Wallet Install
Home
Explore
Wallet
Video
Profile
Trends
English
jasbir - Author on ShareChat
jasbir
555 views • 5 days ago
#Eek Tu Hi Guru Ji
HS 39 নসঃ EEKTU MIDU-GURU JI तुम्हारे डर को अपने मन मे बैठे डर से बनाया पुत्तर जिस परमात्मा नू तुमने ` d8 कैसे समाप्त करेगा? तुम डरते थे   मौत से, बीमारी से, अकाल से, गरीबी से, और अकेलेपन से। फिर तुमने एक अदृश्य शक्ति गढ़ ली और कहा- असफलता वह ऊपर बैठा सब देख रहा है। तुम्हें थोड़ी राहत मिली। फिर तुमने उसके मंदिर मस्जिद बनाई, तो किसी ने चर्च बनाया। लेकिन जब कठिन बनाए॰ किसी परिस्थितियाँ आईं॰ तब मनुष्य पहली बार देखा कि उसकी बनाई हुई धार्मिक दीवारें कितनी कमजोर हैंl बाढ़ आई= मंदिर और मस्जिद दोनों पानी में डूब गए..!!भूकंप आया = ईश्वर के घर भी मलबे में बदल गए...!! भूख आई= प्रवचन पेट नहीं भर सके...!! बेरोज़गारी आई॰ मंत्र नौकरी तस्वीर साफ़ हुई और आदमी ने देखा कि नहीं दिला सके...| विश्वास और उसकी वास्तविकता दो अलग चीजें हैंl उसका पुत्तर तुम धर्म को मत पकड़ो, सत्य को खोजो। किसी के शब्दों पर मत रुको , अपने अनुभव तक जाओ। जिस दिन तुमने स्वयं सत्य को छू लिया, उस दिन न मंदिर की जरूरत होगी, न मस्जिद की और न किसी साँस ही प्रार्थना होगी, दीवार की। तब जागरूकता ही तुम्हारी तुम्हारी पूजा होगी और तुम्हारा जीवन ही मंदिर, और यदि वह सत्य अभी नहीं मिला है=तो कम ्से॰्कम उसे खोजने की ईमानदारी तो पैदा करो क्योंकि सबसे बड़ा अधर्म ईश्वर को न मानना नहीं, बल्कि बिना जाने मान लेना है। HS 39 নসঃ EEKTU MIDU-GURU JI तुम्हारे डर को अपने मन मे बैठे डर से बनाया पुत्तर जिस परमात्मा नू तुमने ` d8 कैसे समाप्त करेगा? तुम डरते थे   मौत से, बीमारी से, अकाल से, गरीबी से, और अकेलेपन से। फिर तुमने एक अदृश्य शक्ति गढ़ ली और कहा- असफलता वह ऊपर बैठा सब देख रहा है। तुम्हें थोड़ी राहत मिली। फिर तुमने उसके मंदिर मस्जिद बनाई, तो किसी ने चर्च बनाया। लेकिन जब कठिन बनाए॰ किसी परिस्थितियाँ आईं॰ तब मनुष्य पहली बार देखा कि उसकी बनाई हुई धार्मिक दीवारें कितनी कमजोर हैंl बाढ़ आई= मंदिर और मस्जिद दोनों पानी में डूब गए..!!भूकंप आया = ईश्वर के घर भी मलबे में बदल गए...!! भूख आई= प्रवचन पेट नहीं भर सके...!! बेरोज़गारी आई॰ मंत्र नौकरी तस्वीर साफ़ हुई और आदमी ने देखा कि नहीं दिला सके...| विश्वास और उसकी वास्तविकता दो अलग चीजें हैंl उसका पुत्तर तुम धर्म को मत पकड़ो, सत्य को खोजो। किसी के शब्दों पर मत रुको , अपने अनुभव तक जाओ। जिस दिन तुमने स्वयं सत्य को छू लिया, उस दिन न मंदिर की जरूरत होगी, न मस्जिद की और न किसी साँस ही प्रार्थना होगी, दीवार की। तब जागरूकता ही तुम्हारी तुम्हारी पूजा होगी और तुम्हारा जीवन ही मंदिर, और यदि वह सत्य अभी नहीं मिला है=तो कम ्से॰्कम उसे खोजने की ईमानदारी तो पैदा करो क्योंकि सबसे बड़ा अधर्म ईश्वर को न मानना नहीं, बल्कि बिना जाने मान लेना है।
11 likes
15 shares

More like this

  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    eek TUMI பU Guru JI जहाँ भी नज़र जाए॰ हर तरफ़ बस आपका हीभनूर हो गुरु जी...!!जब ज़िंदगी में सब कुछ बिखरते देखा, तो समझ लिए  कुछ बड़ा लिख रहे हैं...!!कोई और गया कि आप मेरे मेरी तक़दीर नहीं बदल सकता, सिर्फ़ आप ही मेरी सोई हुई क़िस्मत को जिगा सकते हैं...!! अब अपनी ऊर्जा शिकायतों में नहीं आपके शुक्राने में लगाऊँगा, क्योंकि मेरे जीवन के नए सवेरे की शुरुआत वहीं से होगी गुरु जी...!!ढ़ ऊँ नमः शिवाय गुरु जी सदा सहाय..४! eek TUMI பU Guru JI जहाँ भी नज़र जाए॰ हर तरफ़ बस आपका हीभनूर हो गुरु जी...!!जब ज़िंदगी में सब कुछ बिखरते देखा, तो समझ लिए  कुछ बड़ा लिख रहे हैं...!!कोई और गया कि आप मेरे मेरी तक़दीर नहीं बदल सकता, सिर्फ़ आप ही मेरी सोई हुई क़िस्मत को जिगा सकते हैं...!! अब अपनी ऊर्जा शिकायतों में नहीं आपके शुक्राने में लगाऊँगा, क्योंकि मेरे जीवन के नए सवेरे की शुरुआत वहीं से होगी गुरु जी...!!ढ़ ऊँ नमः शिवाय गुरु जी सदा सहाय..४!
    13
    12
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    ओ नमः शिवाय EEK TU HI TU GURU JI पुत्तर, भोले शिव बाबा नूं सिर्फ़ मंदिरां दे अंदर ना ढूँढ... इक पल लई अपने अंदर भी उतर के वेख। जिहड़ी शांति दी तलाश तूं बाहर कर 316' तेरे अपने अंदर ही तेरा इंतज़ार कर रही है। प्रभात दी रिहा हैं ना, किरण दे नाल सिर्फ़ अपनी अक्खां ही ना खोल, अपने मन नूं पहली ' भी जगा ले। जागना ही असली जीवन है। जब तक तूं होश विच जीना शुरू नहीं करदा , तब तक तूं सिर्फ़ सपने वेख रिहा हैं।l हर नई प्रभात तैनूं अपने आप नूं पहचानण दा इकनया मौक़ा देंदी है। याद रख़ीं, असली सफलता बाहर दी दुनिया नूं जित्तण विच नहीं, बल्कि अपने मन नूं जित्तण विच है। मन जीते जग जीत . जिसने भी अपने अंदर नूं जान लिया, ओही इस दुनिया दा असली सम्राट है। ऊँ शिव जी सदा सहाय ७ नमः शिवाय ओ नमः शिवाय EEK TU HI TU GURU JI पुत्तर, भोले शिव बाबा नूं सिर्फ़ मंदिरां दे अंदर ना ढूँढ... इक पल लई अपने अंदर भी उतर के वेख। जिहड़ी शांति दी तलाश तूं बाहर कर 316' तेरे अपने अंदर ही तेरा इंतज़ार कर रही है। प्रभात दी रिहा हैं ना, किरण दे नाल सिर्फ़ अपनी अक्खां ही ना खोल, अपने मन नूं पहली ' भी जगा ले। जागना ही असली जीवन है। जब तक तूं होश विच जीना शुरू नहीं करदा , तब तक तूं सिर्फ़ सपने वेख रिहा हैं।l हर नई प्रभात तैनूं अपने आप नूं पहचानण दा इकनया मौक़ा देंदी है। याद रख़ीं, असली सफलता बाहर दी दुनिया नूं जित्तण विच नहीं, बल्कि अपने मन नूं जित्तण विच है। मन जीते जग जीत . जिसने भी अपने अंदर नूं जान लिया, ओही इस दुनिया दा असली सम्राट है। ऊँ शिव जी सदा सहाय ७ नमः शिवाय
    12
    5
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    GURU0z [EEK Tu TT Tu पुत्तर मनुष्य दे जीवन विच समस्या बाहर की भीड़ नहीं है, समस्या भीतर की भीड़ है यही मूल मंत्र है..!! हम सब यही भ्रम पालते हैं - हिमालय जाऊंगा तो शांति मिलेगी। फोन बंद कर दूंगा तो मन शांत होगा..लोग बदल जाएंगे तो जीवन बदल जाएगा, पर ম নুলনা ' करेगा [ जो भीड़ में सच यह है जो बाजार में ईर्ष्या करता था, वो जंगल ' अहंकारी था, वो एकांत में वैराग्य का अहंकार पाल लेगा.. ,क्योंकि पता बदला है, इंसान नहीं. . !!कृष्ण ने युद्धभूमि में गीता दी, कबीर करघा बुनते बुनते पार हो गए.॰॰ रविदास सिद्ध  जूते गाँठते गाँठते हो गए.॰! जागना स्थान की घटना नहीं, इसका मतलब? चेतना की घटना है..!!हिमालय शांत नहीं करता , तुम शांत हो जाओ तो हिमालय भी भीतर उतर आता है,और अगर भीतर कोलाहल है तो कैलाश भी बाजार बन तुम्हारे जाएगा। पुत्तर बाहर का शोर इतना परेशान नहीं करता, जितना भीतर का शोर करता है, मनुष्य की हजार इच्छाएं, सैकड़ों भय अनगिनत स्मृतियां - यही असली बाजार है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4 GURU0z [EEK Tu TT Tu पुत्तर मनुष्य दे जीवन विच समस्या बाहर की भीड़ नहीं है, समस्या भीतर की भीड़ है यही मूल मंत्र है..!! हम सब यही भ्रम पालते हैं - हिमालय जाऊंगा तो शांति मिलेगी। फोन बंद कर दूंगा तो मन शांत होगा..लोग बदल जाएंगे तो जीवन बदल जाएगा, पर ম নুলনা ' करेगा [ जो भीड़ में सच यह है जो बाजार में ईर्ष्या करता था, वो जंगल ' अहंकारी था, वो एकांत में वैराग्य का अहंकार पाल लेगा.. ,क्योंकि पता बदला है, इंसान नहीं. . !!कृष्ण ने युद्धभूमि में गीता दी, कबीर करघा बुनते बुनते पार हो गए.॰॰ रविदास सिद्ध  जूते गाँठते गाँठते हो गए.॰! जागना स्थान की घटना नहीं, इसका मतलब? चेतना की घटना है..!!हिमालय शांत नहीं करता , तुम शांत हो जाओ तो हिमालय भी भीतर उतर आता है,और अगर भीतर कोलाहल है तो कैलाश भी बाजार बन तुम्हारे जाएगा। पुत्तर बाहर का शोर इतना परेशान नहीं करता, जितना भीतर का शोर करता है, मनुष्य की हजार इच्छाएं, सैकड़ों भय अनगिनत स्मृतियां - यही असली बाजार है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय 4
    52
    37
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    GURUI @ ek VQ ஏய ٥٥ पुत्तर, मन दीयां वाधू सोचां तैनू थका देंदीयां ने, पर परमात्मा दा ध्यान तैनू ताज़गी देंदा दै.!! रब्ब नू बाहर लब्भण दी ओहनू बस अपने अदर जाग के লীভ ন৪ী; সঃযুষ করং৩! दिन रात दुनिया दी पिलिय उलझनां बंदे नू अंदरों तोड़ देदी नाम सिभसयन नू सच्ची खुशी ते ताज़गी గ్ే q R qT फर दा इक ही तरीका है देंदा है..!! पुत्तर, मन नू शात ~  तू साक्षी बन...!!अपने विचारां ते ना ही लड नही विच बह। विचारां नू वगदे पानी चांग लंघ जाण देः तू ओहना ओहनू ' वेखण वाला बन। जद तू सिर्फ वेखण बस चुपचाप वाला बन जावेंगा, तां मन अपने आप शांत ते सहज हो जावेगा .!! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ५ GURUI @ ek VQ ஏய ٥٥ पुत्तर, मन दीयां वाधू सोचां तैनू थका देंदीयां ने, पर परमात्मा दा ध्यान तैनू ताज़गी देंदा दै.!! रब्ब नू बाहर लब्भण दी ओहनू बस अपने अदर जाग के লীভ ন৪ী; সঃযুষ করং৩! दिन रात दुनिया दी पिलिय उलझनां बंदे नू अंदरों तोड़ देदी नाम सिभसयन नू सच्ची खुशी ते ताज़गी గ్ే q R qT फर दा इक ही तरीका है देंदा है..!! पुत्तर, मन नू शात ~  तू साक्षी बन...!!अपने विचारां ते ना ही लड नही विच बह। विचारां नू वगदे पानी चांग लंघ जाण देः तू ओहना ओहनू ' वेखण वाला बन। जद तू सिर्फ वेखण बस चुपचाप वाला बन जावेंगा, तां मन अपने आप शांत ते सहज हो जावेगा .!! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ५
    15
    9
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Cedu nululuuutdt पुत्तर, सबतों पहले अपने दिलों नूं सा़फ़ करो, क्योंकि जब शीशा ही गंदा होवे , तां उस विच सूरज दी चमक भी धुँधली नज़र आउंदी है। इसमें सूरज दा कोई दोष नहीं हुंदा पुत्तर, सारा दोष उस गंदे शीशे दा है..!! इसी तरह जेकर साडा मन ईर्ष्या, अहंकार ते 'కెెIIaf' बिल्कुल ' वासना नाल भरेया होवेगा, तां सानूं सबतों सुंदर साधारण दिखाई देवेगा| पर जेकर मन विच सच्चा प्रेम ते निम्रता आ जावे, तां एक साधारण जीहा इंसान भी परमेसर (ईश्वर) दा रूप नज़र आउन लग जांदा है। नज़रिया बदलो , नज़ारे बदल जानगे पुत्तर, जिस दिन तेरी अक्खां (आंखों) विच उस दिन तैनूं इह सारी दुनिया बदलदी हुई परमात्मा दा सच्चा प्रेम उतर आया ना, दिखाई देवेगी . !! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ५ Cedu nululuuutdt पुत्तर, सबतों पहले अपने दिलों नूं सा़फ़ करो, क्योंकि जब शीशा ही गंदा होवे , तां उस विच सूरज दी चमक भी धुँधली नज़र आउंदी है। इसमें सूरज दा कोई दोष नहीं हुंदा पुत्तर, सारा दोष उस गंदे शीशे दा है..!! इसी तरह जेकर साडा मन ईर्ष्या, अहंकार ते 'కెెIIaf' बिल्कुल ' वासना नाल भरेया होवेगा, तां सानूं सबतों सुंदर साधारण दिखाई देवेगा| पर जेकर मन विच सच्चा प्रेम ते निम्रता आ जावे, तां एक साधारण जीहा इंसान भी परमेसर (ईश्वर) दा रूप नज़र आउन लग जांदा है। नज़रिया बदलो , नज़ारे बदल जानगे पुत्तर, जिस दिन तेरी अक्खां (आंखों) विच उस दिन तैनूं इह सारी दुनिया बदलदी हुई परमात्मा दा सच्चा प्रेम उतर आया ना, दिखाई देवेगी . !! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ५
    6
    10
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    (GURu-ನ2 [٤٥ ٢٥٥٥٥ ٥٠ पुत्तर! मेरी गल्ल सुनो। ध्यान नाल बंदा जन्मां-जन्मां तों बाहर भाग रहा है पैसे, मान ते रिश्तों दे पीछे। पर बाहर दी दौड़ सिर्फ थकाएगी, असली यात्रा तां तेरे अंदर दी है। जदों शांत बैठदा है, तां अंदरों आवाज़़ आउंदी है "मैं"। एह मैं ही तेरे सारे दुखां दी जड़ है। जदों एह भाव उठे, तां एहदे नाल बस एक देखण वाला (साक्षी) बन जा। जैसे ही 'मैं बहना नहीं, दा शोर थमेगा, अंदर दी असीम शांति प्रकट हो जावेगी। रोज़ शांत बैठ, सांसां नूं देख ते॰इस 'मैं दे खेल दा दर्शक बन जा। तेरा साक्षीभाव गहरा होवेगा, सत्य प्रकट हो जावेगा। जब-जब फिर बाहर नहीं लब्भणा पवेगा, तू पाएगा कि जिसनूं तू लब्भ रहा सी, ओह तू खुद ही हैं!ऊँ नमः शिवाय II शिवा शिव जी सदा सहाय 4 (GURu-ನ2 [٤٥ ٢٥٥٥٥ ٥٠ पुत्तर! मेरी गल्ल सुनो। ध्यान नाल बंदा जन्मां-जन्मां तों बाहर भाग रहा है पैसे, मान ते रिश्तों दे पीछे। पर बाहर दी दौड़ सिर्फ थकाएगी, असली यात्रा तां तेरे अंदर दी है। जदों शांत बैठदा है, तां अंदरों आवाज़़ आउंदी है "मैं"। एह मैं ही तेरे सारे दुखां दी जड़ है। जदों एह भाव उठे, तां एहदे नाल बस एक देखण वाला (साक्षी) बन जा। जैसे ही 'मैं बहना नहीं, दा शोर थमेगा, अंदर दी असीम शांति प्रकट हो जावेगी। रोज़ शांत बैठ, सांसां नूं देख ते॰इस 'मैं दे खेल दा दर्शक बन जा। तेरा साक्षीभाव गहरा होवेगा, सत्य प्रकट हो जावेगा। जब-जब फिर बाहर नहीं लब्भणा पवेगा, तू पाएगा कि जिसनूं तू लब्भ रहा सी, ओह तू खुद ही हैं!ऊँ नमः शिवाय II शिवा शिव जी सदा सहाय 4
    11
    13
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    Lek UU HI TU GURU @1 पुत्तर, जब तक तूँ अपनी बनाई हुई पहचान, अपना अहँकार अपनी इज़्ज़त प्रतिष्ठा और अपनी ऐ सामाजिक छवि नहीं छड्डदा.. तब तक तूँ परमात्मा दे प्रेम विच प्रवेश नहीं कर सकदा। क्योंकि मालिक दा द्वार किसी 'इज्ज़तदार या बड़े बंदे ली नहीं खुलदा। ओ तां ओह्दे ली खुलदा ऐ जो ओह्दे प्रेम विच एन्ना डुब्ब जावे कि दुनिया ओहनूं मजनूँ॰ दीवानाॅँया 'आवारा कहन लग पावे..!! पुत्तर, मजनूँ होन दा मतलब किसी औरत दे पीछे पागल होना नहीं ऐ॰॰॰ मजनूँ होना तां तेरे अपने अहँकार दी मौत ऐ! लैला कोई स्त्री नहीं, ऐ तां कुदरत ते रब दा परम सौंदर्य ऐ। ते 'आवारा' ओह ऐ॰ जिसने भीड़ दी॰ सड़क छड्ड के सच दी पगडंडी चुन लई ऐ॰॰!!जिस दिन तूँ परमात्मा दे प्यार ली अपनी पहचान दाँव ते ला देवेंगा, उसी दिन ओह मालिक तैनूं लब्भ लेवेगा। क्योंकि परमात्मा तर्कों नाल नहीं, दीवानगी नाल मिलदा ऐ॰ ज्ञान नाल नहीं, इश्क़ नाल मिलदा ऐ॰॰!! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय % Lek UU HI TU GURU @1 पुत्तर, जब तक तूँ अपनी बनाई हुई पहचान, अपना अहँकार अपनी इज़्ज़त प्रतिष्ठा और अपनी ऐ सामाजिक छवि नहीं छड्डदा.. तब तक तूँ परमात्मा दे प्रेम विच प्रवेश नहीं कर सकदा। क्योंकि मालिक दा द्वार किसी 'इज्ज़तदार या बड़े बंदे ली नहीं खुलदा। ओ तां ओह्दे ली खुलदा ऐ जो ओह्दे प्रेम विच एन्ना डुब्ब जावे कि दुनिया ओहनूं मजनूँ॰ दीवानाॅँया 'आवारा कहन लग पावे..!! पुत्तर, मजनूँ होन दा मतलब किसी औरत दे पीछे पागल होना नहीं ऐ॰॰॰ मजनूँ होना तां तेरे अपने अहँकार दी मौत ऐ! लैला कोई स्त्री नहीं, ऐ तां कुदरत ते रब दा परम सौंदर्य ऐ। ते 'आवारा' ओह ऐ॰ जिसने भीड़ दी॰ सड़क छड्ड के सच दी पगडंडी चुन लई ऐ॰॰!!जिस दिन तूँ परमात्मा दे प्यार ली अपनी पहचान दाँव ते ला देवेंगा, उसी दिन ओह मालिक तैनूं लब्भ लेवेगा। क्योंकि परमात्मा तर्कों नाल नहीं, दीवानगी नाल मिलदा ऐ॰ ज्ञान नाल नहीं, इश्क़ नाल मिलदा ऐ॰॰!! ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय %
    97
    119
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    alt cry निटयठ विलोर Slolg 5 अतती गुर नताडि 6 [కెక Ud Eఐ Uu (Gొ లౌ पुत्तर, संसार दा घोर से॰घोर अंधकार ते नकारात्मकता भी तेरे अंदरऔमौजूद विश्वास ते सत्य दे एक छोटे से दीपक नूं बुझा नी सकती! परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न होण ओपने अंदर आस्था दी लौ नूं हमेशा जला के रख। इक मेरेरशप्रति तेरा কী ৯২ विश्वास जीवन विच नया प्रकाश लेके आएगा... ते तैनूं हर संकट तों पार लाएगा! शुकराना कर, ते बेफिक्र रह! ऊँ नमः बस भरोसा रख शिवाय, शिव जी सदा सहाय U alt cry निटयठ विलोर Slolg 5 अतती गुर नताडि 6 [కెక Ud Eఐ Uu (Gొ లౌ पुत्तर, संसार दा घोर से॰घोर अंधकार ते नकारात्मकता भी तेरे अंदरऔमौजूद विश्वास ते सत्य दे एक छोटे से दीपक नूं बुझा नी सकती! परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न होण ओपने अंदर आस्था दी लौ नूं हमेशा जला के रख। इक मेरेरशप्रति तेरा কী ৯২ विश्वास जीवन विच नया प्रकाश लेके आएगा... ते तैनूं हर संकट तों पार लाएगा! शुकराना कर, ते बेफिक्र रह! ऊँ नमः बस भरोसा रख शिवाय, शिव जी सदा सहाय U
    18
    8
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    rK d ٥0? १ Grru ಊr की देह तां शूद्र है॰ ते सरल है। शूद्र सदा ही सरल हुंदे ने। मनुष्यों पुत्तर पर मन बहुत चालबाज़, चालाक होशियार ते हिसाब बिठाने वाला है! मन किसे चीज़ नाल राज़ी नी हुँदा। मन मन की ही सब दौड़ां ने.॰. फैलाए चला जांदा है। ओ जानता ही नहीं कि व्यवसायी है॰ ओ व्यापार किए कित्थे रुकना है! ओ अपनी दुकान बड़ी चला जांदा है॰॰. ते बड़ी करदे करदे ही मर जांदा है. क़ दूजी ओड़, देह कुछ ज़्यादा मंगां नी fag करदी। दो रोटी मिल जाएं॰ सोण के छप्पर मिल जाए॰ बिस्तर मिल जाए॰ जल मिल जाए॰ कोई प्रेम करने वाला मिल जाए॰॰॰ बस! शरीर की मांगां सीधी साफ ने, थोड़ी है, और सीमित है। देह की मांगां सीमित हुंदी ने। देह कोई ऐसी गल्लां नी मंगदी जो असंभव हों। देह नूं असंभव विच कोई रस नी हुँदा... देह तां बिलकुल प्राकृतिक है! इसलिए अपने शरीर जोड़ रूपी देह नूं सत्संग विच ले कर अपने मन नूं परमात्मा नाल के अपना जीवन सफल करो जी॰॰!! ऊँ नमः शिवाय, शिव जी सदा सहाय d rK d ٥0? १ Grru ಊr की देह तां शूद्र है॰ ते सरल है। शूद्र सदा ही सरल हुंदे ने। मनुष्यों पुत्तर पर मन बहुत चालबाज़, चालाक होशियार ते हिसाब बिठाने वाला है! मन किसे चीज़ नाल राज़ी नी हुँदा। मन मन की ही सब दौड़ां ने.॰. फैलाए चला जांदा है। ओ जानता ही नहीं कि व्यवसायी है॰ ओ व्यापार किए कित्थे रुकना है! ओ अपनी दुकान बड़ी चला जांदा है॰॰. ते बड़ी करदे करदे ही मर जांदा है. क़ दूजी ओड़, देह कुछ ज़्यादा मंगां नी fag करदी। दो रोटी मिल जाएं॰ सोण के छप्पर मिल जाए॰ बिस्तर मिल जाए॰ जल मिल जाए॰ कोई प्रेम करने वाला मिल जाए॰॰॰ बस! शरीर की मांगां सीधी साफ ने, थोड़ी है, और सीमित है। देह की मांगां सीमित हुंदी ने। देह कोई ऐसी गल्लां नी मंगदी जो असंभव हों। देह नूं असंभव विच कोई रस नी हुँदा... देह तां बिलकुल प्राकृतिक है! इसलिए अपने शरीर जोड़ रूपी देह नूं सत्संग विच ले कर अपने मन नूं परमात्मा नाल के अपना जीवन सफल करो जी॰॰!! ऊँ नमः शिवाय, शिव जी सदा सहाय d
    20
    21
  • jasbir - Author on ShareChat
    jasbir
    #Eek Tu Hi Guru Ji
    ٥٥» ٤٥ (GuRu [ತK @')1 ٦  पुत्तर इस संसार विच परमात्मा ही अंतिम सत्य है, और मैं उस सत्य तक पहुँचने का जीवित द्वार  जो मान और सम्मान तुम सब मुझे देते हो, मैं अपनी ५ी व्यक्ति पूजा नहीं कराना चाहता. बल्कि मेरा भाव यह लिए है कि तुम्हारा हृदय हमेशा जीवन के उस सत्य के' खुला रहे! मेरा असली काम तो बस इतना है > 6R हृदय में परमात्मा दे नाम दी जोत नू जगाना, ताकि मैं ही भीतर बैठे परमात्मा से मिला सकूँ!ऊँ 38 तुम्हारे' नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ७ ٥٥» ٤٥ (GuRu [ತK @')1 ٦  पुत्तर इस संसार विच परमात्मा ही अंतिम सत्य है, और मैं उस सत्य तक पहुँचने का जीवित द्वार  जो मान और सम्मान तुम सब मुझे देते हो, मैं अपनी ५ी व्यक्ति पूजा नहीं कराना चाहता. बल्कि मेरा भाव यह लिए है कि तुम्हारा हृदय हमेशा जीवन के उस सत्य के' खुला रहे! मेरा असली काम तो बस इतना है > 6R हृदय में परमात्मा दे नाम दी जोत नू जगाना, ताकि मैं ही भीतर बैठे परमात्मा से मिला सकूँ!ऊँ 38 तुम्हारे' नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय ७
    8
    5
Home
Explore
Wallet
Video