deoband
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देवबंद की एक पारंपरिक परछाईं में छिपी नई कहानी—📚 31 मई 1866 में स्थापित Darul Uloom Deoband ने ब्रिटिश शासन के बाद धार्मिक-शैक्षणिक विरासत को संरक्षित करने का काम किया और यहीं से Deobandi movement की लहर निकली; संस्थान ने दर्स-ए-निज़ामी को क्लासरूम, परीक्षाएँ और प्रकाशन-प्रणाली के साथ आधुनिक रूप दिया जिससे सistematic religious learning पुख्ता हुई — "इल्म ही असली ताकत है" । तर्क/इतिहास के आधार पर देखें तो 1857 के बाद सामुदायिक आत्मसंरक्षण और ज्ञान के प्रसार की आवश्यकता ने ऐसी संस्थाओं को जन्म दिया; यह सकारात्मक है कि इन्होंने शैक्षिक ढाँचे, दारुल-इफ्ता जैसी पारंपरिक विन्यासों (1892 में दारुल-इफ्ता की शुरूआत) को मजबूत किया, जबकि गलत बात यह होगी कि धर्म के नाम पर किसी भी तरह का कट्टरता या मानवाधिकारों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं — धर्म में सही चीज़ें (ज्ञान, अनुशासन, न्याय) स्वीकार करें और गलत को गलत कहें। 🔍🏛️🕋📜 #देवबंद #DarulUloom #Deobandi #IslamicEducation #IlmForAll @P Babua @devnand @debana @deeban @Salman Deebana #viral #बुद्ध #deoband #देवबंद न्यूज़_ #دیوبند کا خوبصورت منظر
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