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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा जिंदगी ने एक ही॰सबक सिखाया है कि भरोसा सिर्फ खुंद पर रखना ही सबसे बेहतर है। परख़ने वालों ने मुझे अपनी नज़र से परखा , मगर मेरा सच सिर्फ मेरा खुदा जोनता है...!!मैंने सदा धोखा खाया है॰ पर कभी किसी को धोखा दिया नहीं..!! मेरे किरदार में लाखों कमियाँ होंगी , मगर किसी की भावनाओं से खेलना मुझे कभी आया ही नहीं.. !! बनावटीपन और झूठे दिखावे वाले लोग ' दूर ही मुझसे ' रहेंतो अच्छा है..!!याद रखना , तूफ़ान में अक्सर कश्तियाँ और घमंड में हस्तियाँ डूब ही जाती हैं, मगर जो अपनी सादगी और सच पर कायम रहते हैं, दरिया भी उन्हें रास्ता दे देता मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा जिंदगी ने एक ही॰सबक सिखाया है कि भरोसा सिर्फ खुंद पर रखना ही सबसे बेहतर है। परख़ने वालों ने मुझे अपनी नज़र से परखा , मगर मेरा सच सिर्फ मेरा खुदा जोनता है...!!मैंने सदा धोखा खाया है॰ पर कभी किसी को धोखा दिया नहीं..!! मेरे किरदार में लाखों कमियाँ होंगी , मगर किसी की भावनाओं से खेलना मुझे कभी आया ही नहीं.. !! बनावटीपन और झूठे दिखावे वाले लोग ' दूर ही मुझसे ' रहेंतो अच्छा है..!!याद रखना , तूफ़ान में अक्सर कश्तियाँ और घमंड में हस्तियाँ डूब ही जाती हैं, मगर जो अपनी सादगी और सच पर कायम रहते हैं, दरिया भी उन्हें रास्ता दे देता - ShareChat
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satnam waheguru ji - मुदा रसंतोखु सरमु पतु झौली धिआन की करहि बिभूतिाखिंथा कालु कुआरी काइओ जुगति ्डंडा़ परतीतिा गुरु साहिब ने योगियों को बाहरी प्रतीकों के बजाय आंतरिक गुणों HoT में मिट्टी या कांच की मुँद्रा को अपनाने की सलाह दी। योगी कानों ' कुंडल ) पहनते थे। गुरु जी कहते हैं संतोष को अपने कानों की ೯ಷ बनाओ। यानी जो परमात्मा दे उसमें खुश रहना ही असली योग और पात्र रखते थे। गुरु जी कहते हैं शर्म योगी भिक्षा के लिए' झोली लगे (मेहनत और विनम्रता ) को अपना पात्र और झोली बनाओ। योगी विभूति) मलते थे। गुरु जी कहते हैं, प्रभु के ध्यान को शरीर पर राख फटे हुए ' ही अपने शरीर की भस्म बना लो। योगी कपड़ों की पुराने जी कहते हैं काल (मृत्यु) की याद को थे। गुरु  गोदड़ी (खिंथा ) पहनते तेरा अपनी गोदड़ी बनाओ। यानी हमेशा याद रखो कि जीवन नश्वर है, यही सबसे बड़ा त्याग है। अपनी काया (शरीर) को विकारों से बचाकर कुंवारा (निर्मल/ पवित्र) रखना ही योग की सच्ची जुगति (विधि) है। योगी हाथ में एक डंडा रखते थे। गुरु जी कहते हैंः प्रभु पर भाणा परतीति (अखंड विश्वास / श्रद्धा) को अपना डंडा बनाओ। उस समय आई पंथ योगियों का सबसे ऊँचा संप्रदाय माना जाता था। गुरु जी कहते हैं कि जो मनुष्य सगल जमाती पूरी मानवता को अपना साथी समझता है, वही वास्तव में सबसे ऊँचे आई पंथ का है। गुरु ' नानक देव जी स्पष्ट कर रहे हैं कि परमात्मा को पाने के' लिए जंगल जाने या शरीर पर राख मलने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपके भीतर संतोष , विनम्रता , प्रभु स्मरण और सबको एक समान में रहकर भी  बड़े योगी देखने की दृष्टि है, तो आप घर गृहस्थी Hq4 81 मुदा रसंतोखु सरमु पतु झौली धिआन की करहि बिभूतिाखिंथा कालु कुआरी काइओ जुगति ्डंडा़ परतीतिा गुरु साहिब ने योगियों को बाहरी प्रतीकों के बजाय आंतरिक गुणों HoT में मिट्टी या कांच की मुँद्रा को अपनाने की सलाह दी। योगी कानों ' कुंडल ) पहनते थे। गुरु जी कहते हैं संतोष को अपने कानों की ೯ಷ बनाओ। यानी जो परमात्मा दे उसमें खुश रहना ही असली योग और पात्र रखते थे। गुरु जी कहते हैं शर्म योगी भिक्षा के लिए' झोली लगे (मेहनत और विनम्रता ) को अपना पात्र और झोली बनाओ। योगी विभूति) मलते थे। गुरु जी कहते हैं, प्रभु के ध्यान को शरीर पर राख फटे हुए ' ही अपने शरीर की भस्म बना लो। योगी कपड़ों की पुराने जी कहते हैं काल (मृत्यु) की याद को थे। गुरु  गोदड़ी (खिंथा ) पहनते तेरा अपनी गोदड़ी बनाओ। यानी हमेशा याद रखो कि जीवन नश्वर है, यही सबसे बड़ा त्याग है। अपनी काया (शरीर) को विकारों से बचाकर कुंवारा (निर्मल/ पवित्र) रखना ही योग की सच्ची जुगति (विधि) है। योगी हाथ में एक डंडा रखते थे। गुरु जी कहते हैंः प्रभु पर भाणा परतीति (अखंड विश्वास / श्रद्धा) को अपना डंडा बनाओ। उस समय आई पंथ योगियों का सबसे ऊँचा संप्रदाय माना जाता था। गुरु जी कहते हैं कि जो मनुष्य सगल जमाती पूरी मानवता को अपना साथी समझता है, वही वास्तव में सबसे ऊँचे आई पंथ का है। गुरु ' नानक देव जी स्पष्ट कर रहे हैं कि परमात्मा को पाने के' लिए जंगल जाने या शरीर पर राख मलने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपके भीतर संतोष , विनम्रता , प्रभु स्मरण और सबको एक समान में रहकर भी  बड़े योगी देखने की दृष्टि है, तो आप घर गृहस्थी Hq4 81 - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कर्लक बिना नेकर्लकी सरूपे ।। नमो राज राजेस्वरपरम रूपे ।l ANprಯpri मैतेरा हे भाई!दुनिया में हर चीज़, व्यक्ति या विचार में कोई न कोई कमी या कलंक हो सकता है। समय के साथ हर चीज़ धुंधली भिखारी पड़ सकती है, लेकिन परमात्मा समय से परे है। उस पर माया, लोभ, मोह या क्रोध का कोई दाग नहीं लग सकता। परमात्मा जिओ से कभी प्रभावित नहीं का स्वरूप ही ऐसा है कि वह 'gIకే' होता। वह प्रकाश की उस किरण की तरह है जो गंदगी पर पड़ने के बावजूद खुद मैली नहीं होती। सांसारिक राजाओं का পঙ্াভা निश्चित समय और सीमा तक होता है। उनके ऊपर राज एक নাল भी कोई न कोई शक्ति होती है। लेकिन अकाल पुरख राजाओं का राजा   है। परमात्मा वह शक्ति है जो पूरे ब्रह्मांड का संचालन कर रही है वह सबसे बड़ा शासक है, जिसका हुक्म अटल है। बाबा लिए  संघर्ष करते संसार के राजा अपनी सत्ता बनाए रखने के जी हैं, लेकिन राज राजेस्वरं का शासन सहज है। पूरा ब्रह्मांड, तारों की गति से लेकर एक पत्ते के गिरने तक, उसी के अटूट नियमों हुकम में बंधा हुआ है। कर्लक बिना नेकर्लकी सरूपे ।। नमो राज राजेस्वरपरम रूपे ।l ANprಯpri मैतेरा हे भाई!दुनिया में हर चीज़, व्यक्ति या विचार में कोई न कोई कमी या कलंक हो सकता है। समय के साथ हर चीज़ धुंधली भिखारी पड़ सकती है, लेकिन परमात्मा समय से परे है। उस पर माया, लोभ, मोह या क्रोध का कोई दाग नहीं लग सकता। परमात्मा जिओ से कभी प्रभावित नहीं का स्वरूप ही ऐसा है कि वह 'gIకే' होता। वह प्रकाश की उस किरण की तरह है जो गंदगी पर पड़ने के बावजूद खुद मैली नहीं होती। सांसारिक राजाओं का পঙ্াভা निश्चित समय और सीमा तक होता है। उनके ऊपर राज एक নাল भी कोई न कोई शक्ति होती है। लेकिन अकाल पुरख राजाओं का राजा   है। परमात्मा वह शक्ति है जो पूरे ब्रह्मांड का संचालन कर रही है वह सबसे बड़ा शासक है, जिसका हुक्म अटल है। बाबा लिए  संघर्ष करते संसार के राजा अपनी सत्ता बनाए रखने के जी हैं, लेकिन राज राजेस्वरं का शासन सहज है। पूरा ब्रह्मांड, तारों की गति से लेकर एक पत्ते के गिरने तक, उसी के अटूट नियमों हुकम में बंधा हुआ है। - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - @ पुत्तर छल करने वाला व्यक्ति दुनिया की नज़रों में जीत भले ही जाए॰ पर वह खुद की में हार जाता है.. वक्त का नज़रों Tu पहिया जब घूमता है॰ तो हिसाब सबका बराबर होता है, F Hi হঁসানী বী ওণালন ম তীন ৯ गवाह चाहिए होते है, पर खुदा की अदालत में सिर्फ नीयत देखी जाती है..!! छल Tu की जीत उधार ली गई रोशनी की तरह है॰ जो रात ढलते ही खत्म हो जाएगी॰. परंतु सत्य की जीत सूरज की तरह है॰ जो Guu के पीछे छुप तो सकती है॰ लेकिन बुझ नहीं बादलों सकता...!! पुत्तर जिसकी नीयत सा़फ और स्वभाव सरल है, Ji उनको किसी मंदिर या मस्जिद में दुआ माँगने की ज़रूरत नहीं उसका जीवन ही सबसे बड़ी इबादत है।ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। @ पुत्तर छल करने वाला व्यक्ति दुनिया की नज़रों में जीत भले ही जाए॰ पर वह खुद की में हार जाता है.. वक्त का नज़रों Tu पहिया जब घूमता है॰ तो हिसाब सबका बराबर होता है, F Hi হঁসানী বী ওণালন ম তীন ৯ गवाह चाहिए होते है, पर खुदा की अदालत में सिर्फ नीयत देखी जाती है..!! छल Tu की जीत उधार ली गई रोशनी की तरह है॰ जो रात ढलते ही खत्म हो जाएगी॰. परंतु सत्य की जीत सूरज की तरह है॰ जो Guu के पीछे छुप तो सकती है॰ लेकिन बुझ नहीं बादलों सकता...!! पुत्तर जिसकी नीयत सा़फ और स्वभाव सरल है, Ji उनको किसी मंदिर या मस्जिद में दुआ माँगने की ज़रूरत नहीं उसका जीवन ही सबसे बड़ी इबादत है।ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नमसर्त नृकरमेण नमसर्त नृभरमेण नमसर्त नृदेसेण नमसर्त नृभेसेग मीठा भावार्थःउस परमात्मा को सदा नमन करना चाहिए ৯ ৪২ ' जो दुनिया ' कार्य को शक्ति प्रदान करता है। इंसान को "मैं कर रहा ' हूँ," लेकिन गुरु साहिब समझाते हैं कि लगता है कि' लगे असली कर्ता वही है। वह हर ' पीछे की शक्ति है और हर 'FTబశ' क्रिया का संचालक है। सृष्टि के असंख्य ; जीवों , मनुष्यों की रक्षा तेरा और पालना करने वाला वही एक है। वह किसी भेदभाव के बिना सबको रिज़क प्रदान करता है। परमात्मा किसी एक खास देश भाणा का नहीं है। वह अदेस है, यानी उसका कोई एक निश्चित पता नहीं है क्योंकि वह हर जगह मौजूद है पूरी पृथ्वी ही उसका घर है। ईश्वर का कोई एक मजहब या स्वरूप नहीं है। वह हर भेष में है और फिर भी किसी एक भेष तक सीमित नहीं है। वह अभेष है। इसका अर्थ यह भी है कि संसार के अनगिनत रूपों और वेशभूषाओं में वही एक नूर चमक रहा है। नमसर्त नृकरमेण नमसर्त नृभरमेण नमसर्त नृदेसेण नमसर्त नृभेसेग मीठा भावार्थःउस परमात्मा को सदा नमन करना चाहिए ৯ ৪২ ' जो दुनिया ' कार्य को शक्ति प्रदान करता है। इंसान को "मैं कर रहा ' हूँ," लेकिन गुरु साहिब समझाते हैं कि लगता है कि' लगे असली कर्ता वही है। वह हर ' पीछे की शक्ति है और हर 'FTబశ' क्रिया का संचालक है। सृष्टि के असंख्य ; जीवों , मनुष्यों की रक्षा तेरा और पालना करने वाला वही एक है। वह किसी भेदभाव के बिना सबको रिज़क प्रदान करता है। परमात्मा किसी एक खास देश भाणा का नहीं है। वह अदेस है, यानी उसका कोई एक निश्चित पता नहीं है क्योंकि वह हर जगह मौजूद है पूरी पृथ्वी ही उसका घर है। ईश्वर का कोई एक मजहब या स्वरूप नहीं है। वह हर भेष में है और फिर भी किसी एक भेष तक सीमित नहीं है। वह अभेष है। इसका अर्थ यह भी है कि संसार के अनगिनत रूपों और वेशभूषाओं में वही एक नूर चमक रहा है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - जिसु सिमरत दूखु सभु जाइा नॉमु खननु वसै मनि आइाा हे भाई! सभी प्रकार के कष्ट उस अकाल पुरख को याद करने ম নযা से विदा हो जाते हैं। परमात्मा की याद में जोड़ने से इंसान सांसारिक परेशानियों से ऊपर उठ जाता है उसके मन के भिखारी भीतर की बेचैनी और चिंता भी शांत होजाती है। जिस तरह एक कीमती हीरा अंधेरे कमरे को रोशन कर देता है, उसी तरह जिओ नाम रत्न अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर देता है। यह कोई साधारण दौलत नहीं, बल्कि वह रूहानी पूँजी है जो कभी खत्म नहीं होती। प्रभु का नाम केवल जीभ से जपने तक पहाडा सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसेमनमें बसाना जरूरी है। जब ईश्वर की याद दिल की गहराइयों में समा जाती है, तो qT मनुष्य का स्वभाव और विचार बदलने लगते हैं। उसके जीवन में ठहराव और संतोष आ जाता है।दुनिया की वस्तुएँ हमें कुछ बाबा सुख दे सकती हैं, लेकिन स्थायी आनंद केवल लिए  समय के नाम के स्मरण से ही संभव है। जब परमात्मा का नाम मन में U होता है॰ तो इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों (ठोकरों ) में भी डगमगाता नहीं है, क्योंकि उसे असली कर्ता पर भरोसा होता 8 जिसु सिमरत दूखु सभु जाइा नॉमु खननु वसै मनि आइाा हे भाई! सभी प्रकार के कष्ट उस अकाल पुरख को याद करने ম নযা से विदा हो जाते हैं। परमात्मा की याद में जोड़ने से इंसान सांसारिक परेशानियों से ऊपर उठ जाता है उसके मन के भिखारी भीतर की बेचैनी और चिंता भी शांत होजाती है। जिस तरह एक कीमती हीरा अंधेरे कमरे को रोशन कर देता है, उसी तरह जिओ नाम रत्न अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर देता है। यह कोई साधारण दौलत नहीं, बल्कि वह रूहानी पूँजी है जो कभी खत्म नहीं होती। प्रभु का नाम केवल जीभ से जपने तक पहाडा सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसेमनमें बसाना जरूरी है। जब ईश्वर की याद दिल की गहराइयों में समा जाती है, तो qT मनुष्य का स्वभाव और विचार बदलने लगते हैं। उसके जीवन में ठहराव और संतोष आ जाता है।दुनिया की वस्तुएँ हमें कुछ बाबा सुख दे सकती हैं, लेकिन स्थायी आनंद केवल लिए  समय के नाम के स्मरण से ही संभव है। जब परमात्मा का नाम मन में U होता है॰ तो इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों (ठोकरों ) में भी डगमगाता नहीं है, क्योंकि उसे असली कर्ता पर भरोसा होता 8 - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा भीड़ तुम जैसी चालाक में शोर मॅचाकर अपनी जगह बनाने की कोशिश जरूर कर सकती हो, लेकिन तुम्हारा आधार खोखला है ಞ तुम के कंधों का इस्तेमाल तो कर सकती हो पर कभी सच्चा सम्मान कभी भी नहीं पाऊँगी..!! एकसाफ दिल इंसान लिए के उसकी सबसे बड़ी दौलत उसका सुकून है, उसको अपनी काबिलियत किसी को साबित करने की जिरूरत नहीं पड़ती तुम क्या जनों समय और   तुम्हारी बुरी नीयत खुद तुम्हारा सब कुछ सा़फ कर देगी...!! बुरी नियत' तुम्हारी বৃব্ধ মীসব্ধ বী নফ্ক ৯ তী ওঁজ ही अंदर इंसान को खोखला कर देती है॰ याद रखना मेरी बात अंत में सिर्फ वही बचता हैजो सच्चा और ईमानदार होता है...!! मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा भीड़ तुम जैसी चालाक में शोर मॅचाकर अपनी जगह बनाने की कोशिश जरूर कर सकती हो, लेकिन तुम्हारा आधार खोखला है ಞ तुम के कंधों का इस्तेमाल तो कर सकती हो पर कभी सच्चा सम्मान कभी भी नहीं पाऊँगी..!! एकसाफ दिल इंसान लिए के उसकी सबसे बड़ी दौलत उसका सुकून है, उसको अपनी काबिलियत किसी को साबित करने की जिरूरत नहीं पड़ती तुम क्या जनों समय और   तुम्हारी बुरी नीयत खुद तुम्हारा सब कुछ सा़फ कर देगी...!! बुरी नियत' तुम्हारी বৃব্ধ মীসব্ধ বী নফ্ক ৯ তী ওঁজ ही अंदर इंसान को खोखला कर देती है॰ याद रखना मेरी बात अंत में सिर्फ वही बचता हैजो सच्चा और ईमानदार होता है...!! - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - पुत्तर अपने हृदय के अंदर मोह सिर्फ उस परमात्मा @ೂ दे प्रति ही रख जो एथे और ओथे दोनों जहन विच तेरी बहा नू पकड़ेगा. . !!याद रखी परिस्थितियां बदलते ही अपने पराए हो जाते हैं॰..यह वाक्य उन Tu लिए ' लोगों के' के भरोसे एक आईना है जो दूसरों ' अपनी खुशियाँ ढूंढते हैं। दिल इंसान दा तभी टूटता Hi है जब   कोई बहुत प्यारा चोट पहुँचाता है, तो तब उसका सिर्फ़ दिल ही नहीं टूटता , बल्कि उसके Tu 'भ्रम को भी तोड़ देता है जिसमें वो जी रहे होते हैं...!!  इंसान का अपनी जिन्दगी में गिरना कोई बुरी बात नहीं . लेकिन गिरकर यह समझ लेना कि Guu अब उसको किस पर भरोसा करना है और किस पर नहीं , यही असली जीत है। अब उसके पास वह परख है जिसे दुनिया की कोई भी दौलत नहीं Ji खरीद सकती...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। | पुत्तर अपने हृदय के अंदर मोह सिर्फ उस परमात्मा @ೂ दे प्रति ही रख जो एथे और ओथे दोनों जहन विच तेरी बहा नू पकड़ेगा. . !!याद रखी परिस्थितियां बदलते ही अपने पराए हो जाते हैं॰..यह वाक्य उन Tu लिए ' लोगों के' के भरोसे एक आईना है जो दूसरों ' अपनी खुशियाँ ढूंढते हैं। दिल इंसान दा तभी टूटता Hi है जब   कोई बहुत प्यारा चोट पहुँचाता है, तो तब उसका सिर्फ़ दिल ही नहीं टूटता , बल्कि उसके Tu 'भ्रम को भी तोड़ देता है जिसमें वो जी रहे होते हैं...!!  इंसान का अपनी जिन्दगी में गिरना कोई बुरी बात नहीं . लेकिन गिरकर यह समझ लेना कि Guu अब उसको किस पर भरोसा करना है और किस पर नहीं , यही असली जीत है। अब उसके पास वह परख है जिसे दुनिया की कोई भी दौलत नहीं Ji खरीद सकती...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। | - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा लिए ' स्कूल हमें अंक' के' तैयार करते हैं, लेकिन जिंदगी हमें लिए ' तैयार करती अस्तित्व' के है। स्कूल में पहले सबक मिलता है और फिर इम्तिहान , लेकिन ज़िंदगी पहले इम्तिहान लेती है और फिर सबक सिखाती है। 'धोखा' खाना दुनिया की सबसे बड़ी डिग्री है, क्योंकि इसके बाद इंसान की आँखें हमेशा के' fag खुल जाती हैं..!! जब तक मौसम सुहाना होता है, हर कोई साथ चलने का वादा करता है। लेकिन जैसे ही आपकी ज़़िंदगी में तूफ़ान आता है, वैसे ही रिश्तों की एक्सपायरी डेट दिखने लगती है। यह सच बहुत तकलीफ देता है कि जिन लोगों के लिए हम दुनिया से लड़ जाते हैं, वही लोग वक्त आने पर सबसे पहले किनारे हो जाते हैं..!! मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा लिए ' स्कूल हमें अंक' के' तैयार करते हैं, लेकिन जिंदगी हमें लिए ' तैयार करती अस्तित्व' के है। स्कूल में पहले सबक मिलता है और फिर इम्तिहान , लेकिन ज़िंदगी पहले इम्तिहान लेती है और फिर सबक सिखाती है। 'धोखा' खाना दुनिया की सबसे बड़ी डिग्री है, क्योंकि इसके बाद इंसान की आँखें हमेशा के' fag खुल जाती हैं..!! जब तक मौसम सुहाना होता है, हर कोई साथ चलने का वादा करता है। लेकिन जैसे ही आपकी ज़़िंदगी में तूफ़ान आता है, वैसे ही रिश्तों की एक्सपायरी डेट दिखने लगती है। यह सच बहुत तकलीफ देता है कि जिन लोगों के लिए हम दुनिया से लड़ जाते हैं, वही लोग वक्त आने पर सबसे पहले किनारे हो जाते हैं..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - जेते बदन सृसटि सभा धरैए आप्रु आपनी बूझ उचारैएा तुम सभही ते रहत निरालख्चा] भैद जानत बेद BR 81741 HoT हे भाई! सृष्टि में जितने भी जीव जंतु या मनुष्य शरीर धारण किए गए हैं, वे सब अपनी अपनी बुद्धि और समझ के अनुसार परमात्मा के स्वरूप का वर्णन करते हैं। यानी हर कोई अपनी क्षमता और लगे ज्ञान के दायरे में रहकर परमात्मा को समझने और पुकारने की कोशिश करता है। जैसे हर कोई अपनी बूझ समझ के अनुसार ईश्वर को पुकारता है, तो इसका मतलब है कि किसी का भी पूर्ण dా ज्ञान नहीं है। परमात्मा सबकी परिभाषाओं से बहुत बड़ा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि परमात्मा  इन सबसे निरालम अलग हैंl वह किसी बंधन में नहीं हैं। वेदों के रहस्य को जानने वाले विद्वान और दुनिया के बड़़े ्बड़े ज्ञानी भी यही मानते हैं कि परमात्मा का भाणा कोई अंत पाना असंभव है, परमात्मा सबके भीतर होकर भी सबसे न्यारे हैं। वह हम सबके बहुत करीब है, हमारे हर कर्म को जानता है, विकारों या माया के बंधनों से अछूता है। जैसे सूर्य लेकिन वह ' हमारे  की रोशनी कीचड़ पर भी पड़ती है, पर कीचड़ सूर्य को गंदा नहीं कर सकता | जेते बदन सृसटि सभा धरैए आप्रु आपनी बूझ उचारैएा तुम सभही ते रहत निरालख्चा] भैद जानत बेद BR 81741 HoT हे भाई! सृष्टि में जितने भी जीव जंतु या मनुष्य शरीर धारण किए गए हैं, वे सब अपनी अपनी बुद्धि और समझ के अनुसार परमात्मा के स्वरूप का वर्णन करते हैं। यानी हर कोई अपनी क्षमता और लगे ज्ञान के दायरे में रहकर परमात्मा को समझने और पुकारने की कोशिश करता है। जैसे हर कोई अपनी बूझ समझ के अनुसार ईश्वर को पुकारता है, तो इसका मतलब है कि किसी का भी पूर्ण dా ज्ञान नहीं है। परमात्मा सबकी परिभाषाओं से बहुत बड़ा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि परमात्मा  इन सबसे निरालम अलग हैंl वह किसी बंधन में नहीं हैं। वेदों के रहस्य को जानने वाले विद्वान और दुनिया के बड़़े ्बड़े ज्ञानी भी यही मानते हैं कि परमात्मा का भाणा कोई अंत पाना असंभव है, परमात्मा सबके भीतर होकर भी सबसे न्यारे हैं। वह हम सबके बहुत करीब है, हमारे हर कर्म को जानता है, विकारों या माया के बंधनों से अछूता है। जैसे सूर्य लेकिन वह ' हमारे  की रोशनी कीचड़ पर भी पड़ती है, पर कीचड़ सूर्य को गंदा नहीं कर सकता | - ShareChat