Vijay Dass
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1 days ago
#GodNightWednesday #रोटीकपड़ा_चिकित्सा_शिक्षामकान . सतगुरू की पहचान तत्वज्ञानहीन गुरु तो कहते हैं कि हम अध्यात्म ज्ञान के गूढ़ रहस्यों को जानते हैं, परंतु उनके पास बीजक यानि तत्वज्ञान नहीं है। वे जनता को अज्ञान भरी मीठी-मीठी बातें कहकर काल जाल में फाँस देते हैं। यह सब अज्ञानी वक्ता पृथ्वी को डुबोने यानि मानव का नाश करने के लिए उत्पन्न होते हैं। ये अन्य को मार्गदर्शन करते हैं, प्रवचन करते हैं, परंतु स्वयं भी भक्तिहीन होकर संसार से जाऐंगे। इनको भी निराशा ही हाथ लगेगी। वे सत्य भक्ति नहीं करते। केवल झूठा ज्ञान तथा सुना सुनाया ज्ञान अन्य को प्रवचन करके बताते फिरते हैं। स्वयं अमल नहीं करते। ये कुत्तों की तरह केवल भौंकते फिरते हैं। जिस ज्ञान का कोई आधार नहीं है। केवल कहने मात्र से बात नहीं बनती। परमात्मा प्राप्ति तथा मुक्ति पाने के लिए शास्त्रानुकूल साधना करनी होती है। जिस कारण से प्रारब्धवश जीवन में आने वाला संकट टल जाता है। तब बात बनेगी, केवल ज्ञान कथने से नहीं। यहां गरीबदास जी महाराज कहते हैं कि गरीब, बीजक की बांता करैं, बीजक नाहीं हाथ। पृथ्वी डोबन उतरे, कह-कह मीठी बात।। गरीब, बीजक की बातां कहै , बीजक नाहीं पास। औरों को प्रमोद ही, आपन चले निरास।। कबीर, करनी तज कथनी कथें, अज्ञानी दिन रात। कुकर ज्यों भोंकत फिरें, सुनी सुनाई बात।। सच्चा सतगुरु का ज्ञान पवित्र वेदों व गीता जी आदि पवित्र सदग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है व अधर्म की वृद्धि होती है तब परमेश्वर स्वयं आकर या अपने परम संत यानी सच्चे सतगुरु को भेज कर सत्य ज्ञान के द्वारा धर्म की पुनर्स्थापना करता है। श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है।पूर्ण संत तीन प्रकार के मंत्रों को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ 265 पर बोध सागर में मिलता है। गीता जी के अध्याय 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या 822 में मिलता है। यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25 के अनुसार तत्वदर्शी संत वह होता है जो वेदों के सांकेतिक शब्दों को पूर्ण विस्तार से वर्णन करता है जिससे पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति होती है। पूर्ण गुरु जब सत्य ज्ञान का प्रचार करता है तो सभी नकली गुरु जनता द्वारा उसका विरोध करा देते हैं।जबकि पूर्ण गुरु का ज्ञान शास्त्र प्रमाणित होता है।सच्चा सतगुरु अपने सत्य ज्ञान से स्वच्छ समाज का निर्माण करता है। संत रामपाल जी महाराज के नेतृत्व में पाखण्ड मुक्त, नशा मुक्त, दहेजमुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त समाज तैयार हो रहा है।यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा करवाएगा। वह जगत का उपकारक संत सच्चा सतगुरु होगा। पूर्ण संत सर्व वेद-शास्त्रों का ज्ञाता होता है। दूसरे वह मन-कर्म-वचन से यानि सच्ची श्रद्धा से केवल एक परमात्मा समर्थ की भक्ति स्वयं करता है तथा अपने अनुयाईयों से करवाता है। तीसरे वह सब अनुयाईयों से समान व्यवहार करता है। चौथे उसके द्वारा बताया भक्ति कर्म वेदों में वर्णित विधि के अनुसार होता है।पूर्ण संत तीन समय की पूजा बताता है। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताता है वह जगत का उपकारक संत होता है। सतगुरु की पहचान संत गरीबदास जी की वाणी में सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।। पूर्ण संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा। सभी सद्ग्रन्थों के पूर्ण जानकर संत रामपाल जी महाराज हैं जो सतभक्ति देकर मानव को सभी बुराइयों से दूर कर रहे हैं। समाज मे बुराइयो को दुर कर रहै है। मानवता का पाठ पढा रहे है।पूर्ण गुरु समाज से जाति व धर्म का भेद मिटाता है। कबीर, जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा। हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।। AnnapurnaMuhim SantRampalJi #sant ram pal ji maharaj #me follow