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✨ नाभि: आपके शरीर का गुप्त पावर हाउस! ✨ क्या आप जानते हैं कि आपकी नाभि (Navel) सिर्फ शरीर का एक हिस्सा नहीं, बल्कि 72,000 नाड़ियों का संगम केंद्र है? आयुर्वेद में इसे 'मर्म स्थान' कहा गया है, जो सीधे आपकी सेहत और प्राणिक ऊर्जा (Pranic Energy) से जुड़ा है। 🌀 🌿 नाभि में तेल लगाने के चमत्कारी फायदे: ✅ पाचन में सुधार: गैस और अपच से छुटकारा। ✅ दमकती त्वचा: होंठों का फटना बंद और चेहरे पर कुदरती निखार। ✅ तनाव से मुक्ति: मन को शांत करता है और गहरी नींद लाने में मदद करता है। ✅ हार्मोनल बैलेंस: शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रखता है। 🧴 कौन सा तेल है आपके लिए बेस्ट? घी: ताकत और बेहतर पाचन के लिए। नारियल तेल: स्किन की चमक और ठंडक के लिए। सरसों तेल: वात दोष और घुटनों के दर्द में राहत के लिए। 🌙 प्रो टिप: रोज रात को सोने से पहले अपनी नाभि में 2-3 बूंद तेल डालें और धीरे-धीरे मालिश करें। बदलाव आप खुद महसूस करेंगे! #ayurveda #🌿 આયુર્વેદ #medical #medicalknowledge #india #hindi #🌿આયુર્વેદનો ખજાનો
ayurveda - नाभिः शरीर का एनर्जी सेंटर आयुर्वेद में नाभि को मर्म स्थान कहा गया है = यह पाचन (अग्नि) और शरीर की कई नाड़ियों का मुख्य केंद्र है। नाभि पर तेल लगाने के फायदे पाचन शक्ति बढ़ाता है (गैस , अपच में मदद) त्वचा को नमी और पोषण देता है तनाव कम कर मन को शांत करता है नींद सुधारने में सहायक हार्मोन संतुलन में मदद कौन सा तेल लगाएं? घी ~ पाचन व ताकत के लिए नारियल तेल - ठंडक व स्किन के लिए वात और सर्दी में लाभकारी सरसों तेल F कैसे लगाएं? रात को सोने से पहले २२३ बूंद नाभि में डालकर हल्की मसाज करें ध्यान रखेंः नाभि सा़फ रखें, अधिक तेल न डालें , इंफेक्शन हो तो उपयोग न करें १ संदर्भः चरक संहिता , सुश्रुत संहिता नाभिः शरीर का एनर्जी सेंटर आयुर्वेद में नाभि को मर्म स्थान कहा गया है = यह पाचन (अग्नि) और शरीर की कई नाड़ियों का मुख्य केंद्र है। नाभि पर तेल लगाने के फायदे पाचन शक्ति बढ़ाता है (गैस , अपच में मदद) त्वचा को नमी और पोषण देता है तनाव कम कर मन को शांत करता है नींद सुधारने में सहायक हार्मोन संतुलन में मदद कौन सा तेल लगाएं? घी ~ पाचन व ताकत के लिए नारियल तेल - ठंडक व स्किन के लिए वात और सर्दी में लाभकारी सरसों तेल F कैसे लगाएं? रात को सोने से पहले २२३ बूंद नाभि में डालकर हल्की मसाज करें ध्यान रखेंः नाभि सा़फ रखें, अधिक तेल न डालें , इंफेक्शन हो तो उपयोग न करें १ संदर्भः चरक संहिता , सुश्रुत संहिता - ShareChat