sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_३८/२
फल के उद्देश्य से कर्म मत करो:
💜💫💦🩸🍃🎈🌾🌻🌼🌞🔥
यह बात अत्यंत सूक्ष्म दृष्टि से समझने योग्य है
यदि धारणा अनुसार फल कम या बुरा मिला तो---
*(1) आपको मन में अत्यंत गिलानी होगी।*
*(2) आपका मन हिल जाएगा-- मन में खलबली मच जाएगी।*
*(3) ईश्वर के न्याय के प्रति आपके मन में शंका उत्पन्न होगी।*
*(4) मुझे कर्म करना ही नहीं आता , ऐसी हीन भावना उत्पन्न होगी।*
*(5) मै ईश्वर के समक्ष लाचार हूं , ऐसा भाव पैदा होगा।*
*(6) अब कर्म करने का कोई अर्थ नहीं है , ऐसी निराशा उत्पन्न होगी।*
*(7) और इससे कर्म का त्याग करने की मनोवृति जागेगी।*
*यदि कर्म का फल धारणा से कई गुना अच्छा मिला तो भी हानि होगी , जैसे कि --*
*(1) अपने कर्तव्य शक्ति के लिए अहंकार पैदा होगा।*
*(2) प्राप्त फल के लिए अभिमान पैदा होगा।*
*(3) मैं धारणा अनुसार कर्म करता हूं ऐसा गर्व होगा।*
*(4) भविष्य में होने वाले अन्य कर्मों में दक्षता नहीं रहेगी, घट जाएगी ।*
*इस प्रकार दोनों ही तरह से नुकसान होगा । कर्म फल दिए बिना नहीं रहेगा । किंतु वह फल भोगने में आप अपने मन का समत्व गवा देंगे , और भगवान ने गीता में कहा है कि--- " समत्वं योग उच्यते" अर्थात समत्व ही योग है । समत्व अर्थात मन का संतुलन। प्रसन्नता गवाना ही सबसे बड़ा नुकसान है।*
क्रमश: अब कल आगे पढेगे ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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