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सरकारी लोन का इन्वेस्टमेंट देश के लोगों की आशाएं मानकर कीजिए ! 'रिस्क लेकर देखने मे क्या हर्ज है' कि भावना नहीं बल्कि 'राष्ट्र की तस्वीर और देश वासियों की तकदीर बदलनी है' की दृढ़ संकल्प शक्ति की झलक आनी चाहिए ! लेकिन जब तक जातिवाद को पीछे नहीं छोड़ोगे देश उस गति से आगे नहीं बढेगा जिस गति से कभी अमेरिका, रूस, चीन, जापान और इजराइल बढ़े ! आज भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला राष्ट्र है इसलिए इसके विकास की रफ्तार भी युवाओं वाली होनी चाहिए ! लेकिन जाति-वाद और स्टेटस-सिंबल के आडंबर इस रास्ते की सबसे बड़ी बाधाएं है ! गौर से देखिए जो देश आपसे आगे हैं वहां के नागरिक अपने समय को बहुत सोच समझकर खर्च करते हैं उनके प्रत्येक के पास अपना स्पष्ट दृष्टिकोण है ! लेकिन आप हमेशा से कुछ व्यर्थ की चीजों मे उलझे रहकर अपना समय व्यर्थ गंवाते रहे हैं ! अब यह आगे भी आपके अपने लिए लिए निर्णय से ही तय होगा ! यही आपका सबसे बडा इन्वेस्टमेंट होगा और बाकी के इन्वेस्टमेंट्स को घाटे से बचाए रखने की पक्की गारंटी भी ,,,, #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - अगर कोई व्यक्ति अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता, दुर्व्यवहार करता है अथवा असहाय अवस्था में उनका त्याग कर देता है तो निश्चय ही वह घृणा का पात्र होता है क्योंकि वह कभी उनका ऋण नहीं चुका सकता ! मातृभूमि का होता लेकिन माता-पिता से भी बड़ा ऋण है! अतः स्वदेश मे पल ्बढ कर,शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद स्वराष्ट्र को दयनीय स्थिति में छोड़़, लालच मे पड़कर विदेश को समृद्ध बनाना कहीं अधिक निंदनीय ಈ! अगर कोई व्यक्ति अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता, दुर्व्यवहार करता है अथवा असहाय अवस्था में उनका त्याग कर देता है तो निश्चय ही वह घृणा का पात्र होता है क्योंकि वह कभी उनका ऋण नहीं चुका सकता ! मातृभूमि का होता लेकिन माता-पिता से भी बड़ा ऋण है! अतः स्वदेश मे पल ्बढ कर,शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद स्वराष्ट्र को दयनीय स्थिति में छोड़़, लालच मे पड़कर विदेश को समृद्ध बनाना कहीं अधिक निंदनीय ಈ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - सनातन परंपरा आदिकाल से ही अन्य परंपराओं से महान इसलिए रही है कि इसके अनुयाइयों ने इसकी मर्यादा को प्रभावित करने वालों को गुणों की कसौटी पर रखा ! देव , दानव अथवा मानव सभी को उनके कर्मों के आधार पर स्थापित किया ! कर्मानुसार ही रावण ,कंस , नारद वशिष्ट , वाल्मिकी बुद्ध इंद्र चंद्र आदि सबको पुरस्कृत , दंडित एवं बहिष्कृत करने का विधान किया ! लेकिन अफसोस कि आज के सनातनी लोग गुण नहीं जाति को प्रथम मानने लगे हैं ! सनातन परंपरा आदिकाल से ही अन्य परंपराओं से महान इसलिए रही है कि इसके अनुयाइयों ने इसकी मर्यादा को प्रभावित करने वालों को गुणों की कसौटी पर रखा ! देव , दानव अथवा मानव सभी को उनके कर्मों के आधार पर स्थापित किया ! कर्मानुसार ही रावण ,कंस , नारद वशिष्ट , वाल्मिकी बुद्ध इंद्र चंद्र आदि सबको पुरस्कृत , दंडित एवं बहिष्कृत करने का विधान किया ! लेकिन अफसोस कि आज के सनातनी लोग गुण नहीं जाति को प्रथम मानने लगे हैं ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - क्या तुम्हें अब भी नहीं लगता कि सच्चा शुकून सिर्फ प्रेम एवं असहायों की मदद करने से ही मिलता है ? लालच में पड़कर किसी का जीवन और हक छीनने से नहीं फिर इसे गलत मानकर अपना रास्ता बदल क्यों नहीं लेते ? स्वयं को परिपूर्ण करने का एक मात्र उपाय यही है ٩٠ संपूर्ण जगत के संसाधनों को पाकर भी अधूरे रह जाओगे ! क्या तुम्हें अब भी नहीं लगता कि सच्चा शुकून सिर्फ प्रेम एवं असहायों की मदद करने से ही मिलता है ? लालच में पड़कर किसी का जीवन और हक छीनने से नहीं फिर इसे गलत मानकर अपना रास्ता बदल क्यों नहीं लेते ? स्वयं को परिपूर्ण करने का एक मात्र उपाय यही है ٩٠ संपूर्ण जगत के संसाधनों को पाकर भी अधूरे रह जाओगे ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - अंतरिक्ष मे एस्ट्रोनाट्स की बजाय विश्व मे अशांति फैलाने वाले नेताओं को भेजना चाहिए! शायद वहां से को देखकर उन्हें ये अहसास हा पृथ्वी  कि अनंत गैलेक्सियों में मौजूद अनंत आकाशीय पिंडों के बीच यह धरती ही एकमात्र सबका ठिकाना है ! उन ने भले ही अनेकों सीमाएं खींच रखी हैं लेकिन अंतरिक्ष की मे सिर्फ दुनिया यही एक घर है जिसमें लोग रहते हैं ! अंतरिक्ष मे एस्ट्रोनाट्स की बजाय विश्व मे अशांति फैलाने वाले नेताओं को भेजना चाहिए! शायद वहां से को देखकर उन्हें ये अहसास हा पृथ्वी  कि अनंत गैलेक्सियों में मौजूद अनंत आकाशीय पिंडों के बीच यह धरती ही एकमात्र सबका ठिकाना है ! उन ने भले ही अनेकों सीमाएं खींच रखी हैं लेकिन अंतरिक्ष की मे सिर्फ दुनिया यही एक घर है जिसमें लोग रहते हैं ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - भारत मे सर्वोच्च पद को चुनौती देने की प्रजातांत्रिक एवं संवैधानिक व्यवस्था मौजूद है जबकि अमेरिकी ऐसा नहीं कर सकते ! जिसके कारण वे ना चाहते भी एक सनकी अपरिपक्व बुजुर्ग की मनमानियों हुए भरी लीडरशिप को सहने पर विवश हैं ! इसका अर्थ यह हुआ कि भारत का प्रजातंत्र एवं नैतिक मूल्य अमेरिकियों से बहुत अधिक महान हैं ! भारत मे सर्वोच्च पद को चुनौती देने की प्रजातांत्रिक एवं संवैधानिक व्यवस्था मौजूद है जबकि अमेरिकी ऐसा नहीं कर सकते ! जिसके कारण वे ना चाहते भी एक सनकी अपरिपक्व बुजुर्ग की मनमानियों हुए भरी लीडरशिप को सहने पर विवश हैं ! इसका अर्थ यह हुआ कि भारत का प्रजातंत्र एवं नैतिक मूल्य अमेरिकियों से बहुत अधिक महान हैं ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - जितनी ऊर्जा दूसरों की कमियां ढूंढने मे खर्च करत़े हैं उंतना यदि अपनी उन्नति मे लगा दें परिणाम अवश्य ही सुखदायक होंगे ! जितनी ऊर्जा दूसरों की कमियां ढूंढने मे खर्च करत़े हैं उंतना यदि अपनी उन्नति मे लगा दें परिणाम अवश्य ही सुखदायक होंगे ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - ऐसा लग रहा है कि नेपाल की सत्ता किसी ऐसे संगठन के हाथ मे पड़ गई है जिसने सत्ता की महत्वाकांक्षा को पूर्ण करने मात्र के लिए नेपाल संप्रभुता को किसी भारत की विरोधी राष्ट्र के हाथों गिरवी दिया हो ! 7 LATESTUPDATES LIVE LIVE 18:00 IST LATEST UPDATES LATESTUPDATES LATEST UPDATES LATESTUPDATES LATESTUPI ऐसा लग रहा है कि नेपाल की सत्ता किसी ऐसे संगठन के हाथ मे पड़ गई है जिसने सत्ता की महत्वाकांक्षा को पूर्ण करने मात्र के लिए नेपाल संप्रभुता को किसी भारत की विरोधी राष्ट्र के हाथों गिरवी दिया हो ! 7 LATESTUPDATES LIVE LIVE 18:00 IST LATEST UPDATES LATESTUPDATES LATEST UPDATES LATESTUPDATES LATESTUPI - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) कम मैनपावर मे संचालन एवं अनुरक्षण की मची होड़ आज औद्योगिक दुर्घटनाओं एवं व्यवसायिक हानियों का सबसे प्रमुख कारण है ! इसी वजह से अब कम ऊम्र के इंजीनियरों एवं पेशेवरों का स्किल डेवलपमेंट क्रमिक ढंग से नहीं हो पा रहा है ! बड़े उद्योगों के संचालन के लिए अनुभव प्रथम अनिवार्य शर्त होनी चाहिए ! लेकिन आज डिग्री महत्वपूर्ण हो गयी है ! आधुनिक स्वचालित उपकरणों के कारण निश्चय ही संचालन सरल हुआ है लेकिन ताप एवं दाब के सिद्धांत प्राकृतिक रूप से स्थाई रहने वाले हैं जिसे समझने के लिए दीर्घ कालिक कार्य अनुभव की तुलना सिर्फ केस स्टडीज व प्राप्त डिग्री के आधार पर करना ही जोखिमों को कमतर आंकना है ! और यही कारण है कि आज औद्योगिक दुर्घटनाओं की संख्या एवं हानियों मे इजाफा हुआ है ! प्रबंधन के द्वारा कम एवं यंग मैनपावर तथा स्वचालित मशीनों पर अति विश्वास के कारण दशकों का अर्जित लाभांश सेकेण्डों मे स्वाहा ! आज आडिटर एजेंसियों को अपने निर्धारित मानको मे उद्योंगे के अनुरूप विभागानुसार कार्यरत मैनपावर के कुल अनुभवों का डाटा भी एकत्र करने चाहिए ताकि भविष्यसंभावी दुर्घटनाओं की रोकथाम कर राष्ट्रीय क्षति को नियंत्रित किया जा सके !
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः !! यहां ' शक्ति शब्द का अभिप्राय समस्त प्रकार की शक्तियों से है जैसे कि तन, बुद्धि विद्या, गुण , सत्ता, यश आदि मन, धन बल, सभी प्रकार की दृश्य अदृश्य शक्तियां देवी का ही स्वरूप हैं! या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः !! यहां ' शक्ति शब्द का अभिप्राय समस्त प्रकार की शक्तियों से है जैसे कि तन, बुद्धि विद्या, गुण , सत्ता, यश आदि मन, धन बल, सभी प्रकार की दृश्य अदृश्य शक्तियां देवी का ही स्वरूप हैं! - ShareChat