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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - सौ करोण रूपये से अधिक की बैंकिंग लोन राशि रखने वाले उद्योगपतियों के एक समारोह पर उनके एक ईएमआई से अधिक का खर्च करने पर प्रतिबंध लगना चाहिए ! सौ करोण रूपये से अधिक की बैंकिंग लोन राशि रखने वाले उद्योगपतियों के एक समारोह पर उनके एक ईएमआई से अधिक का खर्च करने पर प्रतिबंध लगना चाहिए ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) भारतवर्ष की लगभग 90% आबादी शादी विवाह में प्रतिष्ठा प्रतीक के तौर पर सोने की खरीदारी विवशता वश करती है ! एक प्रकार की मानसिक दबाव की स्थिति मे ही करती है ! उनके निजी शौक को पूरी करने की खुशी वाली भावना इसमे शामिल नहीं रहती ! प्राचीन काल मे आर्थिक भविष्य के प्रति आरंभिक दृष्टिकोण रखने वाली यह परंपरा अब प्रदर्शन का रूप ले चुकी है जिसके पीछे जनता मे जागरूकता मे कमी मूल कारण है ! विवाह के अतिरिक्त भी कई समारोहों एवं सम्मान के नाम पर, झूठी संतुष्टि के नाम पर, पूंजी पतियों एवं उच्च वर्ग द्वारा आडंबर करते रहने की आदत अब संपूर्ण समाज को पूरी तरह से अब नकली जीवन के दलदल मे घसीट चुका है ! इसका एकमात्र दीर्घकालिक उपाय समाज के शीर्ष वर्ग द्वारा सादगीपूर्ण जीवनशैली को अपनाकर जागरूकता प्रस्तुत करने से अथवा उनके फिजूल खर्च को एक निश्चित दायरे मे सीमित करने के कठोर कानूनों के निर्माण और अनुशासन पूर्वक अनुपालन करने से ही संभव होगा ! जैसे कि लोन मे दबे पूंजीपतियों को किश्त से अधिक खर्च न करने देने का कानून ! महंगे शौकों का सार्वजनिक प्रदर्शन ही देश की अर्थ व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का व निम्नवर्गीय परिवारों को अनुचित प्रदर्शन की जीवनशैली की तरफ धकेलने का काम कर रही है ! अतः इसका नियंत्रण पूर्णतः सरकार की इच्छाशक्ति पर निर्भर है !
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - हड्डियों का विज्ञान हृदय के विज्ञान से बिल्कुल अलग है ! ऐसे ही रेगिस्तान का विज्ञान जंगलों के विज्ञान से पृथक ೯! प्रकारसे अलग ्अलग धर्म కెౌి अलग अलग पारिस्थितिकीय तंत्र मे मानव सभ्यता को जीवन की सुरक्षा प्रदान करने वाले विज्ञान हैं ! ये लड़ने अथवा संघर्ष करने के नहीं समझने के विषय हैं ! हड्डियों का विज्ञान हृदय के विज्ञान से बिल्कुल अलग है ! ऐसे ही रेगिस्तान का विज्ञान जंगलों के विज्ञान से पृथक ೯! प्रकारसे अलग ्अलग धर्म కెౌి अलग अलग पारिस्थितिकीय तंत्र मे मानव सभ्यता को जीवन की सुरक्षा प्रदान करने वाले विज्ञान हैं ! ये लड़ने अथवा संघर्ष करने के नहीं समझने के विषय हैं ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - भारत के प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों मे यदि राष्ट्रवाद की भावना होती तो निर्माण कार्य किसी ईमारत का हो अथवा किसी भारतीय बालक| बालिका के व्यक्तित्व का,बेहद सशक्त लेकिन एवं गुणवत्ता से भरपूर होता ! यदि भ्रष्टाचार जारी है तो निश्चय ही संविधान मे कुछ कमजोरी है ! LIVE LATEST UPDATES भारत के प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों मे यदि राष्ट्रवाद की भावना होती तो निर्माण कार्य किसी ईमारत का हो अथवा किसी भारतीय बालक| बालिका के व्यक्तित्व का,बेहद सशक्त लेकिन एवं गुणवत्ता से भरपूर होता ! यदि भ्रष्टाचार जारी है तो निश्चय ही संविधान मे कुछ कमजोरी है ! LIVE LATEST UPDATES - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - भारत मे गरीबी और टैक्स चोरी का एक कानूनों का बहुत अधिक बडा कारण श्रम कमजोर होना भी है ! श्रम कानूनों के प्रयोग एवं पारदर्शिता मे भारी विरोधाभास है जो कि शोषण एवं भ्रष्टाचार की सर्वाधिक ಕ151 गहरी  को पोषित करते हैं ! LIVE LATEST UPDATES भारत मे गरीबी और टैक्स चोरी का एक कानूनों का बहुत अधिक बडा कारण श्रम कमजोर होना भी है ! श्रम कानूनों के प्रयोग एवं पारदर्शिता मे भारी विरोधाभास है जो कि शोषण एवं भ्रष्टाचार की सर्वाधिक ಕ151 गहरी  को पोषित करते हैं ! LIVE LATEST UPDATES - ShareChat
सरकारी लोन का इन्वेस्टमेंट देश के लोगों की आशाएं मानकर कीजिए ! 'रिस्क लेकर देखने मे क्या हर्ज है' कि भावना नहीं बल्कि 'राष्ट्र की तस्वीर और देश वासियों की तकदीर बदलनी है' की दृढ़ संकल्प शक्ति की झलक आनी चाहिए ! लेकिन जब तक जातिवाद को पीछे नहीं छोड़ोगे देश उस गति से आगे नहीं बढेगा जिस गति से कभी अमेरिका, रूस, चीन, जापान और इजराइल बढ़े ! आज भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला राष्ट्र है इसलिए इसके विकास की रफ्तार भी युवाओं वाली होनी चाहिए ! लेकिन जाति-वाद और स्टेटस-सिंबल के आडंबर इस रास्ते की सबसे बड़ी बाधाएं है ! गौर से देखिए जो देश आपसे आगे हैं वहां के नागरिक अपने समय को बहुत सोच समझकर खर्च करते हैं उनके प्रत्येक के पास अपना स्पष्ट दृष्टिकोण है ! लेकिन आप हमेशा से कुछ व्यर्थ की चीजों मे उलझे रहकर अपना समय व्यर्थ गंवाते रहे हैं ! अब यह आगे भी आपके अपने लिए लिए निर्णय से ही तय होगा ! यही आपका सबसे बडा इन्वेस्टमेंट होगा और बाकी के इन्वेस्टमेंट्स को घाटे से बचाए रखने की पक्की गारंटी भी ,,,, #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - अगर कोई व्यक्ति अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता, दुर्व्यवहार करता है अथवा असहाय अवस्था में उनका त्याग कर देता है तो निश्चय ही वह घृणा का पात्र होता है क्योंकि वह कभी उनका ऋण नहीं चुका सकता ! मातृभूमि का होता लेकिन माता-पिता से भी बड़ा ऋण है! अतः स्वदेश मे पल ्बढ कर,शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद स्वराष्ट्र को दयनीय स्थिति में छोड़़, लालच मे पड़कर विदेश को समृद्ध बनाना कहीं अधिक निंदनीय ಈ! अगर कोई व्यक्ति अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता, दुर्व्यवहार करता है अथवा असहाय अवस्था में उनका त्याग कर देता है तो निश्चय ही वह घृणा का पात्र होता है क्योंकि वह कभी उनका ऋण नहीं चुका सकता ! मातृभूमि का होता लेकिन माता-पिता से भी बड़ा ऋण है! अतः स्वदेश मे पल ्बढ कर,शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद स्वराष्ट्र को दयनीय स्थिति में छोड़़, लालच मे पड़कर विदेश को समृद्ध बनाना कहीं अधिक निंदनीय ಈ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - सनातन परंपरा आदिकाल से ही अन्य परंपराओं से महान इसलिए रही है कि इसके अनुयाइयों ने इसकी मर्यादा को प्रभावित करने वालों को गुणों की कसौटी पर रखा ! देव , दानव अथवा मानव सभी को उनके कर्मों के आधार पर स्थापित किया ! कर्मानुसार ही रावण ,कंस , नारद वशिष्ट , वाल्मिकी बुद्ध इंद्र चंद्र आदि सबको पुरस्कृत , दंडित एवं बहिष्कृत करने का विधान किया ! लेकिन अफसोस कि आज के सनातनी लोग गुण नहीं जाति को प्रथम मानने लगे हैं ! सनातन परंपरा आदिकाल से ही अन्य परंपराओं से महान इसलिए रही है कि इसके अनुयाइयों ने इसकी मर्यादा को प्रभावित करने वालों को गुणों की कसौटी पर रखा ! देव , दानव अथवा मानव सभी को उनके कर्मों के आधार पर स्थापित किया ! कर्मानुसार ही रावण ,कंस , नारद वशिष्ट , वाल्मिकी बुद्ध इंद्र चंद्र आदि सबको पुरस्कृत , दंडित एवं बहिष्कृत करने का विधान किया ! लेकिन अफसोस कि आज के सनातनी लोग गुण नहीं जाति को प्रथम मानने लगे हैं ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - क्या तुम्हें अब भी नहीं लगता कि सच्चा शुकून सिर्फ प्रेम एवं असहायों की मदद करने से ही मिलता है ? लालच में पड़कर किसी का जीवन और हक छीनने से नहीं फिर इसे गलत मानकर अपना रास्ता बदल क्यों नहीं लेते ? स्वयं को परिपूर्ण करने का एक मात्र उपाय यही है ٩٠ संपूर्ण जगत के संसाधनों को पाकर भी अधूरे रह जाओगे ! क्या तुम्हें अब भी नहीं लगता कि सच्चा शुकून सिर्फ प्रेम एवं असहायों की मदद करने से ही मिलता है ? लालच में पड़कर किसी का जीवन और हक छीनने से नहीं फिर इसे गलत मानकर अपना रास्ता बदल क्यों नहीं लेते ? स्वयं को परिपूर्ण करने का एक मात्र उपाय यही है ٩٠ संपूर्ण जगत के संसाधनों को पाकर भी अधूरे रह जाओगे ! - ShareChat