sn vyas
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#भक्ति भावना 🙏॥ श्रीहरि: ॥🙏 🧘शीघ्र भगवत् प्राप्ति कैसे हो?⁉️ 🙏भगवत्प्राप्ति कैसे हो'— यह प्रश्न हरदम जाग्रत रहे। चलते- फिरते, उठते-बैठते, खाते-पीते, सोते- जागते हर समय ऐसी जाग्रति रहे, ऐसी लगन लग जाय तो प्राप्ति हो जाती है। भगवत् प्राप्ति में केवल लगन की आवश्यकता है, सांसारिक कार्यों के करने में तो क्रिया, पदार्थ, बल, बुद्धि, योग्यता आदि की आवश्यकता है, लेकिन परमात्म- तत्त्व की प्राप्ति 'तत्त्व का अनुभव कैसे हो'— केवल ऐसी लालसा से हो जाती है। इस प्रश्न में ही उत्तर छिपा है।* *⚜️ सांसारिक वस्तुओं को तो पैदा करना पड़ता है, लेकिन परमात्मा को नया बनाना नहीं है, भगवान् तो सब जगह पहले से मौजूद है; उनकी प्राप्ति की अद्वितीय इच्छा हो जाय, तो सर्वत्र परिपूर्ण परमात्मा प्रकट हो जाते हैं, परमात्म-तत्त्व का अनुभव हो जाता है। परमात्मप्राप्ति की इच्छा के साथ-साथ अन्य इच्छाएँ भी रहती हैं, इसलिए परमात्म प्राप्ति में देरी हो रही है, अन्यथा देरी का कोई कारण नहीं है। हम परमात्मा के बिना रह नहीं सकें तो, परमात्मा का अनुभव हो जाता है।* *⚜️ 'जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संहेहू॥' आप रुपयों को चाहते हैं, लेकिन रुपये आपको नहीं चाहते हैं, रुपयों का घाटा लगने में एक मिनट लगता है। हम भगवान् को चाहें, चाहे नहीं चाहें, भगवान् तो सदा-सर्वदा से हम सबको चाहते ही हैं, हम भी भगवान् को चाह लें तो निहाल हो जाएँ। इसलिए भगवान् हमें किसी भी परिस्थिति में टिकने नहीं देते हैं, कोई भी आश्रय रहने नहीं देते हैं, ब्रह्म लोक तक भी चले जाएं तो वहाँ से भी वापस लौटकर आना पड़ता है। 'सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं। जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥'* *⚜️ 'सब कै ममता ताग बटोरी। मम पद मनहि बाँध बरि डोरी॥' सब तरफ से ममता हटा कर एक भगवान् में ही प्रियता, अपनापन हो जाय। हमारा असली घर (ससुराल) भगवान् का घर है, यहाँ (पीहर में) तो थोड़े दिन के लिए आये हैं और समय होते ही यहाँ से जाना पड़ेगा, यहाँ निश्चिन्त कैसे बैठे हैं। संसार के तरह-तरह के काम होंगे या नहीं होंगे, इसमें तो सन्देह है, लेकिन यहाँ से निश्चित ही जाना पड़ेगा, इसमें कोई सन्देह नहीं है, इसलिए जो मृत्यु का समय निश्चित ही आना है, उसकी तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए। मनुष्य शरीर मिला है तो मनुष्य शरीर में करने लायक काम कर लिया, अब शरीर रहे या जावे अपने शरीर की गर्ज नहीं है। 'सब जग डरपे मरण से मेरे मरण आनन्द। कब मरियै कब भेटियै पूरण परमानन्द॥* 🌷🌷🌷🌷🌷
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