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MEKHRAM SAHU - Author on ShareChat
MEKHRAM SAHU
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#🌴🌹🙏साहेब बंदगी साहेब🙏🌹🌴
गुरू पूर्णिमा की 7sk  साहेब बंदगी हार्दिक शुभकामनाएँ गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते , बल्कि जीवन को सही दिशा, _ संस्कार और सफलता का मार्ग भी दिखाते हैं। 439s ६६   गुरू ब्रह्मा गुरू ' fqu ' गुरु देवो महेश्वरः| गुरूः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुखवे नमः]l 99 05 इस पावन अवसर पर अपने सभी ক সনি गुरुजनों श्रद्धा , सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें। उनके आशीर्वाद से जीवन सदैव ज्ञान सफलता और उजाले से भरपूर रहे। पूर्णिमा की सभी को गुरू নরীতক எீகே gஅசளப்! মাযী रमैनी सतगुरु कबीर साहेब के दीवाने गुरू पूर्णिमा की 7sk  साहेब बंदगी हार्दिक शुभकामनाएँ गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते , बल्कि जीवन को सही दिशा, _ संस्कार और सफलता का मार्ग भी दिखाते हैं। 439s ६६   गुरू ब्रह्मा गुरू ' fqu ' गुरु देवो महेश्वरः| गुरूः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुखवे नमः]l 99 05 इस पावन अवसर पर अपने सभी ক সনি गुरुजनों श्रद्धा , सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें। उनके आशीर्वाद से जीवन सदैव ज्ञान सफलता और उजाले से भरपूर रहे। पूर्णिमा की सभी को गुरू নরীতক எீகே gஅசளப்! মাযী रमैनी सतगुरु कबीर साहेब के दीवाने
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    ।। सत्यनाम ।l प्रकाशमुनिनाम साहेब पंथश्री गृन्धमुनिनाम साहब पंथ श्री हुजूर  ম[টং कास 16 41 ग़ुरु पूर्णिमा धनी थर्मदासजी साहेब की हार्दिक शुभकामनाएं गुरू के चरणों में ही जीवन का सच्चा मार्ग है, गुरू कृपा से ही मिलती है हर राह में सफलता। पंथ श्री हुजूर उदितमुनिनाम साहेब सप्रेम साहेब बंदगी साहेब ।। सत्यनाम ।l प्रकाशमुनिनाम साहेब पंथश्री गृन्धमुनिनाम साहब पंथ श्री हुजूर  ম[টং कास 16 41 ग़ुरु पूर्णिमा धनी थर्मदासजी साहेब की हार्दिक शुभकामनाएं गुरू के चरणों में ही जीवन का सच्चा मार्ग है, गुरू कृपा से ही मिलती है हर राह में सफलता। पंथ श्री हुजूर उदितमुनिनाम साहेब सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    गुरू पारस गुरू पुरष है, गुरू चंदन बास सुबास। सतगुरू पारस जीव के, दीन्हा मुकि निवास।। < साढल কা ೩1 ೯೯೯ बनी धर्मदासाजी Fillar (गुरू पूर्णिमा ) पूर्णिमा आषाढ़ के पावन पर्व पर आप सभी को गुरू पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं! ९३ ।। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब ।। गुरू पारस गुरू पुरष है, गुरू चंदन बास सुबास। सतगुरू पारस जीव के, दीन्हा मुकि निवास।। < साढल কা ೩1 ೯೯೯ बनी धर्मदासाजी Fillar (गुरू पूर्णिमा ) पूर्णिमा आषाढ़ के पावन पर्व पर आप सभी को गुरू पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं! ९३ ।। सप्रेम साहेब बंदगी साहेब ।।
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    सतगुरू कबीर साहेब वाणी कबीर कहे जगत से, ऐसी वाणी बोल | टूटे दिल भी जुड़ उठें , मिट जाए मनभेद Il मीठे वचन अमृत समान हैं, ये ही प्रेम का सेतु बनाते हैं , कठोर वाणी से रिश्ते टूटते हैं, मधुर वाणी से दिल मिल जाते हैं । सप्रेम साहेब बंदगी साहेब सतगुरू कबीर साहेब वाणी कबीर कहे जगत से, ऐसी वाणी बोल | टूटे दिल भी जुड़ उठें , मिट जाए मनभेद Il मीठे वचन अमृत समान हैं, ये ही प्रेम का सेतु बनाते हैं , कठोर वाणी से रिश्ते टूटते हैं, मधुर वाणी से दिल मिल जाते हैं । सप्रेम साहेब बंदगी साहेब
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    सदगुरु कबीर वाणी वचन Dol 6|9 पंथ श्री हुजूर उदितमुनिनाम साहब के प्रवचन जब हम सेवा की बात करते ह तो अक्सर हमारा मन एक सीमित दायरे गें सोचता हे।  कोई भोतिक मदद कोई दान या कोई शारीरिक श्रम यही सेवा की सामान्य समडा हे। लेकिन क्या सेवा का अर्थ इतना सतही ह? सेवा का वास्तविक अर्थ हे अहं से मुक्ति।  जव तक '॰ कर्ता बना रहता हेःतव तक चास्तविक सेचा संभव नहीं ह। सेच। करने वाला  जव तक यह सोचता है कि"मे सेवा कर रहा तय तक बह सेवा के सार को नहीं समझ पाया हे। वास्तविक सेता तव होती ह जव करने वाला गायय हो जाता हे।  जेसे सूर्य प्रकाश देता हे, पर कभी नहीं सोचता " कि चह प्रकाश दे रहा हे।जेसो नदी बहती ह॰ पर कभी नही सोचती किबह किसी की 66 सेवा चही जो अहंसे मुक्त हो, प्यारा बुझा रही हे। यही सेचा का परम स्वरुप हे।  जहा कर्ता नःहो, केवल करुणा हो। सेवा का अर्थ हे स्वयं को मिटाकर स्वयंको मिटा कर॰ सबगें स्वयं को देखो में देखना।  বুমযৌ  यही सेचा हे॰ यही साथना ह यही पंथ ह।७७ जव तक 'दूसरा' हे॰ तब तक सेवा अथूरी ह।  जय आपःकिसी की सेवा करते हता यास्तय मे॰ आप स्वयं कीही सेचा कर रहे हें, क्योकि  बह ' दूसरा' आपसे अलग नहीं हे। बंदगी साहेब जी सप्रेम साहेब Nkp सदगुरु कबीर वाणी वचन Dol 6|9 पंथ श्री हुजूर उदितमुनिनाम साहब के प्रवचन जब हम सेवा की बात करते ह तो अक्सर हमारा मन एक सीमित दायरे गें सोचता हे।  कोई भोतिक मदद कोई दान या कोई शारीरिक श्रम यही सेवा की सामान्य समडा हे। लेकिन क्या सेवा का अर्थ इतना सतही ह? सेवा का वास्तविक अर्थ हे अहं से मुक्ति।  जव तक '॰ कर्ता बना रहता हेःतव तक चास्तविक सेचा संभव नहीं ह। सेच। करने वाला  जव तक यह सोचता है कि"मे सेवा कर रहा तय तक बह सेवा के सार को नहीं समझ पाया हे। वास्तविक सेता तव होती ह जव करने वाला गायय हो जाता हे।  जेसे सूर्य प्रकाश देता हे, पर कभी नहीं सोचता " कि चह प्रकाश दे रहा हे।जेसो नदी बहती ह॰ पर कभी नही सोचती किबह किसी की 66 सेवा चही जो अहंसे मुक्त हो, प्यारा बुझा रही हे। यही सेचा का परम स्वरुप हे।  जहा कर्ता नःहो, केवल करुणा हो। सेवा का अर्थ हे स्वयं को मिटाकर स्वयंको मिटा कर॰ सबगें स्वयं को देखो में देखना।  বুমযৌ  यही सेचा हे॰ यही साथना ह यही पंथ ह।७७ जव तक 'दूसरा' हे॰ तब तक सेवा अथूरी ह।  जय आपःकिसी की सेवा करते हता यास्तय मे॰ आप स्वयं कीही सेचा कर रहे हें, क्योकि  बह ' दूसरा' आपसे अलग नहीं हे। बंदगी साहेब जी सप्रेम साहेब Nkp
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    बिन जल कमल खिला हुआ , बिन माली बगिया। गुरु॰कृपा की छाँव में , खिल उठी अंतर दुनिया।l कबीर वाणी बिन जल कमल खिला हुआ , बिन माली बगिया। गुरु॰कृपा की छाँव में , खिल उठी अंतर दुनिया।l कबीर वाणी
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    साहेब बंदगी सतगुरू कबीर साहेब की जय Il ~೨೨೫೬3 ವ 00 अपराधी जन्म का 9 नख सीख भरा विकार | तुम दाता दुख भंजना , मेरी करो उबार | कबीर कहे सुनो भाई साधो , सहज समाना राम | नाम बिना के जीव नरक में , कहत कबीर विश्राम ।। यदिं आपको हमारा पेज पसंद आ रहा है तो कमेंट में " साहेब बंदगी ॰ लिखकर हमारा हौसला जरूर बढ़ाएं साहेब बंदगी सतगुरू कबीर साहेब की जय Il ~೨೨೫೬3 ವ 00 अपराधी जन्म का 9 नख सीख भरा विकार | तुम दाता दुख भंजना , मेरी करो उबार | कबीर कहे सुनो भाई साधो , सहज समाना राम | नाम बिना के जीव नरक में , कहत कबीर विश्राम ।। यदिं आपको हमारा पेज पसंद आ रहा है तो कमेंट में " साहेब बंदगी ॰ लिखकर हमारा हौसला जरूर बढ़ाएं
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    चींटी चावल ले चली, बीच में मिल गई दाल | कहत कबीर दो ना मिले, एक ले दूजी डाल II SKabi Se Sam Sp चींटी चावल ले चली, बीच में मिल गई दाल | कहत कबीर दो ना मिले, एक ले दूजी डाल II SKabi Se Sam Sp
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