#महाभारत की कथा #महाभारत
कथा को पूरा जरूर पढ़े.. ❤️🙏
महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद पांडवों के वंश में राजा परीक्षित का जन्म हुआ। वे अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु और माता उत्तरा के पुत्र थे। बचपन से ही वे अत्यंत वीर, धर्मप्रिय और प्रजा का ध्यान रखने वाले राजा बने। उनके शासन में राज्य सुख और समृद्धि से भर गया।🚩
लेकिन एक दिन एक छोटी सी घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।🚩
एक बार राजा परीक्षित शिकार के लिए जंगल गए। कई घंटों तक भटकने के बाद वे अत्यंत थक गए और उन्हें बहुत प्यास लगी। उसी समय उन्हें एक आश्रम दिखाई दिया। वहाँ महर्षि शमीक गहरे ध्यान में लीन बैठे थे।🚩
राजा ने उनके पास जाकर पानी माँगा, लेकिन ऋषि ध्यान में इतने मग्न थे कि उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित को लगा कि ऋषि जानबूझकर उनका अपमान कर रहे हैं।
क्रोध में आकर राजा ने पास में पड़ा एक मृत साँप उठाया और उसे ऋषि शमीक के गले में डाल दिया। फिर वे वहाँ से चले गए।🚩
कुछ समय बाद ऋषि के पुत्र श्रृंगी को यह बात पता चली। वह अपने पिता का अपमान सहन नहीं कर पाया। क्रोधित होकर उसने श्राप दिया—🚩
“जिस राजा ने मेरे पिता का अपमान किया है, उसे सातवें दिन तक्षक नामक नाग डसेगा और उसकी मृत्यु हो जाएगी।”
जब महर्षि शमीक को यह ज्ञात हुआ, तो उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने कहा—
“राजा से भूल हुई थी, लेकिन क्रोध में दिया गया श्राप उचित नहीं था।”
उधर जब राजा परीक्षित को श्राप के बारे में पता चला, तो उन्हें अपनी गलती का पश्चाताप हुआ। उन्होंने राज्य अपने पुत्र जनमेजय को सौंप दिया और गंगा तट पर जाकर भगवान का स्मरण करने लगे।🚩
सात दिनों तक महान ऋषि शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत की कथा सुनाई। राजा पूरी श्रद्धा से कथा सुनते रहे और उनका मन सांसारिक मोह से दूर होता गया।
सातवें दिन तक्षक नाग ने राजा तक पहुँचने का उपाय खोज लिया। कहते हैं कि वह ब्राह्मण का रूप धारण करके महल में प्रवेश कर गया। फिर एक फल के भीतर छोटे कीड़े का रूप लेकर राजा के पास पहुँचा।🚩
जैसे ही समय पूरा हुआ, वह कीड़ा अचानक विशाल तक्षक नाग बन गया और उसने राजा परीक्षित को डस लिया। विष इतना प्रचंड था कि उसी क्षण राजा का शरीर अग्नि के समान जल उठा।🚩
लेकिन उस समय तक राजा परीक्षित का मन भगवान भक्ति में पूरी तरह लीन हो चुका था। इसलिए उनकी आत्मा को मोक्ष प्राप्त हुआ।
राजा की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जनमेजय ने क्रोध में आकर “सर्प यज्ञ” किया, जिसमें सभी नागों को अग्नि में भस्म करने का प्रयास किया गया। तब आस्तिक मुनि ने आकर यह यज्ञ रुकवाया और नागवंश की रक्षा की।🚩
🌼 कथा से शिक्षा 🌼
क्रोध में किया गया छोटा सा अपमान भी बड़े विनाश का कारण बन सकता है। साथ ही यह कथा सिखाती है कि मृत्यु निकट होने पर भी भगवान का स्मरण और ज्ञान मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जा सकता है।