#ओम शिवगोरक्ष #ओम श्री नवनाथाय नमः #ओम चैतन्य कानिफनाथाय नमः #गोरक्षनाथ वाणी #!! ओम चैतन्य मच्छिन्द्रनाथाय नमः !!
🌹आदेश आदेश 🌹
🚩जय गुरुदेव 🚩
*ॐ शिव गोरक्ष योगी*
*चंद सूर नीं मुंद्रा कीन्ही, धरणी भस्म जल मेला*
*नादी ब्यंदी सींगी आकासी, अलख गुरु नां चेला*
महायोगी गोरख नाथपंथी कहते है की हमने चन्द्र और सूर्य [इड़ा व पिंगला] के मार्ग को त्याग, निज चेतना को सुषुम्णा मार्ग से प्रवाहित कर दिया। यही हमारे लिए मुद्रा धारण करना है। इसी प्रकार सांसारिकता को भस्म करके [परम र्निलेप रुप से मायापति होकर], उस भस्म को वैराग्य रुपी जल मे डालकर, उसे शरीर पर रमा लिया [यानी सांसारिक लीला हेतु माया को अधीन करके जगत का खेल खेला ]। यही हमारे लिए शरीर पर भस्म धारण करने का अभिप्राय है। महायोगी गोरख का कथन है की इसी प्रकार हमने नादी [निरंतर नादानुसंधान], बिंदी [बिंद (वीर्य) रक्षा करते हुए, अखंड ब्रह्मचर्य व्रत की पालना], सिंगी [शब्द ब्रह्म से एकरुपता] और आकाशी [निरन्तर शून्य स्वरुप [स्थूलता से परे स्थिति], को धारण करते हुए, अलख गुरु का शिष्यत्व प्राप्त कर लिया [यानी परम र्निकार की अवस्था मे परमात्म एकरुपता को आत्मसात कर लिया]।
*श्री श्री १००८ महामंडलेश्वर श्रीनाथसेवक अडबंगनाथ*
*अध्यक्ष श्री गोरखनाथ सिद्ध परिवार ट्रस्ट छत्रपती ते संभाजीनगर महाराष्ट्र*