#ऋग्वेद
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हरि 🌿✨ — 'अँधेरे को हरने वाला' और हरियाली का प्रतीक, हिन्दू परंपरा में यह विष्णु का एक प्रमुख नाम है और विष्णु-सहस्रनाम में भी सम्मिलित है। शब्द-इतिहास बताता है कि 'हरि' का मूल Proto-Indo-European *ǵʰel- से जुड़ता है (हरा/पीला/प्रकाश), इसलिए हरि का प्रतीकात्मक संबंध जीवन, नवीकरण और प्रकाश से तार्किक है। वैज्ञानिक दृष्‍टि से भी रोचक मेल है: आधुनिक अध्ययनों ने दिखाया है कि हरे रंग/प्रकृति का अनुभव तनाव घटाता, हृदय-दर को नियंत्रित करता और ध्यान व मूड में सुधार लाता है — इसीलिए धार्मिक रूपक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव एक दूसरे को पूरक करते हैं। "हरि अंदर की बंजर ज़मीन में हरियाली उगाने वाला है, अँधेरे को मिटाकर शांति लौटाता है" 🕉️🌱✨ — जानिए, सोचिए और महसूस कीजिए कि ये पुरातात्विक, भाषायी और वैज्ञानिक संकेत किस तरह एक नए अर्थ में मिलते हैं। #हरि #Vishnu #हरियाली #SpiritualScience #प्रकाश #शांति #धर्म @हरिचन्द राज @हरिओम लोधी @हरिओम😙😙🤩🤩 @हरी ओम शॉपिंग सेंटर @🔥राधा हरी 🔥💞❤️ #हरि #ऋग्वेद की बात #ऋग्वेद उपदेश ##ऋग्वेद #ऋग्वेद उपाकर्म
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क्या आप जानते हैं — ऋग्वेद सिर्फ़ एक प्राचीन ग्रन्थ नहीं, बल्कि मानवता की पहली वैज्ञानिक-जिज्ञासा की कविता है? 📜🌌🔥 इसकी संहिता 10 मण्डल, 1,028 सूक्त और लगभग 10,552 मन्त्रों में बँटी हुई है और इसे लगभग 1500–1000 ई.पू. का माना जाता है, इसलिए यह इंडो-यूरोपीय साहित्य के सबसे पुरातन स्थिर ग्रंथों में गिना जाता है. Rigveda का नासदीय सूक्त (10.129) कहता है, “Then, there was neither existence, nor non-existence,” — एक ऐसा श्लोक जो ब्रह्माण्ड-उत्पत्ति पर खुली, संशयात्मक पूछ-ताछ देता है. 🧠🔭 तर्क/साइंस की नजर से इसकी स्थिरता इसलिए बनी रही कि पद-पाठ/सम्हिता-पाठ और छंदों जैसी कठोर मौखिक तकनीकों ने ध्वनि-मार्कर्स और मेमोरी-ट्रिक्स के जरिए शताब्दियों तक त्रुटियों को पकड़ लिया; UNESCO ने भी वैदिक जप-परंपरा की मौखिक विरासत को मान्यता दी है. 🌊🗺️ साथ ही 'नदिस्तुति' और सप्त-सिन्धु के उल्लेख वैदिक भूगोल और नदियों के इतिहास को रिकंस्ट्रक्ट करने में मददगार रहे — छोटा पर गहरा ज्ञान। 🙏 #ऋग्वेद #NasadiyaSukta #प्राचीनज्ञान #VedicWisdom #Rigveda @ऋग्वेद @ऋग्वेद @ऋग्वेद @ऋग्वेद @ऋग्वेद #ऋग्वेद #ऋग्वेद उपाकर्म ##ऋग्वेद #ऋग्वेद उपदेश #ऋग्वेद की बात
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