sn vyas
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🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏 🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏 #भाग_४३/१ 🏹🎻🪔📝🦚🔥🦚📝🪔🎻🏹 तू अपना नियत कर्म कर--- बाकी झंझट छोड़ दे :* *परमात्मा के विशाल जगत-- यंत्र में तू एक छोटे से छोटा पुर्जा है । तू परमात्मा के इस जगत के महान चर्खे के एक छोटे से अंश को व्यक्त करने वाला माध्यम मात्र है। तू ईश्वर इच्छा का एक छोटे से छोटा, किंतु बहुत उपयोगी वाहन है।* *बड़ी-बड़ी मिलों में बड़ी मशीनरी में एक छोटा-- सा स्क्रू ही यदि ढीला हो जाता है तो पूरी मशीनरी बंद हो जाती है । ईश्वरी योजना की ऐसी बड़ी मशीनरी को सजाने की तुझ में शक्ति नहीं है, किंतु उसने छोटे से छोटे स्क्रू के रूप में तुझे जहां जोड़ा है , वहां उसने तुझे सोच समझकर ही जोड़ा है । पूरी मशीनरी को चलाने की तेरी शक्ति भी नहीं है और जिम्मेदारी भी नहीं है।* *अगर तू छोटे से छोटे कर्म का त्याग करें या उसमें प्रमाद करें तो तू पूरी मशीनरी को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार माना जाएगा और परमात्मा का अपराधी माना जाएगा , इसका ध्यान रखना।* *सेना एक विशाल युद्ध मोर्चे पर लड़ती हो , उसमें किस सैनिक को कहां नियुक्त करना है , उसे क्या काम सोपना है, इसकी जिम्मेदारी सेनापति की होती है । हार जीत की जिम्मेदारी भी सेनापति की होती है । सैनिक को केवल सेनापति की आज्ञा अनुसार ईमानदारी से अपना काम करना होता है ।* *अपने प्रत्येक कर्म में" मैं " पद का अहंकार छोड़ दें और परमात्मा को केंद्र में रखकर उसकी इच्छा अनुसार उसे प्रसन्न करने के लिए अपना कर्तव्य करेगा तो प्रत्येक कार्य में हार जीत की जिम्मेदारी परमात्मा अपने सिर पर ले लेंगे।* क्रमश: ✍🏽 #कर्म #कर्म ही पूजा है #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ
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