Kishan Lal Sharma
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#जयगुरुदेव नाम प्रभु का #जयगुरुदेव
जयगुरुदेव नाम प्रभु का - सृष्टि का रहस्य क्या है ? स्वामी जी गूढ़ भेदों को संसार की सत्ता को समझना चाहते हैं तो इसके 4 हम समझ सकते। ऐसा करने से इसके नतीजों के गलत के द्वारा नहीं तर्क की संभावना होती है। संसार के आदि और अन्त का निर्णय वैज्ञानिक नर्हीं सकते हैं कि सृष्टि कैसे बनाई गई, क्यों बनाई गई, संसार  केर सकते, नवे बता पर निर्भर रहने से fa बल बुराइयां क्यों हैं और कहां से आई করতল সাং লক ম बुद्धि, विचार जा सकता हे। परमात्मा 8 எ का सच्चा ज्ञान मालिक मंजिलें तय करके परे एक ऐसा भी मार्ग है जिस पर चलकर हम ऊंची सृष्टिकर्ता का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैर का॰ इस योनियों का चक्र, कर्मों का कानून चौरासी लाख सृष्टि आत्मा, परमात्मा , बातें हैं जिन पर एक बार तो का जीवन आदि ऐसी गूढ़ जन्म मरण কহলা ৪ী পউযা | क बाद गनुष्य को संतोंब मदाल्माओं की शहादत के अनुसार विश्वास्न चाहिए ओर इस व ज्ञान प्राप्त करना शनुष्य को खुद अपने आप अनुभव आन्तरिक आंख यानी इसका अपनी मार्ग भी हैमें औोनों आखाोँ क पीछे जीवाल्मा बैठी " अनुभव  प्राप्त  करने को ব্রা में दोनों जीवात्मा शरीर तीसरी आंख, अथवा दिव्य की आंख खोलें मनुष्य 31 , आन्तरिक उसमें एक आंख है उसी को का जिक्र सभी है। उस आंख সকলী जी महाराज ने लिखा है कि॰ खोली G कहते वह आंख ೯ महात्माओं गोस्वामी किया है। रामायण में भी॰ जोती, श्री गुरु पद नख मणि गण எளிப fa और अन्त से आदि दृष्टि fa सुमिरत तक से अन्त आदि गया है। आप जो सन्त सतगुरु कहा पूरे गुरु की तलाश करें को ही কা স্াল रखता है। ऐसे महापुरुष सृष्टि का रहस्य क्या है ? स्वामी जी गूढ़ भेदों को संसार की सत्ता को समझना चाहते हैं तो इसके 4 हम समझ सकते। ऐसा करने से इसके नतीजों के गलत के द्वारा नहीं तर्क की संभावना होती है। संसार के आदि और अन्त का निर्णय वैज्ञानिक नर्हीं सकते हैं कि सृष्टि कैसे बनाई गई, क्यों बनाई गई, संसार  केर सकते, नवे बता पर निर्भर रहने से fa बल बुराइयां क्यों हैं और कहां से आई করতল সাং লক ম बुद्धि, विचार जा सकता हे। परमात्मा 8 எ का सच्चा ज्ञान मालिक मंजिलें तय करके परे एक ऐसा भी मार्ग है जिस पर चलकर हम ऊंची सृष्टिकर्ता का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैर का॰ इस योनियों का चक्र, कर्मों का कानून चौरासी लाख सृष्टि आत्मा, परमात्मा , बातें हैं जिन पर एक बार तो का जीवन आदि ऐसी गूढ़ जन्म मरण কহলা ৪ী পউযা | क बाद गनुष्य को संतोंब मदाल्माओं की शहादत के अनुसार विश्वास्न चाहिए ओर इस व ज्ञान प्राप्त करना शनुष्य को खुद अपने आप अनुभव आन्तरिक आंख यानी इसका अपनी मार्ग भी हैमें औोनों आखाोँ क पीछे जीवाल्मा बैठी " अनुभव  प्राप्त  करने को ব্রা में दोनों जीवात्मा शरीर तीसरी आंख, अथवा दिव्य की आंख खोलें मनुष्य 31 , आन्तरिक उसमें एक आंख है उसी को का जिक्र सभी है। उस आंख সকলী जी महाराज ने लिखा है कि॰ खोली G कहते वह आंख ೯ महात्माओं गोस्वामी किया है। रामायण में भी॰ जोती, श्री गुरु पद नख मणि गण எளிப fa और अन्त से आदि दृष्टि fa सुमिरत तक से अन्त आदि गया है। आप जो सन्त सतगुरु कहा पूरे गुरु की तलाश करें को ही কা স্াল रखता है। ऐसे महापुरुष - ShareChat
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जयगुरुदेव नाम प्रभु का - 9:20 गुरु का हाथ और हमारा विश्वास जब हम अपनी समस्याओं का बोझ खुद उठाते हैं, तो थक जाते हैं। पर जब हम सब कुछ गुरु महाराज को सौंप देते हैं, तो वह रास्ता खुद बना देते हैं। बस अपनी 'दीनता' और ' विश्वास' बनाए रखें, मालिक 96 9:21 कभी हारने नहीं देगा। 9:20 गुरु का हाथ और हमारा विश्वास जब हम अपनी समस्याओं का बोझ खुद उठाते हैं, तो थक जाते हैं। पर जब हम सब कुछ गुरु महाराज को सौंप देते हैं, तो वह रास्ता खुद बना देते हैं। बस अपनी 'दीनता' और ' विश्वास' बनाए रखें, मालिक 96 9:21 कभी हारने नहीं देगा। - ShareChat
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जयगुरुदेव नाम प्रभु का - यहजो पिन्डी यह   छोट # = पैमाने पर काल ही है यह काल का कारिन्दा  हैजो प्रत्येक आत्मा के साथ लगा दिया गया है ताकि यह आत्मा को तीसरे तिल से रखे और संसार में उलझाये रखे। दूर D साधक को एकाग्रता रूहानी तरक्की  लिये जरूरी है जो जो अच्छे अभ्यासी " ক্ী  में भजन करते हैं॰ एकांत ৮ বা কান में बैठने से एकाग्रता जल्दी आती है। D जब हम गुरु और सत्संग से दूर बैठते हैं तब दुनिया अप्रत्यक्ष और अदृश्य रूप से हम पर इतना अधिक प्रभाव डालती  भजन  के और 8 க ரa 7 सुमिरन लिये समय देने पर भी हम अक्सर निराश शुष्क और सूना महसूस करने लगते हैं । वह आत्मा है॰जो स्थूल D गुरु मुख लिंग सूक्ष्म और कारण शरीरों को साधना  है और पार ब्रह्म में पहुंच करक उतार चुकी T1 ೯/ ० सत्संगी वह है जिसने किसी सतगुरु और 0 # =IHT f ह भजन करता है। सुमिरन एक उत्तम रसायन सुमिरन ০ লাস কা यह सब रोगों का इलाज है यह आत्मा ह का आत्मिक भोजन है सुमिरन के द्वारा जब यह आत्मा अपने बिखरे प्रकाश को एकत्र कर लेती है तब उसकी आंख यानि दिव्य खल जाती ह और वह अपना आत्म आख साक्षात्कार करती है। यहजो पिन्डी यह   छोट # = पैमाने पर काल ही है यह काल का कारिन्दा  हैजो प्रत्येक आत्मा के साथ लगा दिया गया है ताकि यह आत्मा को तीसरे तिल से रखे और संसार में उलझाये रखे। दूर D साधक को एकाग्रता रूहानी तरक्की  लिये जरूरी है जो जो अच्छे अभ्यासी " ক্ী  में भजन करते हैं॰ एकांत ৮ বা কান में बैठने से एकाग्रता जल्दी आती है। D जब हम गुरु और सत्संग से दूर बैठते हैं तब दुनिया अप्रत्यक्ष और अदृश्य रूप से हम पर इतना अधिक प्रभाव डालती  भजन  के और 8 க ரa 7 सुमिरन लिये समय देने पर भी हम अक्सर निराश शुष्क और सूना महसूस करने लगते हैं । वह आत्मा है॰जो स्थूल D गुरु मुख लिंग सूक्ष्म और कारण शरीरों को साधना  है और पार ब्रह्म में पहुंच करक उतार चुकी T1 ೯/ ० सत्संगी वह है जिसने किसी सतगुरु और 0 # =IHT f ह भजन करता है। सुमिरन एक उत्तम रसायन सुमिरन ০ লাস কা यह सब रोगों का इलाज है यह आत्मा ह का आत्मिक भोजन है सुमिरन के द्वारा जब यह आत्मा अपने बिखरे प्रकाश को एकत्र कर लेती है तब उसकी आंख यानि दिव्य खल जाती ह और वह अपना आत्म आख साक्षात्कार करती है। - ShareChat
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जयगुरुदेव नाम प्रभु का - दीनता' - रूहानी खजाना "झुकता वही है जिसमें जान होती है, अकड़ना तो मुर्दे की पहचान होती है।" मेरे प्रिय प्रेमियों , भक्ति के बाज़ार में सब कुछ मिल सकता है, पर ' दीनता' खरीदी नहीं जा सकती। यह तो गुरु की दया का वो झरना है जो केवल বাল हृदयों झुकने में बहता है। गुरु महाराज का वो अनमोल दृष्टांतः सोचिए! कुएं से पानी वही बाल्टी ला पाती है जो है। जो अकड़कर झुकती ऊपर रहती है, वह खाली रह जाती है। गुरु की रहमतों से भरने का भी यही एक गुप्त रास्ता है। सच्ची दीनता के तीन स्तंभः मौन न्यायः किसी की =4<#[, बुराई  1 अपनी कमियों पर नज़र रखना। अहंकार का त्यागः सबको खुद से 2 श्रेष्ठ समझना। की कृपा, समर्पणः सफलता गुरु 3 विफलता अपनी कमी।| दीनता' - रूहानी खजाना "झुकता वही है जिसमें जान होती है, अकड़ना तो मुर्दे की पहचान होती है।" मेरे प्रिय प्रेमियों , भक्ति के बाज़ार में सब कुछ मिल सकता है, पर ' दीनता' खरीदी नहीं जा सकती। यह तो गुरु की दया का वो झरना है जो केवल हृदयों झुकने में बहता है। गुरु महाराज का वो अनमोल दृष्टांतः सोचिए! कुएं से पानी वही बाल्टी ला पाती है जो है। जो अकड़कर झुकती ऊपर रहती है, वह खाली रह जाती है। गुरु की रहमतों से भरने का भी यही एक गुप्त रास्ता है। सच्ची दीनता के तीन स्तंभः मौन न्यायः किसी की =4<#[, बुराई  1 अपनी कमियों पर नज़र रखना। अहंकार का त्यागः सबको खुद से 2 श्रेष्ठ समझना। की कृपा, समर्पणः सफलता गुरु 3 विफलता अपनी कमी।| - ShareChat
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जयगुरुदेव नाम प्रभु का - जयगुरुदेव I। Ik Jaigurude TheGreatMaster यह बाबा जो इस मंच पर बैठकर बोलेगा, वह सब सत्य होगा इसमें दो राय नहीं है। यह मेरा  न्याय ह। कोईभी बात ऐसी नहीं जो कि सत्य न होे। सिर्फ समय की प्रतीक्षा करें। आगे आपको ऐसा देखने को मिलेगा कि गाय काटने वालों की बात तो दूर र्ही, यदि किसी ने बकरी भी काटीतो उसके हाथ और पांच काट लिए जाएंगे। अंडा, मौंस, मछली बेचता हुआ जो भी दिखाई पड़ा, उसे कडी सजा भोगनी पड़ेगी। शराब आदि दुकानें नजर नहीं आएंगी। क जायगुरुदेव नी महाराज  परम पन्यचाचा (3laR? >col `cl ' I972 drl IsJio I) जयगुरुदेव I। Ik Jaigurude TheGreatMaster यह बाबा जो इस मंच पर बैठकर बोलेगा, वह सब सत्य होगा इसमें दो राय नहीं है। यह मेरा  न्याय ह। कोईभी बात ऐसी नहीं जो कि सत्य न होे। सिर्फ समय की प्रतीक्षा करें। आगे आपको ऐसा देखने को मिलेगा कि गाय काटने वालों की बात तो दूर र्ही, यदि किसी ने बकरी भी काटीतो उसके हाथ और पांच काट लिए जाएंगे। अंडा, मौंस, मछली बेचता हुआ जो भी दिखाई पड़ा, उसे कडी सजा भोगनी पड़ेगी। शराब आदि दुकानें नजर नहीं आएंगी। क जायगुरुदेव नी महाराज  परम पन्यचाचा (3laR? >col `cl ' I972 drl IsJio I) - ShareChat
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जयगुरुदेव नाम प्रभु का - सदाचारी बालसघ (२८ जून २००६ जुलाई २००६) ম & शाकाहारी मथुरा आश्रम दैनिक लघु प्रवचन जयगुरुदेव जी [ बाबा महाराज द्वारा ) ये हे॰  परमार्थ उनसे মিল जाय Fl তe সচানা Q करना वो महापुरुष यही तो याद दिलाते हें कि भजन करते रहना, सत्संग वाहिए रहना ओर संसार में मत फसना  छोटे बच्चों में छल कपट नही रहता सुनते ह।वो बड़े भोले रहते हैं। जब बड़े हो जाते हैं॰तो उनमें छल कपट अभियान आ जाता है। शब्दों को पकड़ना बहुत जरूरी है। अगर शब्द छूट गया तो में नही आएगा। समझ कुछ बिहूना  गुरु माथे से ऊतरे शब्द होय। ताको काल घर्सींटिहे रोक सक ना कोय।। जैसे मछली को पानी से प्यार होता है। उसी तरह से प्रेमी को गुरु  से प्यार होना चाहिए। जब प्यार करने लगोगे तब दीनता दीनता आएगी दीदार कहने எ f मालिक নন होना चाहिए। मालिक को आएगी है दया करेगा| लेकिन जब प्यार ही नही है ऐसे ही आप आओगे रहमान नही करेगा तोवह हर चीज अपना तरीका होता है। दया 01 नाओगे आप धर्म से अलग हो गए कर्म से अलग हो गए॰  महात्माओं से लग हो गए तो आप का कोई रक्षक नहीं। जब प्यार करोगे 3ITq 37 वो नाम डोरी पकड़ा देंगे वही सुरत का आधार है वही सुरत की रक्षा जब नाम डोरी नहीं पकड़ोगे तो तुम्हें कैसे मालूम होगा कि सुरत रेगा भेदी मिलेगा तो कर आई। जव वह कहेगा कि यह दरवाजा है ठसे उतर पर बैठकर पुकार करो। खटखटाओ इस जब सच्ची पुकार होती है মেকী दया तत्काल होती है। लेकिन बैठकर हृदय से दीन भाव दरवाजे पर करनी होगी। सुरत का दरवाजा अन्दर है वर्हीं से बह पुकार करती पुकार  ই কি ই মালিক বযা कर- हम युग युग से बिछुड़े हैं॰ हमें मिल जा। यह की करामात है कि सुरत को नाम से जोड़ दिया। महापुरुषों सदाचारी बालसघ (२८ जून २००६ जुलाई २००६) ম & शाकाहारी मथुरा आश्रम दैनिक लघु प्रवचन जयगुरुदेव जी [ बाबा महाराज द्वारा ) ये हे॰  परमार्थ उनसे মিল जाय Fl তe সচানা Q करना वो महापुरुष यही तो याद दिलाते हें कि भजन करते रहना, सत्संग वाहिए रहना ओर संसार में मत फसना  छोटे बच्चों में छल कपट नही रहता सुनते ह।वो बड़े भोले रहते हैं। जब बड़े हो जाते हैं॰तो उनमें छल कपट अभियान आ जाता है। शब्दों को पकड़ना बहुत जरूरी है। अगर शब्द छूट गया तो में नही आएगा। समझ कुछ बिहूना  गुरु माथे से ऊतरे शब्द होय। ताको काल घर्सींटिहे रोक सक ना कोय।। जैसे मछली को पानी से प्यार होता है। उसी तरह से प्रेमी को गुरु  से प्यार होना चाहिए। जब प्यार करने लगोगे तब दीनता दीनता आएगी दीदार कहने எ f मालिक নন होना चाहिए। मालिक को आएगी है दया करेगा| लेकिन जब प्यार ही नही है ऐसे ही आप आओगे रहमान नही करेगा तोवह हर चीज अपना तरीका होता है। दया 01 नाओगे आप धर्म से अलग हो गए कर्म से अलग हो गए॰  महात्माओं से लग हो गए तो आप का कोई रक्षक नहीं। जब प्यार करोगे 3ITq 37 वो नाम डोरी पकड़ा देंगे वही सुरत का आधार है वही सुरत की रक्षा जब नाम डोरी नहीं पकड़ोगे तो तुम्हें कैसे मालूम होगा कि सुरत रेगा भेदी मिलेगा तो कर आई। जव वह कहेगा कि यह दरवाजा है ठसे उतर पर बैठकर पुकार करो। खटखटाओ इस जब सच्ची पुकार होती है মেকী दया तत्काल होती है। लेकिन बैठकर हृदय से दीन भाव दरवाजे पर करनी होगी। सुरत का दरवाजा अन्दर है वर्हीं से बह पुकार करती पुकार  ই কি ই মালিক বযা कर- हम युग युग से बिछुड़े हैं॰ हमें मिल जा। यह की करामात है कि सुरत को नाम से जोड़ दिया। महापुरुषों - ShareChat
#जयगुरुदेव नाम प्रभु का #जयगुरुदेव
जयगुरुदेव नाम प्रभु का - जयगुरूदव Ono सुबह 9:२७ ५०० নাোদী তীা ন কটা ,,14444 *प्रभु के प्रेम को प्राप्त करना ही मनुष्य जीवन का मुख् ध्येय हे।इस बात को याद रखना चाहिए कि॰ সম্ভু ক্রী प्राप्ति गुल की कृमा ही से होगी।उनके   चिंतन मे चित्त रखो उनकी आज्ञा का पूरा ्पूरा पालन करो और उनसे  कुछ न मांगो केवल चरणों का आधार मांगों। जयगरुदेव मालिक जी जयगुरूदव Ono सुबह 9:२७ ५०० নাোদী তীা ন কটা ,,14444 *प्रभु के प्रेम को प्राप्त करना ही मनुष्य जीवन का मुख् ध्येय हे।इस बात को याद रखना चाहिए कि॰ সম্ভু ক্রী प्राप्ति गुल की कृमा ही से होगी।उनके   चिंतन मे चित्त रखो उनकी आज्ञा का पूरा ्पूरा पालन करो और उनसे  कुछ न मांगो केवल चरणों का आधार मांगों। जयगरुदेव मालिक जी - ShareChat
#जयगुरुदेव नाम प्रभु का #जयगुरुदेव
जयगुरुदेव नाम प्रभु का - उस 'घर' की सफाई और श्रृंगार किस काम का, जिसमें रहनेवाला जीव' ही भूखा और प्यासा हो..! ! यह ' शरीर' रुपी घर, जिसको हम रोज इतना सँवारते रहते हैं, तन्दुरुस्त रखते हैं. पर अंदर बैठी ' आत्मा' को भूखा और प्यासा रखते हैं.. ! ! आत्मा को उसकी खुराक और श्रंगार, (भजन सुमिरन) जरुर उसका मिले, इसका हमें अवश्य ख्याल रखन चाहिए.. ! ! प्रभु का पावन नाम 9೬೦೬ गुरुदेव जय उस 'घर' की सफाई और श्रृंगार किस काम का, जिसमें रहनेवाला जीव' ही भूखा और प्यासा हो..! ! यह ' शरीर' रुपी घर, जिसको हम रोज इतना सँवारते रहते हैं, तन्दुरुस्त रखते हैं. पर अंदर बैठी ' आत्मा' को भूखा और प्यासा रखते हैं.. ! ! आत्मा को उसकी खुराक और श्रंगार, (भजन सुमिरन) जरुर उसका मिले, इसका हमें अवश्य ख्याल रखन चाहिए.. ! ! प्रभु का पावन नाम 9೬೦೬ गुरुदेव जय - ShareChat
#जयगुरुदेव #जयगुरुदेव नाम प्रभु का
जयगुरुदेव - जयगुरुदेव ।। 1 @JaigurudevTheGreatMaster सोचते हो कि जो होगा देखा तुम क्यों  जाएगा , चले जायेंगे नरक सोचना आसान है पर सच तो ये है कि नरक की तकलीफ ऐसी है कि तुम बर्दाश्त नहीं कर सकोगे महात्माओं ने अपनी आंखों से देखा तभी तो बचाना तुमको  चाहते हैं। तुम पर दया करते हैं।  जयगुरुदेव जी महाराज परम संत बाबा जयगुरुदेव ।। 1 @JaigurudevTheGreatMaster सोचते हो कि जो होगा देखा तुम क्यों  जाएगा , चले जायेंगे नरक सोचना आसान है पर सच तो ये है कि नरक की तकलीफ ऐसी है कि तुम बर्दाश्त नहीं कर सकोगे महात्माओं ने अपनी आंखों से देखा तभी तो बचाना तुमको  चाहते हैं। तुम पर दया करते हैं।  जयगुरुदेव जी महाराज परम संत बाबा - ShareChat
#जयगुरुदेव नाम प्रभु का #जयगुरुदेव
जयगुरुदेव नाम प्रभु का - गुरु कहते हैं, जो आत्मा को जगा दे। जो अंतर में प्रकाश कर दे और जो आत्मा को नाम के साथ जोड़ दे, उसे गुरु कहते हैं। जयगुरुदेव जी महाराज बाबा गुरु कहते हैं, जो आत्मा को जगा दे। जो अंतर में प्रकाश कर दे और जो आत्मा को नाम के साथ जोड़ दे, उसे गुरु कहते हैं। जयगुरुदेव जी महाराज बाबा - ShareChat