sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग०७/०३
किये हुए कर्म भोगने ही पड़ते हैं
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🥰किए हुए कर्म भोगने ही पड़ते हैं🥰
*गतांक से आगे--*
*इसलिए कर्म करने से पहले हजार बार सोचना चाहिए, कर्म हो जाने पर उसके फल में से छूटने के लिए बेकार दौड़ना या प्रयत्न करना नहीं चाहिए। किंतु जब वह कर्म पककर प्रारब्ध बनकर सामने आ जाए, तो सीना (छाती ) तान के उसका सहर्ष सामना करना चाहिए,, और भोग लेना चाहिए। वरना हंसते-हंसते किया हुआ पाप रोते रोते भी भोगना पड़ता है।*
*राजा परीक्षित महा ज्ञानी विद्वान और संस्कारी थे , किंतु उनसे एक घोर पाप हो गया, एक निरपराधी ऋषि के गले में क्रोध के आवेश में मरा हुआ सांप पहना दिया । राजा घर आकर शांत होते ही उसको दुष्ट कृत्य का ख्याल आ गया।*
*अरे रे मुझसे भयंकर नीच कर्म हो गया , यह क्रियमाण कर्म के फल स्वरुप तक्षक नाग के काटने से उसकी मौत का प्रारब्ध निर्माण हुआ । किंतु इस फल भोग से छूटने के लिए उसने किसी प्रकार की सिफारिश लगाने की या अपनी सत्ता का प्रयोग करने का थोड़ा भी प्रयास नहीं किया।*
*उसने भगवान से ऐसी प्रार्थना नहीं की,,, हे भगवान श्री कृष्ण ! मेरे दादा (पितामह) अर्जुन और आप दोनों मामा बुआ के पुत्र भाई होते थे। उपरांत आप दोनों साले बहनोई भी थे । उस हिसाब से आप मेरे बहुत ही नजदीकी रिश्तेदार होते हैं। मेरे दादा अर्जुन आपके परम प्रिय भक्त थे और उनका रथ भी आपने चलाया था । और खुद मेरी भी आपने गर्ववास में रक्षा की थी।*
*इसलिए आप सब सर्वशक्तिमान होने से आप की सिफारिश से मुझको मेरे अपराध की शिक्षा न मिले, ऐसा उपाय करें और ,,,, मेरे जीवन को मैं यह पहला ही अपराध है और भविष्य में फिर ऐसा अपराध मै नहीं करूंगा उसकी कसम खाता हूं। इसलिए इस समय मुझे तुम छोड़ दो , तो मैं आप जितना कहेंगे उतना खर्चा करके , आप खुश हो जाए, उतना धर्म कार्य करूंगा।भगवान के पास सिफारिश या घूसखोरी कर्म के कायदे के अमल में नहीं चलती।*
*परीक्षित ने अपने क्रियमाण कर्मों का फल प्रारब्ध के सामने आते ही भोग लिया, और मोक्ष को प्राप्त हुआ। उसने कर्म के फल में से छूटने के लिए सिफारिश का उपयोग नहीं किया , यदि उपयोग किया होता तो भी कर्मफल सहे बिना उसका छुटकारा नहीं था।*
*किए हुए कर्म भोगने पड़ते हैं*
उसका विश्राम,,,,,, ✍️
#कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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