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रमेश हरीशंकर तिवारी
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रमेश हरीशंकर तिवारी
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22 दिन पहले
#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारती जय माता दी हिन्दी कविता: #नया अध्याय समय आगया बड़ा बेढंगा नाली में बहती है गंगा, छोटी छोटी बात के ऊपर सब एक दूजे से कर लेते है पंगा,,,, नव युवा को भान नहीं है भले बुरे का ज्ञान नहीं है, कब क्या कहना कैसे कहना इन विषयों का ध्यान नहीं है,,, माता पिता भाई बन्धु और गुरु जनों के मनका तनिक भी भाव ना जाने, किस रिश्ते का इस समाज में है कितना प्रभाव ना जाने,,,, अजब गजब ये पीढ़ी आज की जो छोटी छोटी बातों पर तुरंत रुष्ठ हो जाती है, बिना विचारे कुछ भी कहती और कुछ भी कर जाती है,,,,, अब अंत में यही कहूंगा आओ हम सब मिलकर यारो इस नव पीढ़ी को सहन सिलता शैय्यम सहजता का एक नया अध्याय पढ़ाएंगे भले बुरे का पूर्ण रूप से हम इन्हें आभाष कराए,,,,, कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी ( रसिक भारती ) #मुम्बईकर
रमेश हरीशंकर तिवारी
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1 महीने पहले
#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारती जय माता दी हिंदी कविता: #राजनीति का असली रूप राजनीति का यारो यह असली स्वरूप है यह बाहर से जितनी सुन्दर है यह भीतर से उतनी ही कुरूप है यही इस राजनीति का असली रूप है,,,,,2 यहां अच्छे और सच्चे कार्यकर्ताओं का होता बड़ा ही दोहन है, जो पूर्ण समर्पित वर्षों से लगा हुआ है वही यहां पर ठगा हुआ है,,,,,2 जो विरोधी दल से आते है वही खास बन जाते है मान मर्यादा और इज्जत वो सब से ज्यादा पाते है बात बात हर बात पर वही पूछे जाते है,,,,,,,2 राजनीति का यारो,,,,,, वंशवाद की यारो यहां सभी को लगी बड़ी बीमारी है, अपने अंश वंश के खातिर करते यहां सभी करते बड़ी तैयारी है, हैजा प्लेग से ज्यादा यारो ये खतरनाक बीमारी है,,,,,2 कार्यकर्ताओं को यारो ये देते झूठा प्रलोभन है, आस का दिया उनके मन में जलाकर उनका खूब करते दोहन है ये राजनीति का असली रूप है,,,,,,,2 जब जब चुनाव आता है तब तब ये कार्यकर्ताओं को खूब भरमाते है कभी साथ में बैठ कर खाए खाना कभी कंधे पर हाथ धर कदम से कदम साथ बढ़ाते है बन कर उनका हितैषी वो अपनापन जताते हैं,,,2 बात बात हर बात पर ये भाई बंधु बन जाते है, पर जैसे ही चुनाव ये जीत जाते है वैसेही ये अपना असली रंग दिखाते है जो कल तक था सब से खास उसको ही सब से पहले भूल जाते है,,,,,,2 ये राजनीति का असली रूप है ये बाहर से बड़ी सुन्दर है पर भीतर से बड़ी कुरूप है यह कोई बकवास नहीं मै राजनीतिक समाज का अनुभव कहता हु जो देख जो पढ़ा और जो महसूस किया वही सत्य कविता में लिखता हु यह राजनीति का असली रूप है,,,,,,,,,,,2 कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी ( रसिक भारती ) #मुम्बईकर
रमेश हरीशंकर तिवारी
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1 महीने पहले
#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारती जय माता दी हिंदी कविता: #बारूद का ढेर बारूद के ढेर पर बैठी है ये दुनिया , ना जाने किस गुमान में ऐंठी है ये दुनिया,,,, रक्त रंजीत कर धरा लाशों की लगा रही ढेर है, वक्त तेरा भी आयेगा इसमें ना तनिख देर है,,, आज जो लोगों को मार रहे है कल वो भी मरेंगे, तब ना इन्हें जमी मिलेगी ना इन्हें जन्नत मिलेगी,,,, जैसे इनके कर्म होंगे वैसे ही इन्हें कही तारीफ तो कही खूब जिल्लत मिलेगी,,, जमी थी सदा जमी पर वो जमी पर ही रहेगी, तेरी मेरी और हम सब की दास्तां ये कहेगी,,,, इसलिए कहता हु ना बना इंसान तो ना बन अब शैतान तू अब छोड़ दे झूठा गुमान तू,,,,, ये काया है माटी बस माटी रह जाएगी तेरी मेरे कर्मों की कहानी रह जाएगी,,,,, कवि;रमेश हरीशंकर तिवारी ( रसिक भारती ) #मुम्बईकर
रमेश हरीशंकर तिवारी
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1 महीने पहले
#जय माँ भारती #📚कविता-कहानी संग्रह #👧महिला दिवस Status⏳ जय माता दी हिंदी कविता: #नारी,,,, ( विश्व महिला दिवस पर विशेष ) जो हर दिन की जननी है उसका एक दिन क्या हम मनाए जिसकी वजह से हर दिन होता है वही तो है महिलाएं,,,, धारा वही है गगन वही है वही है जल और तरंग, वही आस है वही विश्वास है सब है उनके सॉन्ग,,,, वही गीत है वहीं संगीत है वही प्रेम है वही प्रीत है वही है साथी वही मनमीत हैं बिन नारी कुछ भी ना सम्भव,,,, कटु सत्य यह जानले जग सारा बिन नारी जग लागे मिथ्या नारी ही जग जननी है, हर एक रूप में यह पाई जाती पवन प्रकृति और धारा में,,,, सुर नर मुनि देव सब जिनको पूजे वह नारी का ही रूप है, बिन नारी यह जग सुना लगे जैसे कोई मरुस्थल है,,,, कहीं रसिक बात बड़ी भारी सुन ले जग के सब नर नारी नारी सुबुद्धि नारी शक्ति नारी पूजा नरी भक्ति नारी बिना कुछ भी नहीं है नारी है तो सब सम्भव हैं,,,,,, कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी ( रसिक भारती ,) #मुम्बईकर
रमेश हरीशंकर तिवारी
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2 महीने पहले
#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारतीजय माता दी हिन्दी कविता: सारा खेल है माया का नम्र निवेदन हैं अनुरोध किस बात पर करते हो क्रोध,,, खुद के भीतर करिए शोध किस से लेना है प्रति शोध,,,, आखिर किस से रूठे रहे हो और किस के काम में डाल रहे हो तुम अवरोध,,,, आखिर किसका है ये विरोध अन्तर मन में करो तुम शोध,,,, काया माया का खेल है सारा इसमें सभी उलझ कर रहते है,,, सम गर्मी वर्षा और ठंड सभी यहां पर सहते है,,,,, मृत्यु के बाद कोई जलकर माटी बन जाए कोई होके दफ्न माटी बन जाए सब की एक सी होती गति है,,,,, फिर किसको क्या है यहां पर कहना और किस बात का तुम् लोगे प्रति शोध,,,,, अन्तर मन में करिए शोध आखिर किसपर करते हो क्रोध,,,,,,, यह सारा खेल है माया पति का वही सत्य का सार है उसी के कृपा से मुक्ति मिलती वही सब का करते उधार है,,,,🙏🏻💐 कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी ( रसिक भारती ) #मुम्बईकर🖋️🙏