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कैबिनेट मिशन (1946) के मुख्य बिंदु:उद्देश्य: भारत को स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करना और एक अंतरिम सरकार की स्थापना करना।संविधान सभा: संविधान निर्माण के लिए एक संविधान सभा का गठन किया जाना था, जिसमें 389 सदस्य होने थे (296 ब्रिटिश प्रांतों से और 93 देसी रियासतों से)।त्रि-स्तरीय संरचना: एक शिथिल संघ (Union of India) का प्रस्ताव था, जिसमें केंद्र के पास केवल रक्षा, विदेशी मामले और संचार विषय होने थे, जबकि बाकी विषय प्रांतों के पास रहने थे।समूहीकरण (Grouping): प्रांतों को तीन समूहों (A, B, C) में बांटा गया था।पाकिस्तान की अस्वीकृति: मिशन ने मुस्लिम लीग की एक अलग स्वतंत्र पाकिस्तान की मांग को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया था। #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #moj_content
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - संविधान सभा =] Constituent Assembly > कैबिनेट मिशन १९४६ :- इसी मिशन की योजना के आधार पर संविधान सभा का निर्माण हुआ | ये सभी ब्रिटिश संसद में कैबिनेट मंत्री थे  Note:- द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार आई ! प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली बने ! इन्हीं के समय कैबिनेट मिशन भारत आया ! संविधान सभा का निर्माण अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा अकाल संक्रमणीय সন যী ভ3া ! हर प्रांत एवं देसी रियासत को उनकी जनसंख्या के आधार पर शीटें आवरीत कि गयी! १० लाख जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि का प्रावधान था देसी रियासतों में प्रतिनिधित्व मनोनीत किया गया संविधान सभा में महिलाएं 15 SC 26 Follow @gk_shots_960 ST 33 संविधान सभा =] Constituent Assembly > कैबिनेट मिशन १९४६ :- इसी मिशन की योजना के आधार पर संविधान सभा का निर्माण हुआ | ये सभी ब्रिटिश संसद में कैबिनेट मंत्री थे  Note:- द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार आई ! प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली बने ! इन्हीं के समय कैबिनेट मिशन भारत आया ! संविधान सभा का निर्माण अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा अकाल संक्रमणीय সন যী ভ3া ! हर प्रांत एवं देसी रियासत को उनकी जनसंख्या के आधार पर शीटें आवरीत कि गयी! १० लाख जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि का प्रावधान था देसी रियासतों में प्रतिनिधित्व मनोनीत किया गया संविधान सभा में महिलाएं 15 SC 26 Follow @gk_shots_960 ST 33 - ShareChat
अगस्त प्रस्ताव (August Offer) – 1940 अगस्त प्रस्ताव 8 अगस्त 1940 को ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के लिए दिया गया एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव था। इसे भारत में बढ़ते स्वतंत्रता आंदोलन को शांत करने के लिए पेश किया गया था। उस समय द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था और ब्रिटेन को भारत के समर्थन की जरूरत थी। 🔹 मुख्य बिंदु: भारत को डोमिनियन स्टेटस (Dominion Status) देने का वादा किया गया (यानी भविष्य में स्वशासन)। युद्ध के बाद संविधान बनाने का अधिकार भारतीयों को देने की बात कही गई। वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में भारतीयों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव। किसी भी संविधान को लागू करने से पहले अल्पसंख्यकों की सहमति जरूरी बताई गई। 🔹 उद्देश्य: ब्रिटिश सरकार चाहती थी कि भारतीय नेता, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, युद्ध में उनका साथ दें। 🔹 प्रतिक्रिया: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि इसमें पूर्ण स्वतंत्रता का स्पष्ट वादा नहीं था। मुस्लिम लीग ने भी इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। 🔹 परिणाम: अगस्त प्रस्ताव असफल रहा, लेकिन इससे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और तेज हुआ। बाद में यही असंतोष आगे चलकर Individual Satyagraha (व्यक्तिगत सत्याग्रह) का कारण बना। #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #moj_content #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘
📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 - संविधान सभा =] ConstitueneAssembly3 अगस्त प्रस्ताव १९४० :- अगस्त प्रस्ताव १९४० के तहत पहली बार ब्रिटिश सरकार द्वारा इस मांग को स्वीकार किया गया ! इस समय द्वितीय विश्व युद्ध (१९३9 १९४५) प्रारंभ हो चुका था। कि युद्ध यह मांग आंशिक रूप से स्वीकार की गई , कहा गया के पश्चात भारत को डोमिनियन  स्टेट का दर्जा दे दिया जायेगा।| इस प्रस्ताव को कांग्रेस पार्टी द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। क्रिप्स मिशन १९४२ :- इसमें भी अगस्त प्रस्ताव को दोहराया! कांग्रेस पार्टी द्वारा इसे भी अस्वीकार कर दिया गया ! Follow @gk_shots_960 संविधान सभा =] ConstitueneAssembly3 अगस्त प्रस्ताव १९४० :- अगस्त प्रस्ताव १९४० के तहत पहली बार ब्रिटिश सरकार द्वारा इस मांग को स्वीकार किया गया ! इस समय द्वितीय विश्व युद्ध (१९३9 १९४५) प्रारंभ हो चुका था। कि युद्ध यह मांग आंशिक रूप से स्वीकार की गई , कहा गया के पश्चात भारत को डोमिनियन  स्टेट का दर्जा दे दिया जायेगा।| इस प्रस्ताव को कांग्रेस पार्टी द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। क्रिप्स मिशन १९४२ :- इसमें भी अगस्त प्रस्ताव को दोहराया! कांग्रेस पार्टी द्वारा इसे भी अस्वीकार कर दिया गया ! Follow @gk_shots_960 - ShareChat
1919 अधिनियम की मुख्य विशेषताएं (Montagu-Chelmsford Reforms):प्रांतों में द्वैध शासन (Diarchy in Provinces): प्रांतीय विषयों को दो भागों में बांटा गया - 'हस्तांतरित' (जिन पर मंत्री शासन करते थे) और 'आरक्षित' (जिन पर गवर्नर कार्यकारी परिषद के साथ शासन करते थे)।केंद्र में द्विसदनीय विधायिका (Bicameral Legislature): केंद्रीय विधानमंडल में अब दो सदन थे - उच्च सदन (राज्य परिषद) और निम्न सदन (केंद्रीय विधानसभा)।अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली: सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाते हुए सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियनों और यूरोपियों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र प्रदान किए गए।कार्यकारिणी में भारतीय सदस्य: वायसराय की 8 सदस्यीय कार्यकारी परिषद में 3 भारतीय सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य की गई।सीमित मताधिकार: संपत्ति, कर या शिक्षा के आधार पर लगभग 50 लाख लोगों को वोट देने का अधिकार मिला।लोक सेवा आयोग: भारत में एक लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया, जो 1926 में स्थापित हुआ।केंद्रीय और प्रांतीय विषय: पहली बार केंद्र और प्रांतों के बीच विषयों का विभाजन किया गया। 1935 के अधिनियम की मुख्य विशेषताएं और प्रावधान:अखिल भारतीय संघ (All India Federation): इसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों और देशी रियासतों को मिलाकर एक संघ बनाने का प्रस्ताव था।प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy): 1919 के अधिनियम के तहत प्रांतों में द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया और प्रांतों को अपने प्रशासनिक मामलों में स्वायत्तता दी गई।द्वैध शासन का हस्तांतरण: केंद्र स्तर पर द्वैध शासन प्रणाली (Reserved and Transferred Subjects) शुरू की गई।शक्तियों का विभाजन: केंद्र और प्रांतों के बीच शक्तियों का बंटवारा तीन सूचियों- संघीय सूची, प्रांतीय सूची और समवर्ती सूची में किया गया।संघीय न्यायालय (Federal Court): देश में एक संघीय न्यायालय की स्थापना का प्रावधान था, जो 1937 में स्थापित हुआ।विस्तारित मताधिकार: मतदाताओं की संख्या को बढ़ाकर लगभग 10% कर दिया गया। #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #moj_content #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - भारत में कखन शासन (1858~1947) Y१९१९ का अधिनियम :- मार्टेंगयू- चेम्सफोर्ड अधिनियम के नाम से भी जाना 1 मार्टेंगयू-भारत सचिव| चेम्सफोर्ड -वायसराय ! जाता है २. प्रांतो में द्वैध शासन की स्थापना ! ३. ब्रिटिश कर्मचारी का वेतन पुनः ब्रिटिश राजकोष से दिया जाने लगा ! ४. भारत में निर्वाचन पद्धति की शुरुआत ! +१९३५ का अधिनियम :- १. प्रांतो में द्वैध शासन समाप्त २. केंद्र में द्वैध शासन प्रारंभ ! ३. RBI की स्थापना 1 अप्रैल १९३५ ! ४. १९३५ में ही सुप्रीम कोर्ट को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया ! सुप्रीम कोर्ट ने कार्य करना प्रारंभ किया ! 5.19374 ६. १९३७ में वर्मा को भारत से पृथक किया गया ! ७. द्विसदनीय व्यवस्था प्रारंभ की गई ! ८. राज्य सचिव का पद समाप्त किया गया ! Follow @gk_shots_960 भारत में कखन शासन (1858~1947) Y१९१९ का अधिनियम :- मार्टेंगयू- चेम्सफोर्ड अधिनियम के नाम से भी जाना 1 मार्टेंगयू-भारत सचिव| चेम्सफोर्ड -वायसराय ! जाता है २. प्रांतो में द्वैध शासन की स्थापना ! ३. ब्रिटिश कर्मचारी का वेतन पुनः ब्रिटिश राजकोष से दिया जाने लगा ! ४. भारत में निर्वाचन पद्धति की शुरुआत ! +१९३५ का अधिनियम :- १. प्रांतो में द्वैध शासन समाप्त २. केंद्र में द्वैध शासन प्रारंभ ! ३. RBI की स्थापना 1 अप्रैल १९३५ ! ४. १९३५ में ही सुप्रीम कोर्ट को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया ! सुप्रीम कोर्ट ने कार्य करना प्रारंभ किया ! 5.19374 ६. १९३७ में वर्मा को भारत से पृथक किया गया ! ७. द्विसदनीय व्यवस्था प्रारंभ की गई ! ८. राज्य सचिव का पद समाप्त किया गया ! Follow @gk_shots_960 - ShareChat
1909 अधिनियम (मार्ले-मिंटो सुधार) की मुख्य विशेषताएं:सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व: मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की गई, जिसका अर्थ था कि मुस्लिम सदस्यों का चुनाव केवल मुस्लिम मतदाता ही कर सकते थे।परिषद का विस्तार: केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों के आकार में वृद्धि की गई। केंद्रीय परिषद में सदस्यों की संख्या 16 से बढ़ाकर 60 कर दी गई।भारतीयों को शामिल करना: पहली बार वायसराय और गवर्नर की कार्यकारी परिषदों के साथ भारतीयों को जोड़ा गया। सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने।सीमित चुनाव प्रणाली: प्रांतीय विधान परिषदों के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय निकायों द्वारा किया जाता था, और वे केंद्रीय व्यवस्थापिका के सदस्यों का चुनाव करते थे।बढ़े हुए अधिकार: सदस्यों को बजट पर चर्चा करने, प्रश्न पूछने और अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति दी गई।इस अधिनियम के प्रमुख प्रभाव:सांप्रदायिकता को बढ़ावा: इस अधिनियम ने भारतीय राजनीति में सांप्रदायिकता को संस्थागत रूप दिया।नरमपंथियों को संतुष्ट करने का प्रयास: इसका उद्देश्य नरमपंथी राष्ट्रवादियों को रियायतें देकर भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करना था।सिद्धांत: लॉर्ड मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक' कहा जाने लगा।नोट: इस समय जॉन मार्ले भारत के राज्य सचिव और लॉर्ड मिंटो भारत के वायसराय थे। #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #moj_content #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘
📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 - भारत में कखन शासन (1858~1947) ८१८९२ का भारत परिषद अधिनियम পঙলী নাং সাবন ম নিববিন থাল্ ব্ধা সযীয ! 1 २. भारतीयों को बजट पर बहस करने का अधिकार प्राप्त ! +l९०9 का अधिनियम :- 1. इसे Marle Minto के नाम से जाना जाता है ! मुसलमानों के लिए एक अलग निर्वाचन मंडल 2. की व्यवस्था की गई ! ३. गांधी जी ने इसे अधिनियम का सर्वनाश करने वाला कहा है ! पहले भारतीय प्रथम विधि सदस्य सत्येंद्र सिंहा ! 4. Follow Ogk_shots_960 भारत में कखन शासन (1858~1947) ८१८९२ का भारत परिषद अधिनियम পঙলী নাং সাবন ম নিববিন থাল্ ব্ধা সযীয ! 1 २. भारतीयों को बजट पर बहस करने का अधिकार प्राप्त ! +l९०9 का अधिनियम :- 1. इसे Marle Minto के नाम से जाना जाता है ! मुसलमानों के लिए एक अलग निर्वाचन मंडल 2. की व्यवस्था की गई ! ३. गांधी जी ने इसे अधिनियम का सर्वनाश करने वाला कहा है ! पहले भारतीय प्रथम विधि सदस्य सत्येंद्र सिंहा ! 4. Follow Ogk_shots_960 - ShareChat
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1861 में ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के लिए तीन महत्वपूर्ण अधिनियम पारित किए गए थे, जिनमें से भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 सबसे प्रमुख है।1. भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Act), 1861यह अधिनियम भारत के संवैधानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था क्योंकि इसने भारतीयों को कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल करने की शुरुआत की।प्रतिनिधि संस्थाओं की शुरुआत: वायसराय को अपनी परिषद में 6 से 12 अतिरिक्त सदस्यों को नामित करने का अधिकार मिला, जिनमें से कुछ भारतीय हो सकते थे। लॉर्ड कैनिंग ने बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को मनोनीत किया था।पोर्टफोलियो (विभागीय) प्रणाली: लॉर्ड कैनिंग द्वारा शुरू की गई 'पोर्टफोलियो प्रणाली' को कानूनी मान्यता मिली, जिसके तहत परिषद के प्रत्येक सदस्य को एक विशिष्ट विभाग (जैसे गृह, राजस्व, सैन्य) का कार्यभार सौंपा गया।विकेंद्रीकरण: मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी को उनकी विधायी शक्तियाँ वापस दे दी गईं, जिससे सत्ता के विकेंद्रीकरण की शुरुआत हुई।अध्यादेश जारी करने की शक्ति: वायसराय को आपातकाल के दौरान परिषद की सहमति के बिना अध्यादेश जारी करने का अधिकार दिया गया, जिनकी वैधता 6 महीने तक होती थी। #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #moj_content
🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें - HKaeea शासन (43339 7 १८६१ का अधिनियम :- १. प्रथम भारतीय बजट जेम्स विल्सन द्वारा १८६० में प्रस्तुत किया गया ! विश्व का ' पहला बजट १७७३ में रोबोट वालपोल 2. के द्वारा ब्रिटेन में पेश किया गया! ३. भारत में आयकर व्यवस्था प्रारंभ की गई ! ४. भारत में आयकर का जनकः- लॉर्ड कैनिंग ! ५. १८६१ से ही भारत में IPC की शुरुआत की गई ! ६. वायसराय का अध्यादेश जारी करने की शक्ति ! अधिवेशन के माध्यम से तीन उच्च s 7. न्यायालयों का गठन - मद्रास बॉम्बे कोलकाता ८. भारतीय विभागों का वर्गीकरण ! ९. भारतीय विभागीय कारण का जनक 7٢٤ 4٩7 Follow 960 Shots HKaeea शासन (43339 7 १८६१ का अधिनियम :- १. प्रथम भारतीय बजट जेम्स विल्सन द्वारा १८६० में प्रस्तुत किया गया ! विश्व का ' पहला बजट १७७३ में रोबोट वालपोल 2. के द्वारा ब्रिटेन में पेश किया गया! ३. भारत में आयकर व्यवस्था प्रारंभ की गई ! ४. भारत में आयकर का जनकः- लॉर्ड कैनिंग ! ५. १८६१ से ही भारत में IPC की शुरुआत की गई ! ६. वायसराय का अध्यादेश जारी करने की शक्ति ! अधिवेशन के माध्यम से तीन उच्च s 7. न्यायालयों का गठन - मद्रास बॉम्बे कोलकाता ८. भारतीय विभागों का वर्गीकरण ! ९. भारतीय विभागीय कारण का जनक 7٢٤ 4٩7 Follow 960 Shots - ShareChat
1858 का भारत सरकार अधिनियम, जिसे "बेहतर भारत सरकार का अधिनियम" भी कहा जाता है, 1857 के विद्रोह के बाद 2 अगस्त 1858 को ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था। इसने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर भारत का सीधा नियंत्रण ब्रिटिश क्राउन (महारानी विक्टोरिया) को सौंप दिया, जिससे भारत में "ताज का शासन" (Crown Rule) शुरू हुआ।1858 एक्ट के प्रमुख प्रावधान और प्रभाव:कंपनी राज की समाप्ति: ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया और उसकी प्रशासनिक शक्तियां और राजस्व ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिए गए।भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India): ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य को भारत का राज्य सचिव नियुक्त किया गया, जो भारत के प्रशासन के लिए पूरी तरह से ब्रिटिश संसद के प्रति जवाबदेह था।15-सदस्यीय परिषद: राज्य सचिव की सहायता के लिए 15 सदस्यों की एक 'इंडिया काउंसिल' (India Council) का गठन किया गया।वायसराय का पद: गवर्नर-जनरल को अब 'वायसराय' का पद दिया गया, जो भारत में ब्रिटिश क्राउन का सीधा प्रतिनिधि बन गया। लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।द्वैध शासन प्रणाली खत्म: पिट्स इंडिया एक्ट 1784 द्वारा स्थापित 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को खत्म कर दिया गया।नीति में बदलाव: 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद के दरबार में महारानी का घोषणा-पत्र पढ़ा गया, जिसमें देसी रियासतों के प्रति सम्मान और भारतीयों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का आश्वासन दिया गया। #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - भारत में काखन शासन (0858>09?9) १८५८ का अधिनियम :- १. द्वैध शासन प्रणाली खत्मः पिट्स इंडिया एक्ट १७८४ द्वारा स्थापित 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को खत्म कर दिया गया! २. ब्रिटिश क्राउन द्वारा भारत में शासन प्रारंभ ! ३. महारानी विक्टोरिया भारत का प्रमुख घोषित ! ४. गवर्नर जनरल का पद समाप्त किया ! ५. एक नया पद वायसराय सर्जित किया गया ! ६. भारत का राज्य सचिव पद सृजन किया गया ! ७. सभी BOARD OF DIRECTOR को निलंबित किया गया ! ८. भारत का अंतिम गवर्नर जनरल।पहला वायसराय लॉर्ड कैनिंग बना ! Follow 960 shots_ भारत में काखन शासन (0858>09?9) १८५८ का अधिनियम :- १. द्वैध शासन प्रणाली खत्मः पिट्स इंडिया एक्ट १७८४ द्वारा स्थापित 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को खत्म कर दिया गया! २. ब्रिटिश क्राउन द्वारा भारत में शासन प्रारंभ ! ३. महारानी विक्टोरिया भारत का प्रमुख घोषित ! ४. गवर्नर जनरल का पद समाप्त किया ! ५. एक नया पद वायसराय सर्जित किया गया ! ६. भारत का राज्य सचिव पद सृजन किया गया ! ७. सभी BOARD OF DIRECTOR को निलंबित किया गया ! ८. भारत का अंतिम गवर्नर जनरल।पहला वायसराय लॉर्ड कैनिंग बना ! Follow 960 shots_ - ShareChat
1833 का चार्टर अधिनियम (जिसे सेंट हेलेना अधिनियम 1833 भी कहा जाता है) ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण कानून था, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया। इसने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल (लॉर्ड विलियम बेंटिक) बना दिया और बॉम्बे-मद्रास की विधायी शक्तियां छीन लीं। यह कानून भारत में केंद्रीय प्रशासन की शुरुआत थी। भारत सरकार अधिनियम 1858 (Government of India Act 1858) ब्रिटिश संसद द्वारा 2 अगस्त 1858 को पारित किया गया एक ऐतिहासिक कानून था। इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया और शासन की बागडोर सीधे ब्रिटिश ताज (British Crown) के हाथों में सौंप दी।इस अधिनियम को "भारत के बेहतर शासन के लिए अधिनियम" (Act for the Better Government of India) के रूप में भी जाना जाता है।अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ:ब्रिटिश ताज का सीधा शासन: भारत का प्रशासन अब महारानी विक्टोरिया के नाम पर चलाया जाने लगा।वायसराय का पद: गवर्नर-जनरल के पद का नाम बदलकर वायसराय कर दिया गया, जो भारत में ब्रिटिश ताज का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि था। लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।भारत सचिव (Secretary of State): भारत के प्रशासन के लिए एक नया पद 'भारत सचिव' बनाया गया, जो ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य होता था। इसकी सहायता के लिए 15 सदस्यों वाली भारत परिषद (India Council) का गठन किया गया।द्वैध शासन का अंत: 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा शुरू की गई 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया।देसी रियासतों के प्रति नीति: महारानी की घोषणा के अनुसार, भविष्य में राज्यों के विलय की नीति (जैसे डलहौजी की हड़प नीति) को त्याग दिया गया और राजाओं को उत्तराधिकारी गोद लेने की अनुमति दी गई। #moj_content #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡 #📗प्रेरक पुस्तकें📘
moj_content - कंपनी के अधीन शासन (477321857) १८३३का अधिनियम १. बंगाल का गवर्नर जनरल भारत का गवर्नर जनरल बना २. बंगाल का अंतिम गवर्नर जनरल/ भारत का पहला गवर्नर जनरल विलियम बेंटिक ! ३. भारत के साथ चाय एवं चीन के साथ व्यापार एकाधिकार समाप्त ! का ४. आधिकारिक भाषाः- अंग्रेजी १८३५ से ! १८५३ का चार्टर अधिनियम बोर्ड मेंबर्स की संख्या २४ से घटकर १८ कर दी गई ! 1 २. पहले Indian Civil Servant अधिकारी सत्येंद्र नाथ टैगोर बने N Follo gk_shots_960 कंपनी के अधीन शासन (477321857) १८३३का अधिनियम १. बंगाल का गवर्नर जनरल भारत का गवर्नर जनरल बना २. बंगाल का अंतिम गवर्नर जनरल/ भारत का पहला गवर्नर जनरल विलियम बेंटिक ! ३. भारत के साथ चाय एवं चीन के साथ व्यापार एकाधिकार समाप्त ! का ४. आधिकारिक भाषाः- अंग्रेजी १८३५ से ! १८५३ का चार्टर अधिनियम बोर्ड मेंबर्स की संख्या २४ से घटकर १८ कर दी गई ! 1 २. पहले Indian Civil Servant अधिकारी सत्येंद्र नाथ टैगोर बने N Follo gk_shots_960 - ShareChat
Shayari Pasand Aaye Tho Like Comments And Share Jarur Kare @7pm_post #instagram_Id_Search_Karen@7pm_post_aapke_alfaaz #📗प्रेरक पुस्तकें📘
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - Ig/7pm-post's POV Na zikar kar, na fikar kar apne jazbaton ka tu bas kadr kar. jo tera hai wo tujhe mil he jayega, apni baari ka, bas tu sabr kar Ig/7pm-post's POV Na zikar kar, na fikar kar apne jazbaton ka tu bas kadr kar. jo tera hai wo tujhe mil he jayega, apni baari ka, bas tu sabr kar - ShareChat