sn vyas
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# श्रीमद्भागवत - महापुराण
*‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय‘*
ध्रुव और भगवान विष्णु की कहानीतपस्या का संकल्प: ध्रुव, राजा उत्तानपाद के पुत्र थे। जब उनकी सौतेली माँ सुरुचि ने उन्हें पिता की गोद से उतार दिया और अपमानित किया, तो ध्रुव दुखी होकर वन चले गए। अपनी माँ सुनीति की सीख पर, उन्होंने भगवान विष्णु को पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू की।नारद मुनि का मार्गदर्शन: वन में उन्हें देवर्षि नारद मिले, जिन्होंने बालक की दृढ़ता देख उन्हें "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र की दीक्षा दी।प्रभु का दर्शन: ध्रुव ने बिना कुछ खाए-पिये महीनों तक घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए। तस्वीर में भगवान विष्णु को उनके चतुर्भुज रूप में दिखाया गया है, जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल है। वे बालक ध्रुव को आशीर्वाद दे रहे हैं।
ध्रुव तारा (अटल पद):
भगवान विष्णु ने ध्रुव को ब्रह्मांड में सबसे ऊंचा और स्थिर स्थान दिया। आज उन्हें हम उत्तर दिशा में चमकने वाले ध्रुव तारे के रूप में जानते हैं, जो अपनी भक्ति के कारण अमर हो गए।
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