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jasbir - Author on ShareChat
jasbir
532 views • 6 days ago
#Eek Tu Hi Guru Ji
= [ছুEঙ্  GURO T0 {I JI गुरु जी, आपके उपदेशों को एकाग्र चित्त से सुनकर और आचरण में ढालकर ही हम अपने भीतर के मैं (अहंकार) को मिटा पाते हैं और अंततः उस परम सत्य परमात्मा से एकाकार हो जाते हैं। जिस भी सेवक को आप जैसे पूर्ण गुरु के 'नाम' की प्राप्ति होती है॰ उसकी दृष्टि खुल जाती है। वह यह गूढ़ रहस्य समझ लेता है कि घटघट में वही एक परमात्मा समाया हुआ है। गुरु जी, आपकी शरण में ईश्वरीय दृष्टि मिलती है, के सहारे जीव अहंकार मिटता है और आपके शबद' व থুক্ধান এমমোনা ম লীন ;ী আানা ট13ঁ नमः शिवाय गुरु जी सदा সঙ্ায d
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  • mamta goswami - Author on ShareChat
    mamta goswami 💓💓💖
    #mere Guru ji
    RAHy ' Mty इंसान का सब्र तब ट्ूट जाता है जब उसकी हजार कोशिशों के बादभी॰ उसका मनपसंद शख़्स उसकी कोई अहमियत नहीं समझता RAHy ' Mty इंसान का सब्र तब ट्ूट जाता है जब उसकी हजार कोशिशों के बादभी॰ उसका मनपसंद शख़्स उसकी कोई अहमियत नहीं समझता
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    @ GURU EerTU HI 10 पुत्तर , इस संसार में तुम मूलतः अकेले ही आए हो और अकेले ही जाओगे , इसलिए अपने अकेलेपन को स्वीकार भीतर ' भीड़ ' में रहो या परिवार में॰ करो। सदा यह स्मरण रखो कि तुम्हारा कोई संगी नहीं है। रिश्ते केवल भुलावे हैं, सत्य केवल ' तुम्हारा एकांत हैl सच्चे संन्यासी वही हैं जो अकेलेपन से भागते नहीं, बल्कि स्वयं में डूबकर आनंद पाते हैं। संसार को जानने से पहले स्वयं को जानो , क्योंकि आत्म ्ज्ञान ही परम सत्य है। जब तुम मौन होकर भीतर उतरोगे , तो विचारों की जड़ें कटने लगेंगी। सूखे पत्तों की तरह सारे विचार एक दिन झड जाएंगे मुक्ति का मार्ग बनेगा| और यही ' तुम्हारी ' नमः शिवाय, शिव जी सदा सहाय
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Eek Tu Hi Tu Gurutji को तो धर्म, ज्ञान और भलाई का उपदेश देता पुत्तर जो व्यक्ति दूसरों लेकिन स्वयं उन बातों पर अमल नहीं करता। ऐसा मनुष्य कथनी पाता और और करनी के भेद के कारण आत्मिक शांति प्राप्त नहीं कर सांसारिक चक्कर में भटकता रहता जन्म मरण है जब तक आचरण में पुत्तर कोरा ज्ञान या केवल उपदेश देना মথ कहा जाए॰ पहले उसे स्वयं जिया जाए॰. समाज पवित्रता न हो। जो को ज्ञान बांटना सरल है, पर अपने मन को वश में करना और उस सत्य पर चलना ही वास्तविक साधना है। बिना आचरण के ज्ञान केवल अहंकार को बढ़ाता है।आत्मिक मुक्ति और मन की सच्ची शांति केवल अनुरूप सच्चा और जिनका जीवन उनके वचनों उन्हीं को मिलती निष्कपट होता है। ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय @
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    4 ٢٩٥٥ ٥ ٥٥ ٥ (సమస पुत्तर, रूह की आवाज़ शब्दों की मोहताज नहीं होती। वह भीतर की खामोशी से सच्चा प्रेम शोर नेहींध ्मचाता पुकार जितनी शांत होगी, उतनी ही पुकारता है। तुम्हारी गहरी होगी और रब उसी मौन में मिलता है। परमात्मा से प्रेम का मतलब किसी को बाहर ढूँढना नहीं, बल्कि खुद को अपने भीतर पा लेना है। जहाँ पाने की बेचैनी खत्म होकर सब्र और शुकराना आ जाए॰ वहीं तुम्हारा प्रेम एक सच्ची प्रार्थना बन जाता है, अपने भीतर अंगन्संग है..!! ऊँ नमः 5R उतरो, परमात्मा सदा शिवाय, शिव जी सदा सहाय 4
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    031 Trer लम a - Eek Tu Hi Tu Guru Ji पुत्तर तुम ज़रा अपने भीतर झांक कर देखो, तुम्हारे मन में चलने वाले निन्यानबे मिमूल कौपचिक्ल तुग़ प्रतिशत विचार पूरी तरह व्यर्थ हैं। याद रखो, इस भी नहीं चिंता तुम्हारी मिलता। हर फालतू सोच, व्यर्थ की गपशप और फिजूल अनमोल जीवन ऊर्जा को सोख रही है। एक व्यर्थ विचार के बदले भी छुम हो हिस्सा ' हो। जैसे किसी बर्तन में ' अपने जीवन का एक कीमती ஈகி 3 गंवा तो सारा जल बह जाता है॰ वैसे ही आदतों से तुम्हारी आत्मा की शक्ति क्षीण हा रही है। संयम का सच्चा अर्थ किसी चीज़ को ज़बरदस्ती छोड़ना नहीं, बल्कि व्यर्थ को छांट देना है। व्यर्थ देखना , व्यर्थ सुनना और व्यर्थ बोलना बंद करो। अपनी ऊर्जा को इस तरह बाहर मत लुटाओ। इस ऊर्जा को बचाओ , भीतर समेटो और केवल परमात्मा के सुमिरन व आत्म कल्याण के मार्ग पर लगाओ। जीवन तभी सार्थक होगा जब तुम अनिवार्य के साथ जीना सीख लोगे।
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Eek Tu Hi Tu Guru Ji पुत्तर, जो सब्र के साथ इंतज़ार करना सीख जाते हैं, उनके पास हर चीज़ पहुँच जाती है। जो जल्दबाज़ी करता है, वो खो देता है; जो सब्र करता है॰ उसे सब मिल जाता हैl कभी जिस चीज़ को वो सुकून " बनकर मिलती है। जिसे तुम प्रेम समझकर माँग रहे थे, तुम पैसा समझ रहे थे, वो सेहत बनकर मिलती है। हम रूप पर अटके रहते हैं, परमात्मा अर्थ देता है परमात्मा तौल कर देता है, पक्षपात नहीं करता। उसका तराज़ू कहीं ज़्यादा सच्चा है। हम सोचते हैं कि उसने हमें कम గT ' दिया, पर वो हक़ से देता है, लालच से नहीं। जिसके हाथ जितने बड़े होते हैं उसे उतना ही देता है छोटे हाथों में समंदर नहीं दिया जाता पुत्तर, छलक जाएगा। और बड़े दिल वाले को वो कम भी देः तो वो बहुत ज़्यादा बन जाता है। सब्र किया नहीं जाता, सब्र सधता है; और जब सध जाता है॰ तो इंतज़ार बोझ नहीं लगता, पूजा लगने लगती है। नमः शिवाय , शिव जी सदा सहाय फ
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    HI Tu GuRu JI [BE Tu जाता है, पर श्वास   चल रहे होते पुत्तर, जरा ठहरकर देख... तू सो है। तूने कब हुक्म दिया अपने दिल को कि अब धड़कःवह भी बिना तेरे हुकम के चल रहा होता है। तेरा मैं कहता है कि मैं चला रहा हूँ तो यह है कि उस मालिक की रहमत तुझे चला रही है। श्वास परसच तेरी मिल्कियत नहीं, धड़कन तेरी कमाई नहीं; यह तो उसका दिया हुआ प्रसाद है।पुत्तर उसे दूर आकाश में मत ढूँढ, वो तेरे भीतर बैठा है। जैसे बिजली नहीं दिखती पर बल्ब जलता है, वैसे ही वो अदृश्य होकर तेरी हर धड़कन में जी रहा है। वही चलाने वाला है, और वही यह जीवन है। जिस दिन तूने कर्ता होने का भरम छोड़ दिया, उस में बदल जाएगी... और तेरी हर श्वास , दिन तेरी हर शिकायत शुक्राने ' परमात्मा का स्पर्श बन जाएगी। ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ७
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    (నిి HI TU @!)1[ EEK ப்9 पुत्तर, संसार में बहुत ्से मार्ग ' केवल बाहरी पहचान तुम्हें और नए बंधनों में उलझा सकते हैंl मैं तो मात्र एक दर्पण तुम्हारा ही असली रूप दिखाता है। मैं तुम्हें हूँ, जो గౌగ अपने व्यक्तित्व से बाँधने नहीं आया हूँ, बल्कि भीतर 3'6 के पुराने भ्रम और अहंकार को गिराने आया हूँ। किसी और की आँखों से देखने के बजाय, अपने भीतर सत्य का प्रत्यक्ष अनुभव करो। जब ध्यान में मन के विचार शांत होते हैं और मैं (अहंकार ) की पकड़ ढीली पड़ती है, तब भीतर वही परम शांति और परमात्मा की ज्योति प्रकट होती है। परमात्मा कहीं दूर नहीं बैठा। जब झूठी पहचानें मिटती हैं  तब यह बोध होता है मौजूद भीतर ही कि वह हर साँस और हर क्षण में 6R है। परमात्मा की यात्रा कहीं बाहर जाने की नहीं, बल्कि अपने ही मूल स्वरूप में लौट आने की यात्रा है। ऊँ नमः शिवाय , शिव जी सदा सहाय ७
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  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    GurU eek Tul JI HITu पुत्तर संसार की धन दौलत और साधन तुम्हें क्षणिक सुख दे सकते हैं पर आत्मा की असली तृप्ति केवल निष्काम प्रेम और नाम सिमरन से ही संभव है। सब कुछ पाकर भी भीतर जो खालीपन है, वह इसलिए है क्योंकि तुमने प्रेम को पाने की वस्तु समझ लिया, जबकि प्रेम  जीने की एक दिव्य अवस्था है। सच्चे प्रेम में तुम किसी से मांगने नहीं जाते , बल्कि प्रभु की कृपा से इतने भरपूर हो जाते हो कि तुम्हारे भीतर से केवल बांटना और सेवा करना ही बहता है। प्रेम तुम्हारे अहंकार की दीवारें गिरा देता है। जब मैं मिटता है, तब सबमें एक ही परमात्मा का नूर दिखाई देता है।पुत्तर असीम प्रेम के बिना मनुष्य संसार जीत कर भी अधूरा है। परमात्मा स्वयं प्रेम का अनंत सागर हैः जब तक उस सागर की एक बूंद भीतर नहीं उतरती, मन की बेचैनी कभी शांत नहीं हो सकती। इसलिए अपने भीतर प्रेम जगाओ , निस्वार्थ सेवा करो और उस परमात्मा के प्रेम सागर में लीन होकर अपने जीवन को सफल बनाओ।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा U6Tu 1
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