Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
अनिल साहू - Author on ShareChat
अनिल साहू
530 views • 1 days ago
#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
वास्तविक प्रार्थना का सच्चा स्वरूप मात्र शांति चाहता है, चिरशांति पर वह शांति है मानव कहाँ ? संसार में तो अशांति का ही साम्राज्य है शांति के भंडार केवल तो वही शक्तिपुंज सर्वेश्वर भगवान ही हैं।वे ही परम गति हैं और उनके पास पहुँचने के सत्य   हृदय सेकी गई लिए प्रार्थना ही पंखस्वरूप है उनके अक्षय भंडार से ही सुख-शांति की प्राप्ति होती है प्रार्थना कीजिए | अपने हृदय को खोल कर कीजिए সাই जिस रूप में कीजिए चाहे जहाँ एकांत में कीजिए अपनी टूटी- लड़खड़ाती भाषा में कीजिए, भगवान सर्वज्ञ हैं | वे तुरंत ही फूटी आप की तोतली बोली को समझ लेेंगे সান:ক্াল সাথনা कीजिए मध्याह्न में कीजिए संध्या को कीजिए सर्वत्र कीजिए और सभी अवस्थाओं में कीजिए। उचित तो यही है कि आप की प्रार्थना निरंतर होती रहे। यही नहीं आप का संपूर्ण " সীনন प्रार्थना- मय बन जाए प्रभु से माँगिए कुछ नहीं | वे तो सबके माँ- बाप हैं | सबकी आवश्यकताओं को वे खूब जानते हैं आप तो दृढ़ता से उनके मंगलविधान को सर्वथा स्वीकार कर लीजिए। उनकी इच्छा के साथ अपनी इच्छा को जोड़कर एकरूप कर दीजिए भगवान की हाँ में हाँ मिलाते रहिए॰ तभी सच्ची शांति का अनुभव कर सकोगे प्रतिकूल जब कभी जो भी परिस्थिति अनुकूल अथवा आ जाए, भगवान को धन्यवाद दीजिए और हृदय से कहिए- प्रभो ! मैं तो यही चाहता था। ज्योति नवंबर १९५९ पृष्ठ २७ २६५ अखण्ड
16 likes
12 shares

More like this

  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    जय सियाराम पूजहि प्रभुहि देव बहु वेषा | राम रूप दूसर नहीं देखा। अवलोके रघुपति  ೩೯ನ? / सीता सहित न वेष घनेरे II अनेकों वेष धारण करके देवता प्रभु राम की पूजा कर रहे हैं, परंतु राम का दूसरा रूप कहीं नहीं देखा। देखे, মীনা মমীন যুেনাথ बहुत-से परंतु उनके वेष अनेक नहीं थे। जय सियाराम पूजहि प्रभुहि देव बहु वेषा | राम रूप दूसर नहीं देखा। अवलोके रघुपति  ೩೯ನ? / सीता सहित न वेष घनेरे II अनेकों वेष धारण करके देवता प्रभु राम की पूजा कर रहे हैं, परंतु राम का दूसरा रूप कहीं नहीं देखा। देखे, মীনা মমীন যুেনাথ बहुत-से परंतु उनके वेष अनेक नहीं थे।
    1
    0
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    ज़िंदगी में जब बचपन के खेल खत्म हो जाते हैं, उसके बाद फिर किस्मत के खेल शुरू हो जाते हैं। शुभ रात्रि जय मां गायत्री ज़िंदगी में जब बचपन के खेल खत्म हो जाते हैं, उसके बाद फिर किस्मत के खेल शुरू हो जाते हैं। शुभ रात्रि जय मां गायत्री
    86
    20
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४ हरि शरणं जनकसुता जग जननि जानकी, अतिसय प्रिय करुनानिधान की, ताके जुग पद कमल मनावउँ, निरमल मति पावउँ कृपाँ जासु पुत्री, जगत् की माता और करुणा निधान श्री राजा जनक की रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्री जानकीजी के दोनों चरण कमलों को मैं मनाता हूँ॰ जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊँ श्रीरामचरितमानस, बालकांड १७/४
    79
    29
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    समाधि स्थल का दिव्य दर्शन युगतीर्थ शांतिकुंज, गायत्री तीर्थ हरिद्वार से 01.08.2026 युग -परिवर्तन का संकल्प किसी एक व्यत्ति की क्रांति से नहीं , हम सबके आत्म -निर्माण और सही दिशा में उठाए कदम से R' होगा। मनृष्य का जीवन विचित्र प्रकारकाम जीवन है॰ इसमें चह इतना नीचे गिर सकता है॰ कि पशु भी उससे उपर हो जाए.॰. और अपने आप को इतना ऊपर उठा ले॰ कि देवता भी उससे नीचे रह जाएं..! समाधि स्थल का दिव्य दर्शन युगतीर्थ शांतिकुंज, गायत्री तीर्थ हरिद्वार से 01.08.2026 युग -परिवर्तन का संकल्प किसी एक व्यत्ति की क्रांति से नहीं , हम सबके आत्म -निर्माण और सही दिशा में उठाए कदम से R' होगा। मनृष्य का जीवन विचित्र प्रकारकाम जीवन है॰ इसमें चह इतना नीचे गिर सकता है॰ कि पशु भी उससे उपर हो जाए.॰. और अपने आप को इतना ऊपर उठा ले॰ कि देवता भी उससे नीचे रह जाएं..!
    12
    18
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं !! I नियत सा़फ़ और मन में विश्वास हो, तो ईश्वर हर बंद दरवाज़े के पीछे एक नया रास्ता खोल देते हैं सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम हरि शरणं !! I नियत सा़फ़ और मन में विश्वास हो, तो ईश्वर हर बंद दरवाज़े के पीछे एक नया रास्ता खोल देते हैं सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम
    23
    24
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    33 श्रीहरि समूह प्रभु श्री राम जी की कृपा आप सभी पर बरसती रहे आप का दिवस शुभ व मंगलमय होः सुविचार  आज का C ৫১ ज्ञान बढ़ने पर यदि विनम्रता न बढ़े, तो वह ज्ञान केवल एक बोझ है। सूरेश जायसवाल देवास 33 श्रीहरि समूह प्रभु श्री राम जी की कृपा आप सभी पर बरसती रहे आप का दिवस शुभ व मंगलमय होः सुविचार  आज का C ৫১ ज्ञान बढ़ने पर यदि विनम्रता न बढ़े, तो वह ज्ञान केवल एक बोझ है। सूरेश जायसवाल देवास
    19
    8
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    हरि शरणं बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं जनम अनेक रचित अघ दहहीं सुमिरन जे नर करहीं सादर भव बारिधि गोपद इव तरहीं तुलसीदास जी कहते हैं कि अनजाने या मजबूरी में भी लिया गया राम   नाम जन्मों के पाप मिटा देता है॰ ऐसे में जो साधक पूर्ण श्रद्धा और प्रेम से লিব नाम-्जप करते हैं॰ उनके यह विशाल भवसागर गाय के खुर से बने छोटे से गड्ढे के समान सुगम होे जाता है और वे सहज ही मोक्ष पा लेते हैं। जय सियाराम
    15
    15
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। নিহীঠ নীনন ক महत्वपूर्ण सूत्र स्वस्थ जीवन ही सुखी जीवन की आधारशिला है। स्वास्थ्य सबसे बडा उपहार है॰ संतोष सबसे बड़ा धन है निरोग रहने के लिए अपनाएं ये सरल और प्रभावी सूत्र নিংবাম सबसे बड़ा संबंध है। पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य संतुलित सात्विक एवं नियमित व्यायाम और योग 2 36R ताजा, पौष्टिक, शुद्ध और हल्का भोजन करें ।  प्रतिदिन कम से कम ३० मिनट व्यायाम  अधिक तला-भुना , मसालेदार, पैकेजड योगासनों और प्राणायाम को दें।  रोगमुक्त " और बासी भोजन से बचें | यह शरीर को ऊर्जावान और रखता है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद  शुद्ध वायु और स्वच्छ पर्यावरण  3 प्रतिदिन ६ ७ घंटे की गहरी नींद लें। प्रातःकाल ताजी हवा में भ्रमण करें। में रहें और प्रदूषण रात में देर तक जागने की आदत स्वच्छ वातावरण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। #44/ पर्याप्त जल का सेवन मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच 5 चिंता , क्रोध, लोभ, मोह से दूर रहें। दिनभर में ८-१० गिलास स्वच्छ जल पिएं। जल शरीर से वियैले तत्वों को बाहर सकारात्मक विचार रखें, ध्यान और निकालता है और ऊर्जा बनाए रखता है। সাথনা কং | व्यसन से दूरी दिनचर्या में अनुशासन 8 नियमित समय पर उठना , भोजन करना , ননাকু; शराब. नशा और अन्य व्यसन शरीर को खोखला करते हैं, इनसे कार्य करना और सो्मा स्वस्थ जीवन सर्दैव दूर रहें।  का आधार है। में मधुरता " नियमित दिनचर्या में सूर्य और प्रकृति से जुड़ाव सेवा,  सहयोग और रिश्तों 10 सूर्य की रोशनी , प्रकृति का सानिध्य और सेवा , सहयोग , प्रेम और सद्वभावना से जीवन में सुख  धरती के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए मन प्रसन्न रहता है और शांति बनी रहती है। अत्यंत लाभकारी है। याद रखें संतुलित नियमित এযদ अधिक व्यसन सकारातक से दूर रहें। सोच आहार ٥١ जल स्वस्थ शरीर , शांत मन और उच्च विचार यही निरोग जीवन का आधार है। अखिल विश्व गायत्री परिवार स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। নিহীঠ নীনন ক महत्वपूर्ण सूत्र स्वस्थ जीवन ही सुखी जीवन की आधारशिला है। स्वास्थ्य सबसे बडा उपहार है॰ संतोष सबसे बड़ा धन है निरोग रहने के लिए अपनाएं ये सरल और प्रभावी सूत्र নিংবাম सबसे बड़ा संबंध है। पं॰ श्रीराम शर्मा आचार्य संतुलित सात्विक एवं नियमित व्यायाम और योग 2 36R ताजा, पौष्टिक, शुद्ध और हल्का भोजन करें ।  प्रतिदिन कम से कम ३० मिनट व्यायाम  अधिक तला-भुना , मसालेदार, पैकेजड योगासनों और प्राणायाम को दें।  रोगमुक्त " और बासी भोजन से बचें | यह शरीर को ऊर्जावान और रखता है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद  शुद्ध वायु और स्वच्छ पर्यावरण  3 प्रतिदिन ६ ७ घंटे की गहरी नींद लें। प्रातःकाल ताजी हवा में भ्रमण करें। में रहें और प्रदूषण रात में देर तक जागने की आदत स्वच्छ वातावरण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। #44/ पर्याप्त जल का सेवन मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच 5 चिंता , क्रोध, लोभ, मोह से दूर रहें। दिनभर में ८-१० गिलास स्वच्छ जल पिएं। जल शरीर से वियैले तत्वों को बाहर सकारात्मक विचार रखें, ध्यान और निकालता है और ऊर्जा बनाए रखता है। সাথনা কং | व्यसन से दूरी दिनचर्या में अनुशासन 8 नियमित समय पर उठना , भोजन करना , ননাকু; शराब. नशा और अन्य व्यसन शरीर को खोखला करते हैं, इनसे कार्य करना और सो्मा स्वस्थ जीवन सर्दैव दूर रहें।  का आधार है। में मधुरता " नियमित दिनचर्या में सूर्य और प्रकृति से जुड़ाव सेवा,  सहयोग और रिश्तों 10 सूर्य की रोशनी , प्रकृति का सानिध्य और सेवा , सहयोग , प्रेम और सद्वभावना से जीवन में सुख  धरती के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए मन प्रसन्न रहता है और शांति बनी रहती है। अत्यंत लाभकारी है। याद रखें संतुलित नियमित এযদ अधिक व्यसन सकारातक से दूर रहें। सोच आहार ٥١ जल स्वस्थ शरीर , शांत मन और उच्च विचार यही निरोग जीवन का आधार है। अखिल विश्व गायत्री परिवार
    9
    10
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    क्रोध, अहंकार और लोभ मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलताएँ हैं; इन्हें त्यागना ही वास्तविक साधना है। हम बदलेंगे युग बदलेगा , हम सुधरेंगे युग सुधरेगा | क्रोध, अहंकार और लोभ मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बलताएँ हैं; इन्हें त्यागना ही वास्तविक साधना है। हम बदलेंगे युग बदलेगा , हम सुधरेंगे युग सुधरेगा |
    8
    11
  • अनिल साहू - Author on ShareChat
    अनिल साहू
    #जय माँ गायत्री जय गुरुवर
    गायत्रीतीर्थ शान्तिकुञ्ज ತಿಷ ಹT ಶಣ शासन४ अर्थात उपदेश है कि सब पापों से बचो, अच्छे विचार रखो और चित्त को शुद्ध कण। हम बदलेंगे - युग बदलेगा , युग सुधरेगा  हम सुधरेंगे -  ಘrllrr) . Glu Tಓlus ' ~ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शातारी 1926 2026 0గాా दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial] YoUOBB Shantikunj Rishi Chintan 8439014110 wwwawgporg गायत्रीतीर्थ शान्तिकुञ्ज ತಿಷ ಹT ಶಣ शासन४ अर्थात उपदेश है कि सब पापों से बचो, अच्छे विचार रखो और चित्त को शुद्ध कण। हम बदलेंगे - युग बदलेगा , युग सुधरेगा  हम सुधरेंगे -  ಘrllrr) . Glu Tಓlus ' ~ वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी शातारी 1926 2026 0గాా दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial] YoUOBB Shantikunj Rishi Chintan 8439014110 wwwawgporg
    12
    16
Home
Explore
Wallet
Video