sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_३८/१
फल के उद्देश्य से कर्म मत करो:
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हम लोग कोई भी कर्म करते हैं तो उसके विशेष परिणाम को ध्यान में रखकर ही करते हैं। जब हमारी धारणा अनुसार परिणाम आता है तब हम वह कर्म "सफल " मानते हैं और जब धारणा अनुसार फल नहीं आता है तो हम उस कर्म को विफल मान लेते हैं ।
*किसी भी कर्म के दो ही परिणाम हो सकते हैं--- सफलता या विफलता । सच पूछिए तो कोई भी कर्म विफल नहीं होता है । जो भी कर्म किया जाता है , उसका फल तो मिलता ही है । इसलिए सभी कर्म सफल ही होते हैं । हां उनका फल अपनी धारणा के अनुसार ही हो इसकी कोई गारंटी नहीं होती है ।*
*आपकी धारणा अनुसार फल नहीं आया तो आप उसे विफल मान लेते हैं और यही आपकी गलती है । कोई भी कर्म विफल नहीं होता है ।*
*यदि आपकी धारणा के अनुसार फल नहीं आया है तो आपको उस कर्म में अथवा उस कर्म को करने की पद्धति में कोई दोष समझना चाहिए। फल तो ईश्वर के नियम अनुसार ही मिलता है , कर्म फल देने में कोई अन्याय या सिफारिश नहीं चलती ।*
*कर्म करने की शुरुआत में, कर्म करते समय और कर्म पूर्ण होने के बाद भी---*
*यदि आप केवल फल पर दृष्टि रखकर के ही कर्म करेंगे तो कर्म जितना उत्तम होना चाहिए , उतना उत्तम प्रकार का नहीं होगा । परिणाम स्वरूप उसका फल भी आपकी धारणा अनुसार नहीं आएगा ।*
*इसलिए भगवान ने गीता में आज्ञा दी है कि ---- मा कर्म फल हेतु: भु:।*
*यदि आप केवल कर्म के फल का उद्देश्य लक्ष्य मे रखकर कर्म करेंगे तो कर्म का जो फल आएगा , उससे आपको लाभ नहीं होगा । बल्कि उससे नुकसान हीं होगा ।*
*यह बात अत्यंत सूक्ष्म दृष्टि से समझने योग्य है*
क्रमश: कल आगे पढेगे ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
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