़ाने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है। 👉 भगवान भोलेनाथ की धतूरे से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है। 👉 भगवान भोलेनाथ की आंकड़े के फूल से पूजन, श्रंगार करने से जीवन के सभी सुख मिलते है, पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 👉 भगवान भोलेनाथ की अलसी के फूलों से पूजन करने से मनुष्य सभी देवताओं का प्रिय हो जाता है। 👉 भगवान भोलेनाथ की बेला के फूल से पूजन करने पर मनचाहा, सुंदर जीवनसाथी मिलता है। 👉 भगवान भोलेनाथ की जूही के फूल से पूजन करने से घर कारोबार में धन धान्य की कोई भी कमी नहीं होती है। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
sn vyas
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5 days ago
#श्री रामेश्वरम शिवलिंग #जय श्री राम #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #😇सोमवार भक्ति स्पेशल🌟 #🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 🌺 रामेश्वरम के 22 कुओं के जल में छिपा है कौन-सा रहस्य? 🌺 लंका का महायुद्ध समाप्त हो चुका था। रावण का वध हो गया था और माता सीता की मुक्ति हो चुकी थी। लेकिन विजय के बाद भी प्रभु श्रीराम के सामने एक और समस्या सामने आई। युद्धभूमि में असंख्य वानर सैनिक घायल हुए थे। किसी के शरीर पर बाणों के घाव थे, किसी को गदा के प्रहार लगे थे, तो कोई थकान और प्यास से व्याकुल था। लंका से लौटते समय जब प्रभु श्रीराम रामेश्वरम की पवित्र भूमि पर पहुँचे, तब घायल वानर सेना के लिए निर्मल जल की आवश्यकता हुई। चारों ओर समुद्र था, लेकिन समुद्र का जल खारा था। रामेश्वरम की प्रचलित महात्म्य-कथा के अनुसार, श्रीराम ने अपना धनुष उठाया और अपने तूणीर से 22 बाण निकाले तथा भूमि में एक के बाद एक बाण चलाए। बाणों से धरती विदीर्ण हुई और वहाँ से निर्मल जल की धाराएँ फूट पड़ीं। यही पवित्र जल आगे चलकर रामेश्वरम के 22 तीर्थ-कूपों से जुड़ गया। लेकिन आश्चर्य यहीं समाप्त नहीं हुआ। समुद्र के इतने निकट होने के बावजूद, एक ही मंदिर परिसर में स्थित इन 22 कुओं के जल का स्वाद एक जैसा नहीं है। किसी कुएँ का जल मीठा लगता है, किसी का स्वाद अलग, तो किसी के जल का स्वाद बिल्कुल भिन्न अनुभव होता है। यही विविधता रामेश्वरम के 22 तीर्थ-कूपों का एक अद्भुत रहस्य मानी जाती है। धार्मिक परंपरा में प्रत्येक तीर्थ का अपना अलग महात्म्य माना जाता है। 1. महालक्ष्मी तीर्थम् — धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की कृपा से जुड़ा माना जाता है। 2. सावित्री तीर्थम् — पवित्रता और शुभता की धार्मिक मान्यता से जुड़ा है। 3. गायत्री तीर्थम् — ज्ञान, आध्यात्मिक चेतना और मन की शुद्धि से जुड़ा माना जाता है। 4. सरस्वती तीर्थम् — विद्या, बुद्धि और ज्ञान की कृपा का प्रतीक माना जाता है। 5. चक्र तीर्थम् — भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र की पवित्र स्मृति से जुड़ा माना जाता है। 6. सेतुमाधव तीर्थम् — भगवान विष्णु के सेतुमाधव स्वरूप और पवित्रता से जुड़ा माना जाता है। 7. नल तीर्थम् — रामसेतु के निर्माण में नल की भूमिका की स्मृति से जुड़ा पवित्र तीर्थ माना जाता है। 8. नील तीर्थम् — रामसेतु निर्माण से जुड़े नील की स्मृति से संबंधित माना जाता है। 9. गवय तीर्थम् — वानर योद्धा गवय की पवित्र स्मृति से जुड़ा माना जाता है। 10. कवच तीर्थम् — रक्षा और सुरक्षा के आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में माना जाता है। 11. गंधमादन तीर्थम् — गंधमादन पर्वत और रामायण की पवित्र स्मृतियों से जुड़ा माना जाता है। 12. ब्रह्महत्या विमोचन तीर्थम् — गंभीर पापों से मुक्ति के धार्मिक महात्म्य से जुड़ा माना जाता है। 13. सूर्य तीर्थम् — सूर्यदेव के तेज, ऊर्जा और प्रकाश से जुड़ा माना जाता है। 14. चंद्र तीर्थम् — शांति, शीतलता और मन की स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। 15. सत्यामृत तीर्थम् — सत्य और पवित्रता की धार्मिक भावना से जुड़ा माना जाता है। 16. शिव तीर्थम् — भगवान शिव की कृपा और पवित्रता से संबंधित माना जाता है। 17. सर्व तीर्थम् — अनेक पवित्र तीर्थों के पुण्य की भावना से जुड़ा माना जाता है। 18. शंख तीर्थम् — शंख की पवित्रता और शुभता से संबंधित माना जाता है। 19. गया तीर्थम् — गया क्षेत्र और पितरों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों की स्मृति से संबंधित माना जाता है। 20. गंगा तीर्थम् — माँ गंगा की पवित्रता और आत्मशुद्धि की भावना से जुड़ा माना जाता है। 21. यमुना तीर्थम् — माँ यमुना की पवित्रता और मंगल की धार्मिक मान्यता से जुड़ा है। 22. कोटि तीर्थम् — 22 तीर्थ-कूपों में अंतिम और अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। इन 22 तीर्थ-कूपों का जल रामेश्वरम की आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्त श्रद्धा से इन पवित्र जलों का स्पर्श और स्नान करते हैं तथा इन्हें मन और शरीर की शुद्धि से जोड़ते हैं। और घायल वानर सेना से जुड़ी प्रचलित कथा में कहा जाता है कि इन पवित्र जलों के स्पर्श और सेवन से उनकी थकान और पीड़ा में राहत मिली। यह कथा आज भी रामेश्वरम की धार्मिक परंपरा और लोकविश्वास में श्रद्धा के साथ सुनाई जाती है। आज भी भक्त समुद्र तट स्थित अग्नि तीर्थम् में स्नान करने के बाद रामनाथस्वामी मंदिर में स्थित 22 पवित्र तीर्थ-कूपों के जल का आशीर्वाद ग्रहण करते हैं। एक ही मंदिर परिसर में 22 कुएँ— 22 पवित्र तीर्थ, 22 अलग-अलग महात्म्य और जल के स्वाद में अद्भुत विविधता! रामेश्वरम इसलिए केवल एक मंदिर नहीं है—यह प्रभु श्रीराम की स्मृति, भगवान महादेव की महिमा और 22 पवित्र तीर्थों की जीवंत आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत संगम है। 🚩 जय श्रीराम। 🔱 हर हर महादेव
💕V.I.P.jatin Narang 🐅
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5 days ago
काल हर, कष्ट हर, दुख हर, दरिद्र हर, सर्व रोग हर, सर्व पाप हर, नमः पार्वती पतये, हर हर महादेव" #bhole #sawanspecial #shiv #शिवलिंग #शिवलिंग दर्शन