जिगर_चूरूवी
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#याद रहते हैं.... परिंदों को आशियाने याद रहते हैं दोस्तों को वो याराने याद रहते हैं। खुद में खुश्बू के ज़माने याद रहते हैं वो तेरे न आने के बहाने याद रहते हैं। सरवरक ए दफ्तर बंद किए हमने अन लिखे फसाने याद रहते हैं। मैं पारसा नहीं के सब जानता नग़्मे ताल और तराने याद रहते हैं। जिगर लोग टूट चुके बिखरे हुए कहे अल्फ़ाज़ के माने याद रहते हैं। #💑डेस्टिनेशन वेडिंग #जिगर_चूरूवी
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हम आहंगी चिनाबों में रहा करती थी मलिके हुस्न नकाबों में रहा करती थी। तस्वीर तेरी मेरे ख्वाबों में रहा करती थी हर्फ सी सूरत किताबों में रहा करती थी। वक्त ने सिकंदर कैस किसरा मिटा दिए गुम अंधेरों में जो नवाबों में रहा करती थी। आज हैं गर्त में हुनर और हौंसले उनके कौम जो ऊंचे बाबों में रहा करती थी। जिगर फिर गए दिन मेहनतकशां के शाद हैं वो जो अज़ाबों में रहा करती थी। #जिगर_चूरूवी #हम_आहंगी - तालमेल #चेनाबों - दरिया ए चिनाब #नकाब - घूंघट #ख़्वाब - सपना #मलिके - रानी #हर्फ़ - अक्षर #कैस_किसरा - अपने समय का विख्यात समाज #नवाब - राजा #गर्त - खाई, नीचे #बाबों - दरवाजे #मेहनतशां - मेहनती #अज़ाब - पीड़ा, दुःख,सजा #जिगर_चूरूवी
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#चराग़..... एक चराग से जमाने में उजाला कीजिए शिकायत को दिल में न पाला कीजिए। कुछ दबे कुचलों को संभाला कीजिए एक ही मसला न रोज़ उछाला कीजिए। दूर किनारे से पहले खुद को देखिए यूं इल्ज़ाम लोगों पर न डाला कीजिए। मन के कोने में सही, ग़ैरत जिंदा रखिए जहां ज़रूरी आवाज़ निकाला कीजिए। रहबरी का जुनून घर फूंकने जैसा खुद उजड़ औरों को संभाला कीजिए। जिगर न तैरें वसीलों के दम पे कश्तियां वज़्न कंधों पर खुद के डाला कीजिए। #जिगर_चूरूवी
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