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. तवा की सब्जी
मै एक शादि मे गया। वहा पर खाना मे एक बहुत बड़ा तवा पर गर्म गर्म सब्जी बन रही थी। मैने एक मित्र को कहा देख कैसे सब्जी तैयार हो रही है । तप्तशीला पर काल भी सबकों इसी तरह जीव आत्मा को भून कर उनका सोरसा निकाल कर खाता है।
यह मैं नहीं कह रहा। परमात्मा कबीर साहेब जी का ज्ञान कह रहा है। उन्होंने अपना ज्ञान लिपिबद्ध करवाया है।कभी सुनो तो सही! जिसको तुम भगवान मान रहे हो वो गीता में कह रहा है मैं काल हुं सबको खाने के लिए प्रवृत्त हुआ हुं । कबीर साहब जी कहते हैं कि
कबीर, तीन लोक पिंजरा भया, पाप पुण्य दो जाल।
सभी जीव भोजन भये, एक खाने वाला काल।।
मरना तो सभी को हैं मरने बाद सीधे तप्त शीला पर जाना ही पड़ता है । कबीर साहब की सद्भक्ति करने वाला साधक सीधा सतलोक जाता है और इस काल के जाल से बाहर निकल जाता है ।
नहीं तप्तशीला पर जलना , कोय चौरासी का भय ना ।
रोग कटया सुमेर समान , या गयी तृष्णा खांसी ।।
AnnapurnaMuhim SantRampalJi
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