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#श्रीमद भगवद्गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
श्रीमद भगवद्गीता - ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः | प्रणम्य   शिरसा देवं   कृताञ्जलिरभाषत II आश्चर्यंसे ೩ उसके चकित 37 अनन्तर पुलकितशरीर अर्जुन प्रकाशमय विश्वरूप परमात्माको श्रद्धा - भक्तिसहित সিমে करके प्रणाम 14 जोड़कर   बोले - Il १४II अर्जुन उवाच देहे पश्यामि देवांस्तव देव भूतविशेषसङ्घान्। सर्वांस्तथा ಇಷಗೆನೆ कमलासनस्थ= मृषींश्च सर्वांनुरगांश्च दिव्यान्।। अर्जुन चोले - हे देव ! मैेँ आपके शरौरमें सम्पूर्ण समुदायोंको , कमलके देवोंको तथा अनेक भूतौंके आसनपर विराजित त्रह्माको , महादेवको और सम्पूर्ण ऋषियौंको तथा दिव्य सर्पोंको देखता हूँ Il १५ II अनेकबाहूदरवक्रनेत्रं - पश्यामि त्वां सर्वतोउनन्तरूपम्। ಶಾಕೆ- नान्तं न मध्यं न faga   faaaq Il पश्यामि हे सम्पूर्ण विश्वके स्वामिन् ! आपको अनेक भुजा, पैट, मुख और नैत्रोंसे युक्त तथा सव ओरसे अनन्त रूपॉवाला देखता हूँ। हे विश्वरूप ! मैँ आपके न अन्तको  देखता हूँ॰ न मध्यको और न आदिको ही Il १६ ।l श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः | प्रणम्य   शिरसा देवं   कृताञ्जलिरभाषत II आश्चर्यंसे ೩ उसके चकित 37 अनन्तर पुलकितशरीर अर्जुन प्रकाशमय विश्वरूप परमात्माको श्रद्धा - भक्तिसहित সিমে करके प्रणाम 14 जोड़कर   बोले - Il १४II अर्जुन उवाच देहे पश्यामि देवांस्तव देव भूतविशेषसङ्घान्। सर्वांस्तथा ಇಷಗೆನೆ कमलासनस्थ= मृषींश्च सर्वांनुरगांश्च दिव्यान्।। अर्जुन चोले - हे देव ! मैेँ आपके शरौरमें सम्पूर्ण समुदायोंको , कमलके देवोंको तथा अनेक भूतौंके आसनपर विराजित त्रह्माको , महादेवको और सम्पूर्ण ऋषियौंको तथा दिव्य सर्पोंको देखता हूँ Il १५ II अनेकबाहूदरवक्रनेत्रं - पश्यामि त्वां सर्वतोउनन्तरूपम्। ಶಾಕೆ- नान्तं न मध्यं न faga   faaaq Il पश्यामि हे सम्पूर्ण विश्वके स्वामिन् ! आपको अनेक भुजा, पैट, मुख और नैत्रोंसे युक्त तथा सव ओरसे अनन्त रूपॉवाला देखता हूँ। हे विश्वरूप ! मैँ आपके न अन्तको  देखता हूँ॰ न मध्यको और न आदिको ही Il १६ ।l श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat