sn vyas
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🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_११
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🥰प्रारब्ध में होगा उतना ही मिलेगा🥰
जो क्रियमाण कर्म जितना करो और जिस रीती से करो, उतना ही और उस रिती का ही प्रारब्ध निर्माण होगा। और उतना ही प्रारब्ध फल मिलेगा, थोड़ा भी कम या ज्यादा नहीं मिलेगा।
*जन्म लेते समय जितना क्रियमाण कर्म पक कर फल देने के लिए प्रारब्ध रूप में बना है, उतना ही प्रारब्ध कर्म भोगने के लिए उसके अनुरूप देह मिलेगा , और माता-पिता स्त्री पुत्र आदिक भी उतना ही प्रारब्ध भोग के अनुरूप प्राप्त होंगे । आपके प्रारब्ध के अनुसार ही वैसे ही माता-पिता के वहां आपका जन्म होगा और आपके प्रारब्ध के अनुरूप ही अनुकूलता आपको उन माता-पिता के घर में प्राप्त होगी।*
*कौन माता पिता के घर जन्म लेना है, उसकी पसंदगी हमें करनी नहीं होगी, हम लोग तो बिरला सेठ के यहां ही जन्म लेना पसंद करेंगे, कि जहां जन्म लेते ही पाँच -पच्चीस मकान और पाँच-पच्चीस मोटरों के मालिक हो जाएं। किंतु ऐसे माता-पिता या स्त्री पुत्र आदिक की पसंदगी अपने आप करनी नहीं होती । यह सब ऋणानुबंध आपके प्रारब्ध के साथ ही इस जीवनकाल दौरान आपको आकर मिलता है ।*
*ऋण के बंधन से आ मिले,*
*सुत वित दारा और देह।*
*और आपके रिणानुबंध पूर्ण होते ही तुरत अलग हो जाएंगे, आपका ही किया हुआ क्रियमाण कर्म पक कर आपके प्रारब्ध रूप से सामने आकर खड़ा हो जाएगा और वह सब पूर्ण रूप से जीवन काल दरमियान भोगने के बाद ही यह देह छूटेगा ।*
*ध्यान दो!*
*जिसमें से , जिससे , जिस तरह, जब, जिस समय तक, जहां , शुभाशुभ, क्रियमाण कर्म किए हो । उसमें से ही , और उससे ही , और उसी तरह , और उसी समय , और उस समय तक ही, और वही प्रारब्ध बनकर आपको आकर मिलेगा।*
*राजा अपने नौकर पर कितना भी संतुष्ट हो जाए तो भी उसको उसके भाग्य से थोड़ा भी ज्यादा नहीं दे सकता। और जबरदस्ती देने जाएगा । तो वह उसके हाथ से छूट जाएगा। चौवीस घंटे और तीन सौ पैसठ दिन वर्षा होती रहे तो भी पलाश के पेड़ में केवल तीन ही पत्ते निकलेंगे , चौथा नहीं निकलेगा।*
*वसंत ऋतु आने पर जगत में तमाम वृक्षों में नए पत्ते आते हैं किंतु केरडा के वृक्ष को नए पत्ते नहीं आते , तो उसमें बसंत ऋतु का दोष नहीं है।*
*सूर्यनारायण उदय हो जाए तब सारी दुनिया में सबको दिखाई पड़े किंतु उल्लू को न दिखाई पड़े, उसमें सूर्य नारायण का दोष नहीं है।*
*चतुर्मास में वर्षा गरीब और अमीर तमाम के घर पर समान रूप से बरसती है किंतु चातक पक्षी मुंह फाड़ कर बैठा रहे तो भी उसके मुंह में एक बूंद भी पानी न गिरे उसमें वर्षा का दोष नहीं है।*
*प्रारब्ध जो निर्माण हो चुका हो, उसको कोई भी मिटा सकता नहीं। आदमी के जन्म के 6 दिन बाद विधाता उस के नसीब में लेख लिखने आती है, ऐसी एक मान्यता है। यह बात अगर सच्ची हो तो भी आदमी ने जो क्रियमाण कर्म किया हो और वह पक कर जैसा और जितना प्रारब्ध उस का निर्माण हुआ हो उससे थोड़ा भी कम या ज्यादा विधाता उसके लेख में लिख सकते नहीं ।*
*आप के प्रारंभ में जितना पैसा पैदा करने का निर्माण हुआ हो उस से एक भी पैसा आपको ज्यादा या कम नहीं मिल सकता । टेढ़े मेढ़े रास्ते से गफलत करके ज्यादा पैसा प्राप्त करने का प्रयत्न करेंगे तो ऊपर से नया जूठ खड़ा किया हुआ क्रियमाण कर्म में फस जाओगे।*
*पैसे के लिए गलत दौड़ धाम न करो । क्योंकि जूठ दौड़ धाम करने से पैसा आता नहीं। कहने का भावार्थ यह है---- कि आपके अपने ही किए हुए क्रियमाण कर्म के अनुसार ही आपका प्रारब्ध जन्म के समय साथ ही निर्माण हो चुका है। और इसलिए उससे विशेष आप कोटी उपाय करेंगे तो भी आपको मिलेगा नहीं।*
प्रारब्ध में होगा उतना ही मिलेगा,,,,
विश्राम ... ✍🏽
#कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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