ડો અબ્દુલ ગની મહેસાણીયા
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ડો અબ્દુલ ગની મહેસાણીયા
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હું શેરચેટ ને પ્રેમ કરું છુ.
#सोचने वाली बात #points to ponder #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* *અજ્ઞાનીઓ સાથે કઈ રીતે વર્તન કરવું તે પણ આપણને ઇસ્લામ ,કુર આન શીખવે છે. અલ્લાહ મને અને આ પણ સૌને અમલની તોફીક આપે.આમિન.* ૨૮/૪/૨૬
सोचने वाली बात - *भावार्थः* एक सच्चे आस्तिक की * पहचान उसका अहंकार मुक्त होना है। जब कोई उनसे दुर्व्यवहार करता है, तो वे पलटकर नहीं करते, बल्कि बुराई शांति और गरिमा के साथ जवाब देते గే **(3)  Quran*सूरा अल-्कसस (28.55)1 ** ४और जब वे व्यर्थ (बुरी) बार्तें सुनते हैं, तो उससे मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं, हमारे लिए लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे  कर्म। तुम पर शांति हो; 5R हम अज्ञानिरयों का साथ नहीं चाहते | १*  *भावार्थः* यह आयत * आत्म-सम्मान औ tcर सीमाएं तय करने पर जोर देती है। नेक लोग फालतू की बहस या गाली-गलौज में अपना समय नष्ट नहीं करते, बल्कि अपने काम से काम रखते हैं और दूसरों लिए भी शांति की दुआ करते हैं। چ *भावार्थः* एक सच्चे आस्तिक की * पहचान उसका अहंकार मुक्त होना है। जब कोई उनसे दुर्व्यवहार करता है, तो वे पलटकर नहीं करते, बल्कि बुराई शांति और गरिमा के साथ जवाब देते **(3)  Quran*सूरा अल-्कसस (28.55)1 ** ४और जब वे व्यर्थ (बुरी) बार्तें सुनते हैं, तो उससे मुंह मोड़ लेते हैं और कहते हैं, हमारे लिए लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे  कर्म। तुम पर शांति हो; 5R हम अज्ञानिरयों का साथ नहीं चाहते | १*  *भावार्थः* यह आयत * आत्म-सम्मान औ tcर सीमाएं तय करने पर जोर देती है। नेक लोग फालतू की बहस या गाली-गलौज में अपना समय नष्ट नहीं करते, बल्कि अपने काम से काम रखते हैं और दूसरों लिए भी शांति की दुआ करते हैं। چ - ShareChat
*અજ્ઞાનીઓ સાથે કઈ રીતે વર્તન કરવું તે પણ આપણને ઇસ્લામ ,કુર આન શીખવે છે. અલ્લાહ મને અને આ પણ સૌને અમલની તોફીક આપે.આમિન.* ૨૮/૪/૨૬ #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion #islam guide us in every field of life #points to ponder #सोचने वाली बात
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - *सच्चे ईमान वालों का चरित्रः धैर्य, क्षमा और विनम्रता* 28/4/26 (१) Qur'an*सूरा अल-अराफ़ (7:199)* ४क्षमा को अपनाओ, भलाई का हुक्म दो और अज्ञानियों से किनारा कर लो।"*  *भावार्थः* यह आयत हमें सिखाती * है कि की गलतियों को माफ दूसरों करना, समाज में अच्छाई को बढ़ावा देना और मूर्खतापूर्ण तर्कों में फंसने के बजाय शांति से पीछे हट जाना ही श्रेष्ठ मार्ग है। Quran*सूरा अल-्फुरकान (2) (25.63)*| ४और रहमान (परम कृपालु) के सच्चे बंदे वे हैं जो धरती पर विनम्रता के साथ चलते हैं, और जब अज्ञानी उनसे (कठोरता से) बात करते हैं, तो वे कहते हैंः सलाम' (शांति) [ * *सच्चे ईमान वालों का चरित्रः धैर्य, क्षमा और विनम्रता* 28/4/26 (१) Qur'an*सूरा अल-अराफ़ (7:199)* ४क्षमा को अपनाओ, भलाई का हुक्म दो और अज्ञानियों से किनारा कर लो।"*  *भावार्थः* यह आयत हमें सिखाती * है कि की गलतियों को माफ दूसरों करना, समाज में अच्छाई को बढ़ावा देना और मूर्खतापूर्ण तर्कों में फंसने के बजाय शांति से पीछे हट जाना ही श्रेष्ठ मार्ग है। Quran*सूरा अल-्फुरकान (2) (25.63)*| ४और रहमान (परम कृपालु) के सच्चे बंदे वे हैं जो धरती पर विनम्रता के साथ चलते हैं, और जब अज्ञानी उनसे (कठोरता से) बात करते हैं, तो वे कहते हैंः सलाम' (शांति) [ * - ShareChat
*અજ્ઞાનીઓ સાથે કઈ રીતે વર્તન કરવું તે પણ આપણને ઇસ્લામ ,કુર આન શીખવે છે. અલ્લાહ મને અને આ પણ સૌને અમલની તોફીક આપે.આમિન.* ૨૮/૪/૨૬ #islam guide us in every field of life #points to ponder #सोचने वाली बात #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?*
islam guide us in every field of life - "Grace Over Anger: * The Way of the Righteous" %The Character of True Believers: Patience, Forgiveness, and Humility" 28/4/26 (1)Qur'an 7:199 Take to forgiveness, enjoin what is good, and turn away from the ignorant ' (2)Qur'an 25:63 cAnd the servants of the Most Merciful are those who walk upon the earth humbly, and when the ignorant address them harshly, they say: Peace'" (3)* Qur'an 28:55* *And when they hear ill speech, they turn away from it and say, For us are our deeds, and for you are your deeds Peace be upon you; we seek not the ignorant '" "Grace Over Anger: * The Way of the Righteous" %The Character of True Believers: Patience, Forgiveness, and Humility" 28/4/26 (1)Qur'an 7:199 Take to forgiveness, enjoin what is good, and turn away from the ignorant ' (2)Qur'an 25:63 cAnd the servants of the Most Merciful are those who walk upon the earth humbly, and when the ignorant address them harshly, they say: Peace'" (3)* Qur'an 28:55* *And when they hear ill speech, they turn away from it and say, For us are our deeds, and for you are your deeds Peace be upon you; we seek not the ignorant '" - ShareChat
*આ વાતો આપણને 1447 વરસ પહેલા બતાવવામાં આવી છે. એ સમયે પણ સ્ત્રીઓ આવી વાતો પૂછવામાં સંકોચ કરતી ન હતી. અને સભ્યતાથી પૂછતી અને વર્ણવતી હતી. જરા વિચારો...* *Islam is practical,too...* #points to ponder #सोचने वाली बात #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?*
points to ponder - 17999999)94199 (३) वैवाहिक प्रेम और साथ ** (Companionship) xx (रज़ियल्लाहु हज़रत उम्म सलमा अन्हा) से रिवायत हैः "जब मैं नबी (५६) के साथ एक ही ऊनी चादर के नीचे लेटी हुई थी, तो मुझे मासिक धर्म (Menses) शुरू हो गया। मैं से बाहर निकल गई और ತಳ gI मासिक धर्म के कपड़े पहन 3=#(;) gஅ, 'I तुम्हें निफास (मासिक धर्म) आ गया है?' मैंने जवाब दिया, 'हाँ।' फिर उन्होंने मुझे बुलाया और अपने साथ उसी चादर के नीचे सुला लिया।" *संदर्भः* सहीह अल-बुखारी २९८ * *प्रमुख बिंदुः* *सादगीः* पैगंबर ( le) का जीवन * सादगी से भरपूर था, जहाँ पति-पत्नी एक ही बर्तन से पानी साझा करते थे 17999999)94199 (३) वैवाहिक प्रेम और साथ ** (Companionship) xx (रज़ियल्लाहु हज़रत उम्म सलमा अन्हा) से रिवायत हैः "जब मैं नबी (५६) के साथ एक ही ऊनी चादर के नीचे लेटी हुई थी, तो मुझे मासिक धर्म (Menses) शुरू हो गया। मैं से बाहर निकल गई और ತಳ gI मासिक धर्म के कपड़े पहन 3=#(;) gஅ, 'I तुम्हें निफास (मासिक धर्म) आ गया है?' मैंने जवाब दिया, 'हाँ।' फिर उन्होंने मुझे बुलाया और अपने साथ उसी चादर के नीचे सुला लिया।" *संदर्भः* सहीह अल-बुखारी २९८ * *प्रमुख बिंदुः* *सादगीः* पैगंबर ( le) का जीवन * सादगी से भरपूर था, जहाँ पति-पत्नी एक ही बर्तन से पानी साझा करते थे - ShareChat
*આ વાતો આપણને 1447 વરસ પહેલા બતાવવામાં આવી છે. એ સમયે પણ સ્ત્રીઓ આવી વાતો પૂછવામાં સંકોચ કરતી ન હતી. અને સભ્યતાથી પૂછતી અને વર્ણવતી હતી. જરા વિચારો...* *Islam is practical,too...* #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion #islam guide us in every field of life #सोचने वाली बात #points to ponder
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - यह सुंदर हदीसें ह्में जीवन के विभिन्न पहलुओं - प्रचार, पवित्रता और वैवाहिक प्रेम -पर मार्गदर्शन प्रदान*्करती हैं। नबवी मार्गदर्शनः प्रचार, पवित्रता और साथ* (१) उपदेश और प्रचार xx (Preaching) ** अल्लाह के रसूल (e७ls) ने > फरमायाः *"मेरी ओर से (लोगों को) पहुँचाओ , चाहे वह एक ही आयत (যা নান) নসরী ন মী ["** *संदर्भः* सहीह अल-बुखारी * 3461, 7188 (२) *पवित्रता और सादगी (Purity) ** (रज़ियल्लाहु हज़रत आयशा अन्हा) से रिवायत हैः "मैं और नबी (i७ls) 'फ़रक' नामक एक ही बर्तन से (पानी लेकर) गुस्ल (स्नान) किया करते थे।" यह सुंदर हदीसें ह्में जीवन के विभिन्न पहलुओं - प्रचार, पवित्रता और वैवाहिक प्रेम -पर मार्गदर्शन प्रदान*्करती हैं। नबवी मार्गदर्शनः प्रचार, पवित्रता और साथ* (१) उपदेश और प्रचार xx (Preaching) ** अल्लाह के रसूल (e७ls) ने > फरमायाः *"मेरी ओर से (लोगों को) पहुँचाओ , चाहे वह एक ही आयत (যা নান) নসরী ন মী ["** *संदर्भः* सहीह अल-बुखारी * 3461, 7188 (२) *पवित्रता और सादगी (Purity) ** (रज़ियल्लाहु हज़रत आयशा अन्हा) से रिवायत हैः "मैं और नबी (i७ls) 'फ़रक' नामक एक ही बर्तन से (पानी लेकर) गुस्ल (स्नान) किया करते थे।" - ShareChat
#points to ponder #सोचने वाली बात #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?*
points to ponder - (3)*Narrated Um Salama:* laying with While | was the Prophet (;) under a single woolen sheet, got the menses. | slipped away and put on the clothes for menses. He said, "Have you got "Nifas" (menses)?" | replied, "Yes" He then called me and made me lie with him under the same sheet: 27/4/26 Reference : Sahih al-Bukhari 298 9:47 am Islam guide us in every field of life. Prophetic Guidance: On Preaching; Purity, and Companionship 27/4/26 (3)*Narrated Um Salama:* laying with While | was the Prophet (;) under a single woolen sheet, got the menses. | slipped away and put on the clothes for menses. He said, "Have you got "Nifas" (menses)?" | replied, "Yes" He then called me and made me lie with him under the same sheet: 27/4/26 Reference : Sahih al-Bukhari 298 9:47 am Islam guide us in every field of life. Prophetic Guidance: On Preaching; Purity, and Companionship 27/4/26 - ShareChat
#*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion #islam guide us in every field of life #सोचने वाली बात #points to ponder
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - Islam guide us in every field of life. Prophetic Guidance: On Preaching, Purity, and Companionship 27/4/26 (1)The Prophet (#) said, "Convey (my teachings) to the people even if it were a single sentence Reference Sahih: al-Bukhari 3461 Reference : Sahih al-Bukhari 7188 (2)*Narrated Aisha:* The Prophet (;y and | used to take a bath from a single] pot called 'Faraq' Referencel Sahih al-Bukhari 250 Islam guide us in every field of life. Prophetic Guidance: On Preaching, Purity, and Companionship 27/4/26 (1)The Prophet (#) said, "Convey (my teachings) to the people even if it were a single sentence Reference Sahih: al-Bukhari 3461 Reference : Sahih al-Bukhari 7188 (2)*Narrated Aisha:* The Prophet (;y and | used to take a bath from a single] pot called 'Faraq' Referencel Sahih al-Bukhari 250 - ShareChat
#points to ponder #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion #सोचने वाली बात #*આપણે વિચારીશું ખરા?*
points to ponder - "इस्लाम सरल है=इसे उसी तरह बनाए रखें।॰ ॰इस्लाम आसानी सिखाता है, कठिनाई नहीं।" 25/4/26 *्नबी करीम (g७ls) ने फरमायाः* "बेशक दीन (धर्म) बहुत आसान है, > और जो कोई भी अपने ऊपर दीन के ೫೯ಕ से ज़्यादा सख्ती करेगा , মামলী वह उस पर (लगातार) कायम नहीं रह पाएगा| इसलिए अपने आप को चरमपंथ (Extremism) से बचाओ , बल्कि बीच का रास्ता अपनाओ और पूर्णता के करीब पहुँचने की कोशिश करो। खुश हो जाओ कि तुम्हें इसका सवाब (पुरस्कार) मिलेगा; और सुबह, दोपहर और रात के आखिरी हिस्सों में इबादत के ज़रिए (अल्लाह से) मदद हासिल करो।" (संदर्भः सहीह अल-बुखारी, हदीस 39) "इस्लाम सरल है=इसे उसी तरह बनाए रखें।॰ ॰इस्लाम आसानी सिखाता है, कठिनाई नहीं।" 25/4/26 *्नबी करीम (g७ls) ने फरमायाः* "बेशक दीन (धर्म) बहुत आसान है, > और जो कोई भी अपने ऊपर दीन के ೫೯ಕ से ज़्यादा सख्ती करेगा , মামলী वह उस पर (लगातार) कायम नहीं रह पाएगा| इसलिए अपने आप को चरमपंथ (Extremism) से बचाओ , बल्कि बीच का रास्ता अपनाओ और पूर्णता के करीब पहुँचने की कोशिश करो। खुश हो जाओ कि तुम्हें इसका सवाब (पुरस्कार) मिलेगा; और सुबह, दोपहर और रात के आखिरी हिस्सों में इबादत के ज़रिए (अल्लाह से) मदद हासिल करो।" (संदर्भः सहीह अल-बुखारी, हदीस 39) - ShareChat